By Malay Ojha | Published: 17 August 2026 at 05:25 PM
राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जांच को जल्द तार्किक नतीजे तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने पूछा कि जांच पूरी होने में आखिर कितना समय लगेगा। अदालत के इस सवाल पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद की जाए। इस दौरान विशेष जांच दल अपनी जांच को आगे बढ़ाएगा और अदालत के सामने स्थिति स्पष्ट की जाएगी।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि विशेष जांच दल अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि विशेष जांच दल के अध्यक्ष खुद अदालत में मौजूद हैं। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने साफ संकेत दिया कि अदालत की प्राथमिकता जांच को अनिश्चित समय तक खींचने के बजाय उसे तार्किक नतीजे तक पहुंचाना है।
तीन सप्ताह बाद फिर होगी सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश ने जांच की समयसीमा को लेकर सवाल किया तो सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से तीन सप्ताह बाद मामले को सुनने का आग्रह किया। इसका मतलब है कि अगली सुनवाई तक जांच दल को अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाने और अदालत को प्रगति की जानकारी देने का समय मिलेगा। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट इस मामले में जांच की स्थिति रिपोर्ट मांग चुका है और जांच को निष्पक्ष तथा पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर देता रहा है।
निर्मोही अखाड़े की याचिका का भी मुद्दा उठा
सुनवाई के दौरान निर्मोही अखाड़े की ओर से पेश वकील ने अपनी याचिका का मुद्दा उठाया। वकील ने कहा कि उनकी याचिका भी लंबित है और उसे अभी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया गया है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अगर वे भी बेहतर जांच चाहते हैं तो अदालत उनकी बात सुनेगी। इस टिप्पणी के बाद निर्मोही अखाड़े की ओर से मामले की जांच और अदालत के पहले के फैसले के पालन से जुड़ी बातें रखी गईं।
पुराने फैसले के पालन की मांग
निर्मोही अखाड़े के वकील ने कहा कि उनकी मांग केवल जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए फैसले का पूरी तरह पालन भी होना चाहिए। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस मुद्दे का मौजूदा जांच से सीधा संबंध नहीं है। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने निर्मोही अखाड़े के वकील को जांच से जुड़ी अपनी बात रखने को कहा।
एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
सुनवाई के दौरान एक अन्य वकील ने विशेष जांच दल की रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग की। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि आपराधिक मामलों की जांच के दौरान जांच रिपोर्ट इस तरह किसी पक्ष को नहीं दी जाती। रिपोर्ट अदालत के सामने पेश की जाती है और उसी के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होती है। इस मामले में भी विशेष जांच दल ने अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपी है।
अदालत ने फोरेंसिक जांच पर भी दिया जोर
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि विशेष जांच दल फोरेंसिक ऑडिटर की मदद से जांच कर रहा है। अदालत की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि मामले से जुड़ी जांच को मजबूत बनाने के लिए जरूरी वित्तीय और दस्तावेजी पहलुओं की जांच विशेषज्ञों की मदद से की जानी चाहिए। इससे पहले 27 जुलाई की सुनवाई में भी सुप्रीम कोर्ट ने विशेष जांच दल में फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का निर्देश दिया था।
जांच से जुड़े सुझाव भी दिए जा सकेंगे
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह रास्ता भी साफ किया कि अगर किसी पक्ष के पास जांच को लेकर कोई ठोस सुझाव है तो वह उसे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के सामने रख सकता है। इसके बाद सॉलिसिटर जनरल उन सुझावों को विशेष जांच दल तक पहुंचाएंगे। जांच दल उन सुझावों पर विचार करेगा और जरूरी होने पर उन्हें अपनी जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है।
पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने जांच पर उठाए थे सवाल
राम मंदिर चंदा और चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला पिछले कुछ समय से सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। इससे पहले अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगी थी। जुलाई में हुई सुनवाई के दौरान सरकार ने बताया था कि मामले में पहले से जांच चल रही है और कई लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। इसके बाद अदालत ने जांच को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों वाली नई विशेष जांच टीम गठित करने की दिशा में कदम बढ़ाया था। ([NDTV India][3])
नई एसआईटी के गठन के बाद जांच ने पकड़ी रफ्तार
27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट को बताया गया था कि अदालत के सुझाव के बाद नई विशेष जांच टीम गठित की गई है। इसकी अगुवाई लखनऊ परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक किरण एस को दी गई है। टीम में अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। अदालत ने जांच में वित्तीय लेनदेन और चंदे से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल के लिए फोरेंसिक ऑडिटर को जोड़ने का निर्देश दिया था।
अदालत का फोकस सिर्फ निष्पक्ष जांच पर
सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि इस मामले को राजनीतिक रंग देने के बजाय एक आपराधिक मामले की तरह देखा जाना चाहिए। अदालत का मुख्य जोर इस बात पर है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से हो तथा अगर कोई गड़बड़ी हुई है तो उसके पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान हो। जुलाई की सुनवाई में भी मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि अदालत का उद्देश्य सही और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है।
अब तीन सप्ताह बाद तस्वीर होगी साफ
सोमवार की सुनवाई में सबसे अहम बात यही रही कि सुप्रीम कोर्ट जांच को लंबे समय तक लंबित रखने के पक्ष में नहीं दिखा। मुख्य न्यायाधीश ने जांच पूरी होने में लगने वाले समय पर सीधे सवाल किया और उसे तार्किक नतीजे तक पहुंचाने की जरूरत बताई। अब तीन सप्ताह बाद होने वाली सुनवाई में विशेष जांच दल की प्रगति पर अदालत की नजर रहेगी। उस समय यह साफ हो सकता है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ी है और कथित चंदा हेराफेरी के मामले में अब तक क्या ठोस निष्कर्ष सामने आए हैं।
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