By Malay Ojha | Published: 29 July 2026 at 09:03 PM
वाराणसी: उत्तर प्रदेश के भदोही जिले का नाम एक बार फिर बदलने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि भदोही को दोबारा ‘संत रविदास नगर’ के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला संत गुरु रविदास जी महाराज के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने के उद्देश्य से लिया गया है। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास जी महाराज की जन्मस्थली से सामाजिक समरसता अभियान की शुरुआत के दौरान की।
मुख्यमंत्री के इस ऐलान के बाद भदोही जिले के नाम को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। सीर गोवर्धनपुर में आयोजित कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संत रविदास जी महाराज ने समाज को समानता, भाईचारे और आपसी सद्भाव का रास्ता दिखाया। ऐसे में उनके नाम से जिले की पहचान को जोड़ना उनके प्रति सम्मान का प्रतीक है।
महापुरुषों की प्रतिमाओं की सुरक्षा पर भी बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर संत रविदास, महर्षि वाल्मीकि, बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर और सामाजिक न्याय की लड़ाई से जुड़े दूसरे महापुरुषों की प्रतिमाओं को लेकर भी सरकार की योजना बताई। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित इन महापुरुषों की प्रतिमाओं की सुरक्षा सरकार सुनिश्चित करेगी।
जहां छतरी नहीं, वहां सरकार कराएगी निर्माण
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिन स्थानों पर महापुरुषों की प्रतिमाएं लगी हैं, लेकिन उनके ऊपर छतरी नहीं है, वहां सरकार अपने खर्च पर छतरी बनवाएगी। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इसका मकसद सिर्फ प्रतिमाओं को मौसम से बचाना नहीं, बल्कि महापुरुषों के सम्मान और उनकी स्मृति को सुरक्षित रखना भी है।
संत रविदास की 650वीं जयंती का साल शुरू
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने संत रविदास जी महाराज की 650वीं जयंती वर्ष को लेकर भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जयंती वर्ष की शुरुआत गुरु पूर्णिमा से की जा रही है और यह अगले साल माघी पूर्णिमा तक चलेगा। इस दौरान देश और प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में कई तरह के सामाजिक, सांस्कृतिक और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पिछली सरकारों पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के दौरान महापुरुषों के सम्मान से जुड़े कई फैसलों को बदलने का काम किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार अब उन फैसलों को सुधारने की दिशा में काम कर रही है और महापुरुषों के सम्मान से जुड़े विषयों को प्राथमिकता दी जा रही है।
131 कलशों में जन्मस्थली की मिट्टी देशभर में जाएगी
संत रविदास जी महाराज की 650वीं जयंती वर्ष के कार्यक्रमों के तहत उनकी जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर की पवित्र मिट्टी को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने की भी योजना है। कार्यक्रम में 131 कलशों में जन्मस्थली की मिट्टी भरकर देश के 28 राज्यों के 97 जिलों में भेजे जाने की बात कही गई। इसके जरिए संत रविदास के विचारों और उनके सामाजिक संदेश को देश के व्यापक हिस्से तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
देशभर में 5 हजार से ज्यादा जगहों पर होंगी गोष्ठियां
अभियान के तहत देशभर में 5,000 से अधिक स्थानों पर सामाजिक समरसता गोष्ठियां आयोजित करने की तैयारी है। इन कार्यक्रमों में संत रविदास जी के जीवन, उनके साहित्य और समाज को दिए गए संदेश पर चर्चा होगी। खास तौर पर समानता, भाईचारे और सामाजिक एकता के उनके विचारों को लोगों तक पहुंचाने पर जोर रहेगा।
कई राज्यों के मंत्री भी कार्यक्रम में हुए शामिल
सीर गोवर्धनपुर में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सहित कई राज्यों के मंत्री और अलग-अलग सामाजिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। संत रविदास की जन्मस्थली से शुरू किए गए इस अभियान को देशभर में सामाजिक समरसता का संदेश पहुंचाने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की तैयारी
सरकार की योजना के मुताबिक, 650वीं जयंती वर्ष के दौरान उत्तर प्रदेश के अलावा देश के दूसरे हिस्सों में भी सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम होंगे। इन आयोजनों में संत रविदास जी के जीवन और उनके विचारों को केंद्र में रखा जाएगा। सरकार का कहना है कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच समानता, भाईचारे और आपसी जुड़ाव की भावना को मजबूत करना है।
नाम बदलने के ऐलान ने खींचा सबसे ज्यादा ध्यान
हालांकि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सामाजिक समरसता अभियान की शुरुआत करना था, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से भदोही का नाम फिर से ‘संत रविदास नगर’ किए जाने की घोषणा सबसे बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक ऐलान बनकर सामने आई। अब इस घोषणा के बाद जिले के नाम को लेकर आगे की सरकारी प्रक्रिया पर सबकी नजर रहेगी। मुख्यमंत्री ने जिस मंच से यह ऐलान किया, वह संत रविदास जी महाराज की जन्मस्थली थी, इसलिए इस घोषणा को धार्मिक आस्था और सामाजिक सम्मान से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
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