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जंतर-मंतर से हटाए गए आरक्षण विरोधी प्रदर्शनकारी, राजघाट पहुंचे तो पुलिस ने लिया हिरासत में; आज फिर जुट सकती है भीड़

By Malay Ojha | Published: 22 August 2026 at 08:19 AM

राजधानी दिल्ली में जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन शुक्रवार देर रात पुलिस कार्रवाई के बाद और गरमा गया। जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों को पुलिस और सुरक्षा बलों ने धरना स्थल से हटा दिया। इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारी राजघाट पहुंच गए, जहां पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहे थे, फिर भी उनके साथ सख्ती की गई।

शुक्रवार सुबह से ही बड़ी संख्या में युवा और सामान्य वर्ग से जुड़े प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर के आसपास पहुंचने लगे थे। हाथों में बैनर, पोस्टर और भगवा झंडे लिए लोगों ने जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ नारे लगाए। भीड़ बढ़ने के साथ ही पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती बढ़ा दी गई और प्रदर्शन स्थल के आसपास बैरिकेडिंग कर दी गई।

अनुमति को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों में टकराव
पुलिस का कहना था कि जंतर-मंतर पर इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान में सीमित अनुमति दी गई थी, जिसमें अधिकतम 500 लोगों के जुटने की बात थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर पहुंच गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से वहां से हटने की अपील की, लेकिन भीड़ के डटे रहने के बाद कार्रवाई की गई।

प्रदर्शनकारी बोले- शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे
पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारियों में नाराजगी दिखी। उनका कहना है कि उन्होंने किसी तरह की हिंसा या तोड़फोड़ नहीं की थी। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि वे केवल अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे थे और शांतिपूर्ण तरीके से धरना देना चाहते थे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बल प्रयोग करने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, पुलिस की ओर से कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत बताया गया है।

राजघाट पहुंचे प्रदर्शनकारी, पुलिस ने हिरासत में लिया
जंतर-मंतर से हटाए जाने के बाद आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों ने राजघाट जाने का फैसला किया। वहां पहुंचने पर पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप किया और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। आयोजकों की ओर से पहले भी प्रदर्शनकारियों को राजघाट पहुंचने की अपील किए जाने की खबर सामने आई थी।

‘हमने किसी पर हमला नहीं किया’, प्रदर्शनकारी का दावा
प्रदर्शनकारी पंकज ने कहा कि वे जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे थे। उनका दावा है कि उन्होंने भूख हड़ताल की घोषणा की थी और अपनी मांगों को रखने के लिए वहां बैठे थे। पंकज ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब प्रदर्शनकारियों ने किसी पर हमला नहीं किया और न ही किसी को गाली दी, तो उनके खिलाफ बल प्रयोग क्यों किया गया।

अभिषेक ने दूसरे आंदोलन से की तुलना
प्रदर्शनकारी अभिषेक ठाकुर ने आरोप लगाया कि उनके आंदोलन को एक ही दिन में खत्म करने की कोशिश की गई, जबकि इससे पहले जंतर-मंतर पर चल रहे एक दूसरे आंदोलन को लंबे समय तक जारी रहने दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि अलग-अलग आंदोलनों के साथ अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है। उनका आरोप था कि उनके प्रदर्शन के लिए समान अवसर नहीं दिया गया।

‘दूसरे समूह की वजह से हटना पड़ा’
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जंतर-मंतर पर पहले से चल रहे एक अन्य आंदोलन की वजह से उन्हें अपनी जगह बनाने में परेशानी हुई। उनका कहना है कि उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की तैयारी की थी, लेकिन वहां पहले से मौजूद समूह के कारण स्थिति उलझ गई। इसी को लेकर प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस का मुख्य पक्ष प्रदर्शन की अनुमति और कानून-व्यवस्था से जुड़ा रहा है।

आर्थिक आधार पर मदद की मांग
‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से जुड़े प्रदर्शनकारी मौजूदा जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी सहायता, शिक्षा और दूसरी सुविधाओं का लाभ देने में आर्थिक स्थिति को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग की मांग है कि गरीब व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को उसकी जाति से अलग रखते हुए देखा जाए।

आरक्षण के साथ यूजीसी के नियम भी निशाने पर
प्रदर्शन में सिर्फ आरक्षण का मुद्दा ही नहीं उठा। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालयों से जुड़े नए समानता नियमों को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उनके अनुसार इन नियमों के कुछ प्रावधानों का गलत इस्तेमाल सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ हो सकता है। इसी वजह से प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों को वापस लेने या उनमें बदलाव की मांग भी उठी।

सोशल मीडिया से जमीन तक पहुंचा आंदोलन
इस आंदोलन की एक खास बात यह है कि इसकी तैयारी काफी हद तक सोशल मीडिया के जरिए हुई। ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ नाम के इंस्टाग्राम पेज ने लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। इस पेज की लोकप्रियता पहले से ही काफी अधिक बताई जा रही है। जुलाई में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक इसके 56 लाख से ज्यादा अनुयायी थे।

शनिवार को फिर बढ़ सकती है भीड़
शुक्रवार की कार्रवाई के बाद शनिवार को भी प्रदर्शनकारियों के फिर जुटने की संभावना जताई जा रही है। इसी वजह से जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है। शुक्रवार को भी भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई थी।

अब आगे क्या होगा?
जाति आधारित आरक्षण का मुद्दा पहले से ही देश की राजनीति और सामाजिक बहस का संवेदनशील हिस्सा रहा है। ऐसे में राजधानी के बीचोंबीच युवाओं का इस मुद्दे पर सड़क पर उतरना अपने आप में अहम है। फिलहाल प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच अनुमति और प्रदर्शन के तरीके को लेकर विवाद बना हुआ है। शनिवार को अगर फिर बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं, तो प्रशासन के सामने भीड़ को नियंत्रित करने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती रहेगी।

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जंतर-मंतर से हटाए गए आरक्षण विरोधी प्रदर्शनकारी, राजघाट पहुंचे तो पुलिस ने लिया हिरासत में; आज फिर जुट सकती है भीड़

By Malay Ojha | Published: 22 August 2026 at 08:19 AM

राजधानी दिल्ली में जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन शुक्रवार देर रात पुलिस कार्रवाई के बाद और गरमा गया। जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों को पुलिस और सुरक्षा बलों ने धरना स्थल से हटा दिया। इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारी राजघाट पहुंच गए, जहां पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहे थे, फिर भी उनके साथ सख्ती की गई।

शुक्रवार सुबह से ही बड़ी संख्या में युवा और सामान्य वर्ग से जुड़े प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर के आसपास पहुंचने लगे थे। हाथों में बैनर, पोस्टर और भगवा झंडे लिए लोगों ने जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ नारे लगाए। भीड़ बढ़ने के साथ ही पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती बढ़ा दी गई और प्रदर्शन स्थल के आसपास बैरिकेडिंग कर दी गई।

अनुमति को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों में टकराव
पुलिस का कहना था कि जंतर-मंतर पर इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान में सीमित अनुमति दी गई थी, जिसमें अधिकतम 500 लोगों के जुटने की बात थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर पहुंच गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से वहां से हटने की अपील की, लेकिन भीड़ के डटे रहने के बाद कार्रवाई की गई।

प्रदर्शनकारी बोले- शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे
पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारियों में नाराजगी दिखी। उनका कहना है कि उन्होंने किसी तरह की हिंसा या तोड़फोड़ नहीं की थी। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि वे केवल अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे थे और शांतिपूर्ण तरीके से धरना देना चाहते थे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बल प्रयोग करने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, पुलिस की ओर से कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत बताया गया है।

राजघाट पहुंचे प्रदर्शनकारी, पुलिस ने हिरासत में लिया
जंतर-मंतर से हटाए जाने के बाद आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों ने राजघाट जाने का फैसला किया। वहां पहुंचने पर पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप किया और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। आयोजकों की ओर से पहले भी प्रदर्शनकारियों को राजघाट पहुंचने की अपील किए जाने की खबर सामने आई थी।

‘हमने किसी पर हमला नहीं किया’, प्रदर्शनकारी का दावा
प्रदर्शनकारी पंकज ने कहा कि वे जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे थे। उनका दावा है कि उन्होंने भूख हड़ताल की घोषणा की थी और अपनी मांगों को रखने के लिए वहां बैठे थे। पंकज ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब प्रदर्शनकारियों ने किसी पर हमला नहीं किया और न ही किसी को गाली दी, तो उनके खिलाफ बल प्रयोग क्यों किया गया।

अभिषेक ने दूसरे आंदोलन से की तुलना
प्रदर्शनकारी अभिषेक ठाकुर ने आरोप लगाया कि उनके आंदोलन को एक ही दिन में खत्म करने की कोशिश की गई, जबकि इससे पहले जंतर-मंतर पर चल रहे एक दूसरे आंदोलन को लंबे समय तक जारी रहने दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि अलग-अलग आंदोलनों के साथ अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है। उनका आरोप था कि उनके प्रदर्शन के लिए समान अवसर नहीं दिया गया।

‘दूसरे समूह की वजह से हटना पड़ा’
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जंतर-मंतर पर पहले से चल रहे एक अन्य आंदोलन की वजह से उन्हें अपनी जगह बनाने में परेशानी हुई। उनका कहना है कि उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की तैयारी की थी, लेकिन वहां पहले से मौजूद समूह के कारण स्थिति उलझ गई। इसी को लेकर प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस का मुख्य पक्ष प्रदर्शन की अनुमति और कानून-व्यवस्था से जुड़ा रहा है।

आर्थिक आधार पर मदद की मांग
‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से जुड़े प्रदर्शनकारी मौजूदा जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी सहायता, शिक्षा और दूसरी सुविधाओं का लाभ देने में आर्थिक स्थिति को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग की मांग है कि गरीब व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को उसकी जाति से अलग रखते हुए देखा जाए।

आरक्षण के साथ यूजीसी के नियम भी निशाने पर
प्रदर्शन में सिर्फ आरक्षण का मुद्दा ही नहीं उठा। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालयों से जुड़े नए समानता नियमों को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उनके अनुसार इन नियमों के कुछ प्रावधानों का गलत इस्तेमाल सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ हो सकता है। इसी वजह से प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों को वापस लेने या उनमें बदलाव की मांग भी उठी।

सोशल मीडिया से जमीन तक पहुंचा आंदोलन
इस आंदोलन की एक खास बात यह है कि इसकी तैयारी काफी हद तक सोशल मीडिया के जरिए हुई। ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ नाम के इंस्टाग्राम पेज ने लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। इस पेज की लोकप्रियता पहले से ही काफी अधिक बताई जा रही है। जुलाई में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक इसके 56 लाख से ज्यादा अनुयायी थे।

शनिवार को फिर बढ़ सकती है भीड़
शुक्रवार की कार्रवाई के बाद शनिवार को भी प्रदर्शनकारियों के फिर जुटने की संभावना जताई जा रही है। इसी वजह से जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है। शुक्रवार को भी भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई थी।

अब आगे क्या होगा?
जाति आधारित आरक्षण का मुद्दा पहले से ही देश की राजनीति और सामाजिक बहस का संवेदनशील हिस्सा रहा है। ऐसे में राजधानी के बीचोंबीच युवाओं का इस मुद्दे पर सड़क पर उतरना अपने आप में अहम है। फिलहाल प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच अनुमति और प्रदर्शन के तरीके को लेकर विवाद बना हुआ है। शनिवार को अगर फिर बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं, तो प्रशासन के सामने भीड़ को नियंत्रित करने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती रहेगी।

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