By aryavartalive | Published: 24 August 2026 at 02:00 PM
विकासशील इंसान पार्टी के संस्थापक मुकेश सहनी ने जालौन में पार्टी के मिलन समारोह की अनुमति अचानक रद्द किए जाने के विरोध में जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना दिया। सहनी ने प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम की अनुमति पहले देने के बाद ऐन वक्त पर उसे रद्द करना राजनीतिक दबाव की ओर इशारा करता है।
मुकेश सहनी के मुताबिक, 24 अगस्त को कालपी रोड स्थित जयसवाल मंदिर/टावर में पार्टी का मिलन समारोह प्रस्तावित था। इसके लिए प्रशासन से विधिवत अनुमति मांगी गई थी। उनका दावा है कि जिलाधिकारी कार्यालय ने 23 अगस्त को कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दे दी थी। लेकिन इसके बाद अचानक अनुमति निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया गया।
पुलिस रिपोर्ट का हवाला देकर प्रशासन ने लिया फैसला
सहनी के अनुसार, अनुमति रद्द करने के पीछे प्रशासन ने पुलिस की रिपोर्ट का हवाला दिया है। रिपोर्ट में कार्यक्रम के दौरान बड़ी भीड़ जुटने, भगदड़ की आशंका और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना जताई गई थी। हालांकि, सहनी ने इस तर्क पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि प्रशासन को ऐसी आशंका थी तो कार्यक्रम की अनुमति देने से पहले इन पहलुओं की जांच क्यों नहीं की गई।
‘आखिरी वक्त पर फैसला क्यों बदला?’
वीआईपी प्रमुख ने कहा कि किसी कार्यक्रम को अनुमति देने के बाद ठीक एक दिन पहले उसे रद्द करना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं हो सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम की अनुमति पहले ही दी जा चुकी थी और बाद में अचानक फैसला बदलने से प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े होते हैं। सहनी ने इसे राजनीतिक दबाव का परिणाम बताया।
धरने पर बैठे मुकेश सहनी
अनुमति रद्द होने के विरोध में सहनी अपने समर्थकों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और धरना दिया। उन्होंने प्रशासन से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की। सहनी का कहना था कि वह किसी टकराव के लिए नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक दल को शांतिपूर्ण तरीके से कार्यक्रम करने का अधिकार दिलाने के लिए धरने पर बैठे हैं।
‘राजनीतिक दल को जनता से संवाद से नहीं रोक सकते’
मुकेश सहनी ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों को जनता के बीच जाकर अपनी बात रखने और लोगों से संवाद करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि यदि कोई कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जा रहा है तो प्रशासन को उसे रोकने के बजाय जरूरी सुरक्षा इंतजाम करने चाहिए।
प्रशासन पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप
सहनी ने प्रशासनिक मशीनरी के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारियों को सरकार या किसी राजनीतिक दल के दबाव में काम करने के बजाय निष्पक्ष भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कार्यक्रम के लिए अनुमति जारी कर दी गई थी तो ऐसा क्या बदल गया कि कुछ ही समय बाद उसे निरस्त करने की जरूरत पड़ गई।
‘सरकार चाहे जितना दबाव बनाए, आवाज नहीं दबेगी’
धरने के दौरान सहनी ने कहा कि उनकी पार्टी गरीबों, वंचितों और आम लोगों की आवाज उठाने के लिए राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक फैसलों से पार्टी के कार्यकर्ता पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनके मुताबिक, सरकार चाहे कितना भी दबाव बनाए, जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने की उनकी कोशिश जारी रहेगी।
जालौन के फैसले को बताया लोकतांत्रिक अधिकारों का मामला
सहनी ने जालौन में हुए धरने को सिर्फ पार्टी के एक कार्यक्रम की अनुमति का विवाद नहीं बताया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि किसी राजनीतिक दल को शांतिपूर्ण कार्यक्रम करने से रोकना गंभीर विषय है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल अनुमति रद्द करने का फैसला वापस लेने की मांग की।
‘अगर आशंका थी तो पहले क्यों नहीं रोका?’
वीआईपी प्रमुख ने प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यही रखा कि जब पुलिस को भीड़ और कानून-व्यवस्था को लेकर आशंका थी तो अनुमति जारी करने से पहले इसका आकलन क्यों नहीं किया गया। उनके मुताबिक, आखिरी समय में अनुमति रद्द होने से पार्टी के कार्यकर्ताओं और आयोजन की तैयारियों पर भी असर पड़ा।
बड़े आंदोलन की चेतावनी
मुकेश सहनी ने चेतावनी दी कि यदि राजनीतिक दलों और उनके कार्यकर्ताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों को इसी तरह रोका जाता रहा तो उनकी पार्टी इसके खिलाफ व्यापक आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि जालौन का धरना शुरुआत है और जरूरत पड़ने पर पार्टी आगे भी प्रशासन के फैसलों के खिलाफ आवाज उठाएगी।
प्रशासन के फैसले पर अब सबकी नजर
फिलहाल विवाद का केंद्र कार्यक्रम की अनुमति रद्द करने का प्रशासनिक फैसला है। एक तरफ प्रशासन ने पुलिस रिपोर्ट के आधार पर भीड़ और कानून-व्यवस्था को लेकर आशंका जताई है, वहीं मुकेश सहनी इसे राजनीतिक दबाव से जोड़ रहे हैं। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है और क्या कार्यक्रम को लेकर कोई नया निर्णय लिया जाता है।
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