By aryavartalive | Published: 17 August 2026 at 09:48 PM
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अध्यक्ष बनने के करीब सात महीने बाद अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। नई टीम में सबसे बड़ा बदलाव पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की संगठन में वापसी और राष्ट्रीय महासचिव के रूप में उनकी नियुक्ति है। वहीं राम माधव को फिर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। दूसरी ओर भाजपा के डिजिटल संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए अमित मालवीय की जिम्मेदारी खत्म कर दी गई है और दीपक म्हस्के को सामाजिक मीडिया विभाग की कमान दी गई है।
स्मृति ईरानी की वापसी, राम माधव को भी अहम जिम्मेदारी
नितिन नबीन की नई टीम में स्मृति ईरानी की वापसी को सबसे अहम राजनीतिक बदलावों में गिना जा रहा है। उन्हें आठ राष्ट्रीय महासचिवों में जगह दी गई है। इससे पहले वह राजनाथ सिंह की टीम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार के बाद संगठन में उनकी नई भूमिका को पार्टी के अगले दौर की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
राम माधव की वापसी भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। संगठन और राजनीतिक मामलों में लंबे अनुभव वाले माधव पहले भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव रह चुके हैं और जम्मू-कश्मीर तथा पूर्वोत्तर में पार्टी के विस्तार में उनकी अहम भूमिका रही है। वसुंधरा राजे, बैजयंत पांडा और तीरथ सिंह रावत जैसे अनुभवी नेताओं को भी नई टीम में महत्वपूर्ण जगह मिली है।
अमित मालवीय की छुट्टी, डिजिटल टीम का बदला ढांचा
नई टीम में सबसे ज्यादा चर्चा अमित मालवीय को लेकर है। लंबे समय तक भाजपा के सूचना प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी संभालने वाले मालवीय को अब इस भूमिका से हटा दिया गया है। उनकी जगह छत्तीसगढ़ के दीपक म्हस्के को आईटी सेल का प्रमुख बनाया गया है। पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि भाजपा के लिए चुनावी राजनीति में डिजिटल पहुंच लगातार महत्वपूर्ण होती गई है।
भाजपा ने इस बार केवल चेहरे नहीं बदले, बल्कि मीडिया से जुड़ी जिम्मेदारियों का ढांचा भी बदला है। अनिल बलूनी को मीडिया संयोजक बनाया गया है, जबकि आईटी सेल के लिए दीपक म्हस्के को जिम्मेदारी दी गई है। इस बदलाव से संकेत मिलता है कि नितिन नबीन की टीम संगठन के साथ-साथ प्रचार और डिजिटल पहुंच पर भी नए सिरे से काम करना चाहती है।
13 उपाध्यक्ष, 8 महासचिव और 16 सचिवों की टीम
नई राष्ट्रीय टीम में 13 उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। इनमें वसुंधरा राजे, तीरथ सिंह रावत, राम माधव, बैजयंत पांडा, डी. पुरंदेश्वरी, रेखा वर्मा, वर्षाबेन नरेंद्रभाई दोषी, डॉ. भारती प्रवीण पवार, मनप्रीत सिंह बादल, लाल सिंह आर्य, प्रो. एम. नागराजा, प्रो. तारिक मंसूर और डॉ. मधुचंद्र कर शामिल हैं।
आठ राष्ट्रीय महासचिवों में विनोद तावड़े, सुनील बंसल, बिप्लब कुमार देब, स्मृति ईरानी, डॉ. सतीश पूनिया, गजेंद्र पटेल, हरीश द्विवेदी और संजय भाटिया को जगह मिली है। वहीं बीएल संतोष संगठन महासचिव के पद पर बने हुए हैं। संगठन में संयुक्त महासचिव की जिम्मेदारी शिवप्रकाश और सौदान सिंह को दी गई है।
सचिवों में कई नए चेहरे, बिहार को भी जगह
भाजपा की नई टीम में 16 राष्ट्रीय सचिव बनाए गए हैं। इनमें कविता पाटीदार, के. सुरेंद्रन, डॉ. भोला सिंह, डॉ. प्रदीप वर्मा, जगदीश ईश्वरभाई पटेल, डॉ. संदीप पाठक, फांगनोन कोन्याक, संगीता यादव, अनिल एंटनी, डॉ. एम. वेंकटेशन, मनोज टिग्गा, सिद्धार्थ शंभु, डॉ. स्वदेश सिंह, मृगांका देव बर्मन, रोहन गुप्ता और जय प्रकाश शामिल हैं। बिहार से सिद्धार्थ शंभु को राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी मिली है।
इस सूची में संदीप पाठक और अनिल एंटनी जैसे नेताओं को भी जगह मिली है। वहीं महिला नेताओं की मौजूदगी भी पहले के मुकाबले बढ़ी है। पार्टी की नई टीम में कुल 12 महिलाओं को राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
पीयूष गोयल को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी
संगठन में आर्थिक मामलों की जिम्मेदारी भी बदली गई है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को भाजपा का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। उनके साथ राजेश मंगल को संयुक्त कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इस नियुक्ति के साथ पार्टी के कोषाध्यक्ष पद पर भी बदलाव हुआ है।
यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पीयूष गोयल लंबे समय से केंद्र की राजनीति में सक्रिय हैं और संगठन तथा सरकार दोनों स्तरों पर उनका अनुभव है। नितिन नबीन की नई टीम में उनकी नियुक्ति को पार्टी के महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों पर अनुभवी नेताओं को बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।
युवा और अनुभव का मेल दिखाने की कोशिश
नितिन नबीन खुद 45 वर्ष की उम्र में भाजपा के सबसे कम उम्र के राष्ट्रीय अध्यक्षों में हैं। जनवरी 2026 में उनके अध्यक्ष बनने के समय से ही यह चर्चा रही है कि उनकी टीम में नई पीढ़ी और पुराने अनुभवी नेताओं के बीच संतुलन कैसा रहेगा। अब नई टीम सामने आने के बाद तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है।
नई व्यवस्था में पार्टी ने शीर्ष संगठनात्मक पदों पर अनुभवी नेताओं को बनाए रखा है, जबकि सचिव, मोर्चा और कुछ दूसरे दायित्वों में अपेक्षाकृत नए चेहरों को मौका दिया गया है। यानी भाजपा ने एक झटके में पुरानी पीढ़ी को हटाने के बजाय अलग-अलग स्तरों पर जिम्मेदारियां बांटकर बदलाव का रास्ता चुना है। राजनीतिक विश्लेषण में इसे भाजपा की पहले से चल रही पीढ़ीगत बदलाव की नीति का अगला चरण माना जा रहा है।
मोर्चों में भी बड़ा फेरबदल
भाजपा ने अपने मोर्चों की कमान में भी बदलाव किया है। युवा मोर्चा की जिम्मेदारी गुजरात के हेमंग जोशी को दी गई है। महिला मोर्चा की अध्यक्ष रूप कुमारी चौधरी बनाई गई हैं। ओबीसी मोर्चा अमरपाल मौर्य, किसान मोर्चा बंसीलाल गुर्जर, अनुसूचित जाति मोर्चा शिवेश कुमार राम, अनुसूचित जनजाति मोर्चा डॉ. मन्नालाल रावत और अल्पसंख्यक मोर्चा कुंवर बासित अली संभालेंगे।
युवा मोर्चा में हेमंग जोशी की नियुक्ति के साथ तेजस्वी सूर्या की जिम्मेदारी खत्म हुई है। महिला मोर्चा में रूप कुमारी चौधरी को जिम्मेदारी देकर पार्टी ने छत्तीसगढ़ को भी संगठन में जगह दी है। ओबीसी और अल्पसंख्यक मोर्चे में भी नए चेहरों को आगे लाया गया है।
2029 की तैयारी का संकेत?
भाजपा की नई टीम ऐसे समय सामने आई है जब पार्टी की नजर अगले लोकसभा चुनाव के साथ-साथ आने वाले विधानसभा चुनावों पर भी है। मई 2026 में ही पार्टी के संगठनात्मक बदलाव को 2029 की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा था। अब नई टीम में पुराने अनुभवी नेताओं और अपेक्षाकृत नए चेहरों का मिश्रण उस रणनीति को और स्पष्ट करता है।
राज्य स्तर पर भी भाजपा पिछले कुछ समय से ऐसे नेताओं को जिम्मेदारी दे रही है जिनकी उम्र अपेक्षाकृत कम है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी ने अनुभवी चेहरों को पूरी तरह किनारे नहीं किया है। जनवरी 2026 के विश्लेषण में भी भाजपा के संगठन और सरकार में उम्र के अलग-अलग स्तरों पर संतुलन बनाने की रणनीति सामने आई थी।
संसदीय बोर्ड में अब भी अनुभव का दबदबा
भाजपा के संगठन में सबसे अहम निर्णय लेने वाली संस्थाओं में संसदीय बोर्ड शामिल है। यहां पार्टी की शीर्ष नेतृत्व व्यवस्था का अनुभव वाला चेहरा साफ दिखाई देता है। यही वजह है कि नितिन नबीन की नई टीम को केवल उम्र के आधार पर बदलाव के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी।
नई व्यवस्था का संकेत ज्यादा साफ है—भाजपा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्तर पर युवा नेतृत्व को आगे किया है, लेकिन उसके आसपास संगठन के अहम पदों पर अनुभवी नेताओं को भी बरकरार रखा है। दूसरी ओर सचिवों, मोर्चों, मीडिया और सामाजिक मीडिया से जुड़े पदों में नई पीढ़ी के नेताओं को अवसर दिया गया है।
नितिन नबीन की टीम का असली संदेश क्या?
नई टीम को अगर एक लाइन में समझें तो भाजपा ने एक साथ बदलाव और निरंतरता, दोनों को साधने की कोशिश की है। स्मृति ईरानी और राम माधव की वापसी पुराने अनुभव को फिर इस्तेमाल करने का संकेत देती है, जबकि अमित मालवीय की जगह नई डिजिटल टीम और मोर्चों में बदलाव संगठन के काम करने के तरीके में परिवर्तन की ओर इशारा करते हैं।
नितिन नबीन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस टीम को जमीन पर सक्रिय करने की होगी। उनके पास अगले लोकसभा चुनाव तक लंबा समय है, लेकिन उससे पहले कई राज्यों में संगठन और चुनावी रणनीति की परीक्षा होनी है। ऐसे में नई टीम केवल पदों की सूची नहीं, बल्कि नबीन के नेतृत्व में भाजपा की अगली राजनीतिक दिशा का पहला बड़ा संकेत भी मानी जा रही है।
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