By Malay Ojha | Published: 21 August 2026 at 01:30 PM
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पेलेट गन चलाए जाने के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर संसद मार्ग थाने पहुंच गए। राहुल गांधी अपने साथ कथित रूप से पेलेट गन से घायल हुए छात्र साहिल और उसकी मां को भी लेकर पहुंचे। पुलिस से शिकायत और एफआईआर दर्ज करने की मांग पूरी नहीं होने पर राहुल गांधी थाने के बाहर ही धरने पर बैठ गए।
राहुल गांधी का कहना है कि जिन पुलिसकर्मियों या सुरक्षाकर्मियों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पेलेट गन चलाने का आरोप है, उनके खिलाफ मामला दर्ज होना चाहिए और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पुलिस अधिकारियों से बातचीत के बाद भी जब एफआईआर दर्ज नहीं हुई तो उन्होंने साफ कर दिया कि वह मामले को इसी तरह छोड़ने वाले नहीं हैं और न्याय की मांग को लेकर थाने के बाहर बैठेंगे।
घायल छात्र साहिल को लेकर थाने पहुंचे राहुल
इस पूरे मामले में राहुल गांधी ने उस छात्र को भी अपने साथ रखा, जो 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पेलेट से घायल हुआ था। साहिल का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान उसके शरीर पर पेलेट लगे। राहुल गांधी पहले भी साहिल को सामने लाकर इस मामले में कार्रवाई की मांग कर चुके हैं। शुक्रवार को वह साहिल और उसकी मां के साथ पुलिस अधिकारियों से मिलने पहुंचे।
पहले डीसीपी कार्यालय में हुई अधिकारियों से बातचीत
पुलिस थाने पहुंचने से पहले राहुल गांधी ने संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की। नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने उनसे बातचीत की। इस दौरान राहुल गांधी ने 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान कथित पेलेट गन इस्तेमाल के मामले में अब तक हुई जांच और कार्रवाई की जानकारी मांगी।
पुलिस ने कहा- शिकायत ले ली गई है
दिल्ली पुलिस की ओर से कहा गया है कि 20 जुलाई की घटना से जुड़े मामलों की जांच अपराध शाखा के पास है। पुलिस के मुताबिक शिकायत ले ली गई है और शिकायतकर्ता को जांच अधिकारी की जानकारी भी दी गई है। पुलिस का कहना है कि नई शिकायत को भी संबंधित जांच के साथ जोड़कर अपराध शाखा को भेजा जाएगा। ऐसे में पुलिस का पक्ष यह है कि शिकायत को लेने से इनकार नहीं किया गया, बल्कि मामले की जांच पहले से दूसरी एजेंसी के पास होने की जानकारी दी गई है।
राहुल गांधी शिकायतकर्ता नहीं, घायल छात्र की ओर से दी गई शिकायत
इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि राहुल गांधी खुद शिकायतकर्ता नहीं हैं। पुलिस के मुताबिक घायल छात्र की ओर से शिकायत दी गई है। राहुल गांधी उसके साथ थाने पहुंचे और मामले में एफआईआर दर्ज करने तथा जांच को आगे बढ़ाने की मांग की। इसी वजह से पुलिस और राहुल गांधी के बीच शुक्रवार को मुख्य विवाद शिकायत दर्ज होने के बाद अगली कानूनी कार्रवाई को लेकर दिखाई दिया।
20 जुलाई के प्रदर्शन से शुरू हुआ था विवाद
पेलेट गन का यह विवाद 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शनकारी परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ और बल प्रयोग किया गया। बाद में कुछ प्रदर्शनकारियों के घायल होने के बाद यह सवाल उठा कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किस तरह के हथियार और उपकरण इस्तेमाल किए गए थे।
राहुल गांधी ने पहले भी उठाया था सवाल
घटना के बाद राहुल गांधी ने पेलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर सरकार और पुलिस पर सवाल उठाए थे। उन्होंने घायल छात्र साहिल को सामने लाकर दावा किया था कि प्रदर्शन के दौरान उस पर पेलेट गन चलाई गई। राहुल गांधी ने मांग की थी कि जिन लोगों ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
दिल्ली पुलिस ने पेलेट गन चलाने से किया था इनकार
हालांकि दिल्ली पुलिस शुरुआत से ही प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन चलाए जाने के आरोप को खारिज करती रही है। पुलिस ने कहा था कि प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन चलाने का दावा सही नहीं है। पुलिस की ओर से जारी फैक्ट चेक में भी इस दावे पर सवाल उठाए गए थे।
पुलिस रिकॉर्ड से सामने आई अलग जानकारी
इस विवाद को उस समय नया मोड़ मिला जब संसद मार्ग थाने की सामान्य डायरी में दर्ज एक जानकारी सामने आई। कई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस रिकॉर्ड में जंतर-मंतर क्षेत्र में भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान दंगा-रोधी हथियार और प्लास्टिक पेलेट वाले कारतूस इस्तेमाल किए जाने का उल्लेख था। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि यह जानकारी दंगा नियंत्रण बल के एक अधिकारी की ओर से दी गई थी।
रिकॉर्ड में अधिकारी के निर्देश का भी जिक्र
सामने आए पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई तरह के गैर-घातक उपकरणों के इस्तेमाल का उल्लेख किया गया था। इसमें दंगा-रोधी बंदूक और प्लास्टिक पेलेट वाले कारतूस भी शामिल बताए गए। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में किस अधिकारी ने क्या आदेश दिया और मौके पर कौन मौजूद था, इसको लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कथित तौर पर घटना के समय मौके पर मौजूद होने या पेलेट चलाने का आदेश देने से इनकार किया था।
घायल प्रदर्शनकारियों को लेकर भी उठे सवाल
20 जुलाई की घटना के बाद कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। कुछ लोगों के शरीर पर पेलेट जैसे घाव मिलने की बात भी रिपोर्टों में कही गई। अस्पताल से सामने आई जानकारी के आधार पर भी इस मामले में सवाल उठे कि प्रदर्शन के दौरान वास्तव में किस तरह के हथियारों का इस्तेमाल हुआ था।
अब जांच पर टिकी है पूरी नजर
इस पूरे विवाद में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए वास्तव में क्या इस्तेमाल किया गया और यदि पेलेट चलाए गए तो उनका आदेश किस स्तर से आया। राहुल गांधी इसी सवाल पर पुलिस कार्रवाई और एफआईआर की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि घटना से जुड़े मामले की जांच अपराध शाखा के पास है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में भी पहुंचा मामला
जंतर-मंतर पर 20 जुलाई की कार्रवाई को लेकर मामला अदालत तक भी पहुंच चुका है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित ज्यादती की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाने का आदेश दिया है। समिति का नेतृत्व पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी को सौंपा गया है।
शिकायत से जांच तक, अब आगे क्या होगा?
फिलहाल पुलिस का कहना है कि शिकायत स्वीकार कर ली गई है और मामले की जांच अपराध शाखा के पास है। राहुल गांधी की मांग इससे आगे की है। वह चाहते हैं कि कथित पेलेट गन इस्तेमाल करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ औपचारिक मामला दर्ज हो और जिम्मेदारी तय की जाए। इसलिए शुक्रवार का धरना केवल शिकायत देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह कार्रवाई और जवाबदेही की मांग को लेकर सीधे पुलिस के सामने दबाव बनाने की कोशिश बन गया।
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