By Malay Ojha | Published: 30 July 2026 at 01:39 PM
दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को हुई सुनवाई में अदालत ने साफ किया कि हालात बेहद गंभीर होने और हिंसा काबू से बाहर होने की स्थिति में पुलिस के पास बल प्रयोग के कई चरण हो सकते हैं। अदालत ने सवाल उठाया कि अगर किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर उपद्रवी तत्व हावी होकर उसे हिंसक बना दें और लाठीचार्ज तथा आंसू गैस से हालात न संभलें, तो पुलिस को पैलेट गन के इस्तेमाल से कैसे रोका जा सकता है। हालांकि, अदालत ने कथित तौर पर घायल प्रदर्शनकारियों के इलाज का भी निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान तैनात त्वरित कार्रवाई बल के गोला-बारूद से जुड़े रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाए। अदालत का यह निर्देश इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि प्रदर्शनकारियों की ओर से आरोप लगाया गया है कि कार्रवाई के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया था। रिकॉर्ड सुरक्षित रखने से आगे की सुनवाई में यह जांचने में मदद मिल सकती है कि उस दौरान किस तरह के हथियार और कितना गोला-बारूद इस्तेमाल हुआ।
घायल प्रदर्शनकारियों के इलाज को लेकर दिल्ली सरकार को निर्देश
सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली सरकार से कहा कि पैलेट से कथित रूप से घायल हुए प्रदर्शनकारियों को उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। याचिका में दावा किया गया है कि प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को छर्रे लगे और कुछ मामलों में शरीर से धातु के छर्रे निकाले गए। अदालत ने इस पहलू को नजरअंदाज नहीं किया और घायल लोगों के इलाज को लेकर सरकार को आवश्यक कदम उठाने को कहा।
पैलेट गन के इस्तेमाल पर पूरी रोक की मांग पर अदालत ने पूछा सवाल
यह सुनवाई पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद और अन्य की ओर से दायर याचिका पर हो रही है। याचिका में कानून-व्यवस्था संभालने के दौरान नागरिक प्रदर्शनकारियों पर धातु वाले छर्रों वाली पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने अदालत के सामने पैलेट से होने वाली चोटों और इसके कथित इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
अदालत बोली- पुलिस नियमों में खास हालात के लिए प्रावधान
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि पुलिस के नियमों में कुछ विशेष परिस्थितियों में पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति है। अदालत का कहना था कि यदि याचिकाकर्ता इन नियमों को ही चुनौती दे रहे हैं, तो उन्हें यह भी दिखाना होगा कि इनका इस्तेमाल किस तरह मनमाने तरीके से किया जा रहा है। न्यायमूर्ति बागची ने यह भी कहा कि हालात से निपटने के लिए पुलिस की चरणबद्ध कार्रवाई में पैलेट गन का इस्तेमाल भी एक स्तर हो सकता है।
वृंदा ग्रोवर ने कहा- धातु के छर्रों का इस्तेमाल हुआ
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वृंदा ग्रोवर ने अदालत को बताया कि पैलेट अलग-अलग तरह के हो सकते हैं, जिनमें रबर, प्लास्टिक और धातु के छर्रे शामिल हैं। उनका दावा था कि इस मामले में इस्तेमाल किए गए छर्रे धातु के थे और प्रदर्शनकारियों के शरीर से निकाले गए। इस पर अदालत ने कहा कि वह किसी खास घटना में छर्रों के इस्तेमाल की जांच करने के खिलाफ नहीं है, लेकिन याचिकाकर्ता को यह बताना होगा कि मौजूदा नियमों के तहत ऐसी कार्रवाई को किस आधार पर गलत या मनमाना कहा जा सकता है।
सीजेआई बोले- ज्यादा इस्तेमाल का आरोप है तो प्रोटोकॉल तय करने की मांग करें
सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अगर आरोप पैलेट गन के कथित जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल का है, तो याचिकाकर्ता की मांग इस दिशा में होनी चाहिए कि अदालत इनके इस्तेमाल के लिए स्पष्ट नियम या प्रोटोकॉल तय करे। यानी अदालत ने सीधे तौर पर हर परिस्थिति में पैलेट गन पर रोक लगाने के बजाय यह संकेत दिया कि उसके इस्तेमाल की सीमा, परिस्थितियों और तरीके को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाने की जरूरत पर विचार किया जा सकता है।
अदालत ने पुराने नियम का भी दिया उदाहरण
न्यायमूर्ति बागची ने सुनवाई के दौरान पुराने पुलिस नियमों का उदाहरण देते हुए कहा कि कलकत्ता में कभी ऐसा नियम रहा था, जिसमें गोला-बारूद बचाने के लिए गोली शरीर के दूसरे हिस्से के बजाय छाती पर चलाने की बात कही गई थी। बाद में उस नियम को रद्द कर दिया गया। अदालत ने इस उदाहरण के जरिए कहा कि याचिकाकर्ताओं को ऐसे नियम या प्रावधान सामने रखने होंगे, जिनसे यह साबित हो सके कि पैलेट गन का इस्तेमाल मौजूदा व्यवस्था के तहत मनमाने तरीके से किया जा रहा है।
विपक्ष ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
पैलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर विपक्षी दलों ने भी केंद्र सरकार और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ बर्बरता की गई और प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ। उन्होंने कहा कि पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की जिम्मेदारी केंद्र सरकार के अधीन आती है और छात्रों के साथ हुई कथित ज्यादती की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग करते हुए सरकार से नैतिक जिम्मेदारी लेने की अपील भी की। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का आधिकारिक जवाब इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
छात्र प्रदर्शन पर पहले भी दखल दे चुका है सुप्रीम कोर्ट
छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट इससे पहले भी अंतरिम निर्देश जारी कर चुका है। 28 जुलाई को अदालत ने नाबालिग प्रदर्शनकारियों को रिहा करने का निर्देश दिया था, बशर्ते उनके खिलाफ आपराधिक पृष्ठभूमि न हो। अदालत ने प्रदर्शन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और पात्र छात्रों के खिलाफ फिलहाल बलपूर्वक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश भी दिया था। साथ ही, पुलिस की कथित ज्यादती के आरोपों को निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिहाज से गंभीर माना गया था।
अब निगाहें अगली सुनवाई पर
गुरुवार की सुनवाई के बाद इस पूरे मामले में अब सबसे अहम सवाल यही है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान वास्तव में पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ था या नहीं और अगर हुआ, तो किन परिस्थितियों में किया गया। आरएएफ के गोला-बारूद का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश इसी सवाल की जांच में महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके साथ ही अदालत के सामने यह मुद्दा भी है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल की स्पष्ट सीमा और नियम तय किए जाएं या नहीं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने पैलेट गन के हर तरह के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश नहीं दिया है, लेकिन कथित अत्यधिक इस्तेमाल और घायल प्रदर्शनकारियों के इलाज से जुड़े पहलुओं को सुनवाई के दायरे में रखा है।
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