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जन्तर-मन्तर पर साजिशन हिंसा के लिए प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पर भी मुकदमा चले, सोशलिस्ट पार्टी की माँग

By aryavartalive | Published: 29 July 2026 at 09:56 PM

लखनऊ/पटना : सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुई घटना को लेकर सरकार और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी के प्रधान महासचिव संदीप पांडेय ने दावा किया कि जंतर-मंतर पर जुटी भीड़ पूरी तरह स्वानुशासित थी और प्रदर्शन के दौरान लोग इस बात का विशेष ध्यान रख रहे थे कि किसी दूसरे व्यक्ति को किसी तरह की परेशानी या तकलीफ न हो। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की ओर से किसी तरह की हिंसा नहीं की गई, बल्कि जो भी हिंसक स्थिति बनी, वह पुलिस की कार्रवाई के कारण हुई।

संदीप पांडेय का दावा- प्रदर्शनकारी पूरी तरह अनुशासित थे
संदीप पांडेय के मुताबिक, प्रदर्शन में शामिल लोगों का मकसद अपनी मांगों और विरोध को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक पहुंचाना था। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर मौजूद लोगों के बीच अनुशासन बना हुआ था और प्रदर्शनकारी इस बात का भी ध्यान रख रहे थे कि उनकी वजह से किसी अन्य व्यक्ति को परेशानी न हो। ऐसे में प्रदर्शनकारियों पर हिंसा या उपद्रव का आरोप लगाना उचित नहीं है।

हिंसा की शुरुआत कैसे हुई? निष्पक्ष जांच की मांग
सोशलिस्ट पार्टी के प्रधान महासचिव ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि यह साफ हो सके कि हिंसा की शुरुआत किस तरफ से हुई और इसके लिए आखिर कौन जिम्मेदार था। उनका कहना है कि घटना की वास्तविक सच्चाई सामने लाने के लिए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच जरूरी है।

धनंजय सिन्हा का सरकार पर गंभीर आरोप
वहीं, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार पर और भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से पुलिस और छात्रों के बीच कथित तौर पर दोनों तरफ लोगों को प्लांट किया गया, ताकि माहौल बिगाड़ा जा सके और हिंसा की स्थिति पैदा हो। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

‘हिंसा की साजिश हुई तो जिम्मेदारी तय हो’
धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि घटना के पीछे कथित साजिश के आरोपों की जांच केवल पुलिस या प्रशासन के स्तर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि जांच में सरकार या उसके स्तर पर किसी तरह की साजिश के आरोप सामने आते हैं, तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

PM मोदी और अमित शाह पर मुकदमे की मांग
धनंजय कुमार सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भी मुकदमा चलाए जाने की मांग की। उनका कहना था कि यदि जांच में यह सामने आता है कि पुलिस और छात्रों के बीच हिंसा भड़काने के लिए किसी स्तर पर साजिश रची गई थी, तो इसके लिए जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

सोशलिस्ट पार्टी ने सरकार से मांगा जवाब
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के नेताओं ने पूरे मामले को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध और प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है। ऐसे में किसी भी प्रदर्शन के दौरान हिंसा की स्थिति बनने पर निष्पक्ष जांच के जरिए सच्चाई सामने आनी चाहिए। पार्टी नेताओं ने मांग की कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुई घटना की पूरी सच्चाई सामने लाई जाए और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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जन्तर-मन्तर पर साजिशन हिंसा के लिए प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पर भी मुकदमा चले, सोशलिस्ट पार्टी की माँग

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लखनऊ/पटना : सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुई घटना को लेकर सरकार और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी के प्रधान महासचिव संदीप पांडेय ने दावा किया कि जंतर-मंतर पर जुटी भीड़ पूरी तरह स्वानुशासित थी और प्रदर्शन के दौरान लोग इस बात का विशेष ध्यान रख रहे थे कि किसी दूसरे व्यक्ति को किसी तरह की परेशानी या तकलीफ न हो। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की ओर से किसी तरह की हिंसा नहीं की गई, बल्कि जो भी हिंसक स्थिति बनी, वह पुलिस की कार्रवाई के कारण हुई।

संदीप पांडेय का दावा- प्रदर्शनकारी पूरी तरह अनुशासित थे
संदीप पांडेय के मुताबिक, प्रदर्शन में शामिल लोगों का मकसद अपनी मांगों और विरोध को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक पहुंचाना था। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर मौजूद लोगों के बीच अनुशासन बना हुआ था और प्रदर्शनकारी इस बात का भी ध्यान रख रहे थे कि उनकी वजह से किसी अन्य व्यक्ति को परेशानी न हो। ऐसे में प्रदर्शनकारियों पर हिंसा या उपद्रव का आरोप लगाना उचित नहीं है।

हिंसा की शुरुआत कैसे हुई? निष्पक्ष जांच की मांग
सोशलिस्ट पार्टी के प्रधान महासचिव ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि यह साफ हो सके कि हिंसा की शुरुआत किस तरफ से हुई और इसके लिए आखिर कौन जिम्मेदार था। उनका कहना है कि घटना की वास्तविक सच्चाई सामने लाने के लिए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच जरूरी है।

धनंजय सिन्हा का सरकार पर गंभीर आरोप
वहीं, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार पर और भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से पुलिस और छात्रों के बीच कथित तौर पर दोनों तरफ लोगों को प्लांट किया गया, ताकि माहौल बिगाड़ा जा सके और हिंसा की स्थिति पैदा हो। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

‘हिंसा की साजिश हुई तो जिम्मेदारी तय हो’
धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि घटना के पीछे कथित साजिश के आरोपों की जांच केवल पुलिस या प्रशासन के स्तर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि जांच में सरकार या उसके स्तर पर किसी तरह की साजिश के आरोप सामने आते हैं, तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

PM मोदी और अमित शाह पर मुकदमे की मांग
धनंजय कुमार सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भी मुकदमा चलाए जाने की मांग की। उनका कहना था कि यदि जांच में यह सामने आता है कि पुलिस और छात्रों के बीच हिंसा भड़काने के लिए किसी स्तर पर साजिश रची गई थी, तो इसके लिए जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

सोशलिस्ट पार्टी ने सरकार से मांगा जवाब
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के नेताओं ने पूरे मामले को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध और प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है। ऐसे में किसी भी प्रदर्शन के दौरान हिंसा की स्थिति बनने पर निष्पक्ष जांच के जरिए सच्चाई सामने आनी चाहिए। पार्टी नेताओं ने मांग की कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुई घटना की पूरी सच्चाई सामने लाई जाए और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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