By Malay Ojha | Published: 22 August 2026 at 02:58 PM
खवड्या पहाड़ की चोटी पर एक मां अपने 16 वर्षीय बेटे को बचाने के लिए अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला लेने तक को तैयार थी। बेटा पिता से नाराज था, मोबाइल की किस्त को लेकर तनाव में था और जान देने की जिद पर अड़ा था। मां ने हाथ जोड़कर कहा- “तुम्हारा पापा से विवाद है ना… देखो, मैं अभी अपना मंगलसूत्र निकालकर फेंक देती हूं। तुम्हारे पिता को छोड़ देती हूं, तुम्हारे साथ चलूंगी… हम दोनों साथ रहेंगे, लेकिन मुझे छोड़कर मत जाओ बेटा।” लेकिन मां की यह आखिरी पुकार भी बेटे को नहीं रोक सकी। कुणाल ने खाई में छलांग लगा दी और उसे बचाने की कोशिश में मां-पिता भी नीचे जा गिरे।
घटना के सबसे दर्दनाक हिस्से का पता मौके से सामने आए घटनाक्रम से चलता है। बेटे को सामने खाई के किनारे खड़ा देखकर मां उसे लगातार समझा रही थी। वह बेटे से पीछे हटने की गुहार लगा रही थी। जब कोई बात काम नहीं आई तो उसने अपना मंगलसूत्र तक उतारकर फेंक देने की बात कह दी। मां का कहना था कि अगर पिता से विवाद है तो वह पति को छोड़ देगी और बेटे के साथ रहेगी। उसे बस अपने बेटे की जान चाहिए थी।
‘तुम्हारे साथ चलूंगी… हम दोनों साथ रहेंगे’
मां ने बेटे को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि वह अकेला नहीं है। उसने कहा कि वह उसके साथ चलेगी और दोनों साथ रहेंगे। मां की आवाज में बेटे को खोने का डर साफ था। वह अपने सुहाग की निशानी तक छोड़ने को तैयार थी, लेकिन कुणाल का गुस्सा और तनाव उस वक्त इतना बढ़ चुका था कि वह पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ।
बेटे का जवाब- मेरी कोई बात नहीं सुनता
कुणाल लगातार कह रहा था कि उसकी कोई बात नहीं सुनता। उसे लगता था कि परिवार में उसकी परेशानियों को समझने वाला कोई नहीं है। इसी मानसिक तनाव के बीच वह खवड्या पहाड़ की खतरनाक ढलान तक पहुंच गया था। माता-पिता उसे रोकने के लिए पीछे-पीछे पहुंचे और काफी देर तक समझाने की कोशिश करते रहे।
एक पल में सब कुछ बदल गया
परिवार की कोशिश थी कि किसी तरह कुणाल को सुरक्षित वापस ले आया जाए। लेकिन बातचीत और समझाने का असर नहीं हुआ। देखते ही देखते कुणाल ने खाई में छलांग लगा दी। किनारे पर खड़े माता-पिता ने बेटे को बचाने के लिए बिना सोचे उसकी तरफ छलांग लगाने जैसी कोशिश की। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वे भी गहरी खाई में जा गिरे।
बेटे के पीछे पिता भी खाई में गिरे
बेटे को बचाने की कोशिश में पिता मुरलीधर चांदगुडे भी नीचे जा गिरे। कुछ ही क्षणों में परिवार की स्थिति ऐसी हो गई जिसे वहां मौजूद लोग जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे। जिस बेटे को वापस घर ले जाने के लिए माता-पिता पहाड़ पर पहुंचे थे, उसी को बचाने की कोशिश में पिता की भी जान चली गई।
पति और बेटे को बचाने दौड़ी मां
बेटे और पति के खाई में गिरने के बाद मां संगीता भी हादसे का शिकार हो गईं। वह जिस बेटे को कुछ मिनट पहले जीवन की दुहाई दे रही थीं, उसी को बचाने की कोशिश में खुद भी गहरी खाई में गिर गईं। पुलिस और बचाव दल ने बाद में तीनों के शवों को बाहर निकाला।
एक परिवार, तीन मौतें और पहाड़ पर पसरा सन्नाटा
जिस पहाड़ पर कुछ देर पहले मां अपने बेटे से लौट आने की गुहार लगा रही थी, वहां कुछ समय बाद सन्नाटा था। परिवार के तीन सदस्यों की मौत ने हर किसी को झकझोर दिया। मां की वह आखिरी कोशिश और मंगलसूत्र छोड़ने की बात इस घटना का ऐसा हिस्सा बन गई, जिसे सुनकर किसी का भी कलेजा कांप जाए।
आखिर ऐसा क्या हुआ था कि कुणाल इतना टूट गया?
घटना की शुरुआत घर के एक विवाद से हुई थी। जानकारी के मुताबिक, कुणाल और उसके पिता के बीच पैसों और मोबाइल की किस्त को लेकर तनाव चल रहा था। मोबाइल खरीदने और उसकी किस्त चुकाने को लेकर पिता-पुत्र में मतभेद बढ़ गए थे। इसी बात को लेकर शुक्रवार को विवाद हुआ और कुणाल बेहद नाराज होकर घर से निकल गया।
आईफोन, घड़ी और चांदी की चेन भी उतार दी
बताया जाता है कि घर से निकलने के बाद कुणाल ने अपना आईफोन, हाथ की घड़ी और गले में पहनी चांदी की चेन उतारकर फेंक दी। इसके बाद वह सीधे खवड्या पहाड़ की ओर चला गया। परिजनों को जब उसकी हालत और उसके इरादे का पता चला तो वे भी उसके पीछे पहाड़ की तरफ भागे।
घंटों तक उसे समझाने की कोशिश
मौके पर केवल परिवार ही नहीं था। स्थानीय लोग और पुलिस भी उसे समझाने की कोशिश में जुट गए। रिपोर्टों के मुताबिक, काफी देर तक कुणाल से बातचीत की गई। उसे नीचे आने के लिए कहा गया। कोशिश थी कि किसी तरह उसका ध्यान दूसरी तरफ किया जाए और उसे सुरक्षित स्थान पर लाया जाए। लेकिन वह अपनी जिद से पीछे नहीं हट रहा था।
कुछ महीने पहले ही 11वीं में लिया था दाखिला
कुणाल पढ़ाई कर रहा था और हाल ही में उसने दसवीं की परीक्षा पास की थी। परिवार के मुताबिक, उसने अच्छे अंक हासिल किए थे और आगे पढ़कर डॉक्टर बनने का सपना देखा था। 11वीं में दाखिले के बाद उसकी पढ़ाई और भविष्य को लेकर परिवार को उससे बड़ी उम्मीदें थीं। लेकिन घर के भीतर चल रहे तनाव और मोबाइल की किस्त को लेकर बढ़े विवाद ने हालात को बेहद गंभीर मोड़ दे दिया।
18 साल से शहर में रह रहा था परिवार
चांदगुडे परिवार मूल रूप से जालना जिले के अंबड तालुका के धनगर पिंपलवाड़ी गांव का रहने वाला बताया जाता है। परिवार लंबे समय से छत्रपति संभाजीनगर में रह रहा था। शहर में अपनी जिंदगी आगे बढ़ा रहे इस परिवार के लिए शुक्रवार का दिन ऐसी त्रासदी लेकर आया, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी।
क्या सिर्फ मोबाइल विवाद ही वजह था?
इस घटना को केवल मोबाइल की किस्त से जोड़कर देखना पूरी तस्वीर नहीं हो सकती। किसी युवा के इस तरह के कदम के पीछे मानसिक तनाव, पारिवारिक मतभेद, भावनात्मक स्थिति और कई दूसरी परिस्थितियां भी हो सकती हैं। फिलहाल सामने आई जानकारी में मोबाइल की किस्त और पिता से विवाद तत्काल घटनाक्रम से जुड़े कारण बताए जा रहे हैं। पूरी वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
सबसे बड़ा सवाल- क्या कुणाल को बचाया जा सकता था?
इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उस वक्त स्थिति को किसी और तरीके से संभाला जा सकता था। परिवार, पुलिस और स्थानीय लोगों ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना। मां ने तो यहां तक कह दिया कि वह अपना मंगलसूत्र उतार देगी, पति को छोड़ देगी और बेटे के साथ रहेगी। फिर भी वह पीछे नहीं हटा।
मां की वह बात हमेशा के लिए रह गई
एक मां के लिए इससे बड़ी बेबसी शायद ही कोई हो सकती है कि वह अपने बच्चे के सामने खड़ी होकर कहे कि वह पति तक को छोड़ने के लिए तैयार है, बस बेटा उसे छोड़कर न जाए। लेकिन उस दिन कुणाल के मन में चल रहे तनाव ने मां की इस गुहार को भी नहीं सुना। कुछ ही पलों में मां, पिता और बेटे की जिंदगी खत्म हो गई।
इस हादसे ने परिवार और समाज दोनों से सवाल किया
यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है। यह उस दबाव की ओर भी ध्यान खींचती है, जिसका सामना आज कई बच्चे और युवा पढ़ाई, पैसे, मोबाइल, परिवार और अपनी इच्छाओं को लेकर करते हैं। हर विवाद का अंत इतना भयावह नहीं होता, लेकिन जब कोई युवा खुद को बेहद अकेला महसूस करने लगे तो परिवार की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि उसकी बात सुनी जाए।
परेशानी में हों तो अकेले न छोड़ें
ऐसी स्थिति में अगर कोई बच्चा या युवा खुद को नुकसान पहुंचाने की बात कहता है या ऐसा संकेत देता है, तो उसे अकेला छोड़ना जोखिम भरा हो सकता है। परिवार को तुरंत उसके पास रहना चाहिए, खतरनाक जगहों और सामान से दूर करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर स्थानीय आपात सहायता या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए। इस घटना ने भी यही दिखाया कि संकट के कुछ मिनट कितने निर्णायक हो सकते हैं।
खवड्या पहाड़ पर खत्म हुई एक परिवार की कहानी
कुणाल को बचाने के लिए मां ने अपना मंगलसूत्र छोड़ने तक की बात कह दी थी। पिता भी बेटे को बचाने के लिए खाई की ओर दौड़े। लेकिन आखिर में वही कोशिश पूरे परिवार की मौत का कारण बन गई। पहाड़ पर गूंजती मां की आखिरी पुकार अब सिर्फ उस परिवार की याद नहीं, बल्कि एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब समाज को तलाशना होगा- **जब कोई बच्चा भीतर से टूट रहा हो, तो क्या हम उसकी आवाज समय रहते सुन पा रहे हैं?
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