By Malay Ojha | Published: 15 August 2026 at 12:52 PM
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2014 में किए गए एक पुराने वादे की याद दिलाई है। उन्होंने मांग की है कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें मामलों का फैसला अधिकतम एक साल के भीतर हो। वांगचुक ने कहा कि अगर दोषी हैं तो जेल जाएं और निर्दोष हैं तो सम्मान के साथ संसद में रहें। उनका कहना है कि 2026 से 2027 के स्वतंत्रता दिवस तक अगर यह काम पूरा हो जाता है तो यह देश के लिए प्रधानमंत्री का सबसे बड़ा तोहफा होगा।
वांगचुक ने अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी के 2014 के एक साक्षात्कार का वीडियो साझा किया। उस समय नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे। उन्होंने कहा था कि जिन सांसदों के खिलाफ मामले दर्ज हैं, उनके मामलों को सर्वोच्च न्यायालय के जरिए एक साल के भीतर निपटाने की कोशिश की जानी चाहिए। उनका तर्क था कि दोषी पाए जाने वाले नेताओं को जेल जाना चाहिए और उनकी जगह साफ छवि वाले लोगों को संसद में आने का मौका मिलना चाहिए।
वांगचुक बोले- वीडियो दिखाने का मकसद आरोप लगाना नहीं
सोनम वांगचुक ने साफ किया कि वह यह पुराना वीडियो प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाने के लिए नहीं दिखा रहे हैं। उनका कहना है कि उनका मकसद केवल यह याद दिलाना है कि प्रधानमंत्री आज भी इस दिशा में पहल कर सकते हैं। वांगचुक ने कहा कि उनका संदेश किसी एक राजनीतिक दल या नेता के खिलाफ नहीं है, बल्कि राजनीति में अपराधीकरण की समस्या को लेकर है।
संसद में आपराधिक मामलों पर जताई चिंता
वांगचुक ने अपने संदेश में संसद में आपराधिक मामलों वाले जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अगर कानून बनाने वाली संस्था में ही बड़ी संख्या में ऐसे लोग पहुंच जाते हैं, जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं, तो लोकतंत्र और व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज होना उसे दोषी साबित नहीं करता। अंतिम फैसला अदालत ही करती है।
एडीआर के आंकड़े भी बताते हैं बड़ी तस्वीर
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के 2024 लोकसभा चुनाव के बाद के विश्लेषण के मुताबिक, 543 नवनिर्वाचित सांसदों में 251 यानी करीब 46 प्रतिशत ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए थे। इनमें 170 सांसदों यानी करीब 31 प्रतिशत ने गंभीर आपराधिक मामलों की जानकारी अपने चुनावी हलफनामे में दी थी। इन गंभीर मामलों में हत्या, दुष्कर्म, हत्या के प्रयास, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे मामले शामिल थे।
वांगचुक का तर्क- देर से मिलने वाला न्याय समस्या बढ़ाता है
वांगचुक ने कहा कि कानून का बुनियादी सिद्धांत है कि जब तक अपराध साबित न हो, व्यक्ति निर्दोष माना जाता है। लेकिन अगर किसी मामले का फैसला आने में कई साल लग जाएं तो आरोपी लंबे समय तक जनप्रतिनिधि बना रह सकता है। उनके मुताबिक इसी वजह से सांसदों और विधायकों के लिए तेज सुनवाई की अलग व्यवस्था पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
2014 में PM मोदी ने भी कही थी तेज सुनवाई की बात
यह मुद्दा नया नहीं है। अप्रैल 2014 में नरेंद्र मोदी ने चुनाव अभियान के दौरान कहा था कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों को तेजी से निपटाने के लिए विशेष अदालतों की व्यवस्था की जानी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों को एक साल के भीतर जेल भेजा जाना चाहिए। उन्होंने राजनीति में अपराधीकरण खत्म करने की जरूरत पर भी जोर दिया था।
सरकार बनने के बाद भी बनी थी तेज सुनवाई की पहल
प्रधानमंत्री बनने के कुछ ही महीनों बाद जुलाई 2014 में नरेंद्र मोदी ने कानून और गृह मंत्रालय से सांसदों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों को एक साल में निपटाने की दिशा में व्यवस्था तैयार करने को कहा था। उस समय कानून मंत्रालय ने भी मामलों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए रास्ता तैयार करने की बात कही थी।
सर्वोच्च न्यायालय भी दे चुका है एक साल में सुनवाई का निर्देश
सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों की तेज सुनवाई को लेकर सर्वोच्च न्यायालय भी 2014 में निर्देश दे चुका है। अदालत ने कहा था कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ आरोप तय होने के बाद मुकदमे को एक साल के भीतर पूरा करने की कोशिश की जानी चाहिए। इसका मकसद यह था कि लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया के कारण गंभीर आरोपों वाले जनप्रतिनिधि वर्षों तक पद पर बने न रहें।
वांगचुक बोले- दोषी जेल जाएं, निर्दोष संसद में रहें
वांगचुक ने इसी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि तेज सुनवाई का फायदा केवल जनता को ही नहीं, बल्कि उन नेताओं को भी मिलेगा जिन पर गलत या राजनीतिक कारणों से मामले दर्ज किए गए हैं। अगर आरोप साबित नहीं होते हैं तो उन्हें जल्द राहत मिल सकेगी और अगर आरोप साबित होते हैं तो कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी।
स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री से मांगा ‘तोहफा’
वांगचुक ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की कि 15 अगस्त 2026 से अगले स्वतंत्रता दिवस तक इस दिशा में ठोस कदम उठाया जाए। उन्होंने कहा कि एक साल के भीतर सांसदों और विधायकों के आपराधिक मामलों को निपटाने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाना देश के लिए स्वतंत्रता दिवस का बड़ा तोहफा होगा। उन्होंने लोगों से भी इस मांग को ज्यादा से ज्यादा साझा करने की अपील की।
बोले- 12 साल में भ्रष्टाचार और अन्याय ने बदला रूप
वांगचुक ने इससे एक दिन पहले भी देश की राजनीतिक व्यवस्था को लेकर अपनी चिंता जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि 2014 में नई सरकार से लोगों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन 12 साल बाद भ्रष्टाचार और अन्याय के स्वरूप को लेकर फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश को बड़े बदलाव की जरूरत है और राजनीति में सही लोगों को आगे लाने के लिए समाज के बुद्धिजीवियों और अच्छे लोगों को साथ आना चाहिए।
किसी पार्टी नहीं, देश की बात करने का दावा
वांगचुक ने कहा कि उनकी बात किसी खास पार्टी, सत्ता पक्ष या विपक्ष को लेकर नहीं है। उनका जोर ऐसे नेताओं को आगे लाने पर है जो ईमानदारी, चरित्र और अपने सिद्धांतों के साथ राजनीति करें। उन्होंने लोगों से ऐसे लोगों के नाम सुझाने की अपील भी की, जो देश को बेहतर दिशा देने की क्षमता रखते हों।
‘शांतिपूर्ण बदलाव’ की अपील
स्वतंत्रता दिवस के आसपास जारी अपने संदेश में वांगचुक ने देश में शांतिपूर्ण बदलाव की जरूरत पर जोर दिया। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने नागरिकों से ऐसे नेताओं की पहचान करने और आगे बढ़ाने की अपील की है जो देश को 2047 तक बेहतर दिशा दे सकें।
अब सवाल प्रधानमंत्री के सामने
सोनम वांगचुक की अपील ने 2014 के उस पुराने वादे को फिर चर्चा में ला दिया है, जिसमें राजनीति के अपराधीकरण से निपटने और सांसदों-विधायकों के मामलों को तेजी से निपटाने की बात कही गई थी। अब वांगचुक चाहते हैं कि इस पुराने विचार को नए सिरे से लागू करने की कोशिश हो। उनका कहना है कि जब लक्ष्य साफ हो और राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो एक साल का समय बहुत लंबा नहीं है। स्वतंत्रता दिवस 2027 तक यह व्यवस्था बन पाती है या नहीं, यह अब सरकार की पहल और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
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