By Malay Ojha | Published: 21 August 2026 at 10:55 AM
बिहार में छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए मिलने वाले स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की अधिकतम ऋण सीमा चार लाख रुपये से घटाकर दो लाख रुपये किए जाने को लेकर सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस फैसले को लेकर बिहार सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक तरफ छात्रों के भविष्य की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ पढ़ाई के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद को कम किया जा रहा है।
बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए मिलने वाले अधिकतम शिक्षा ऋण की सीमा में बदलाव किया गया है। अब इस योजना के तहत अधिकतम दो लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि पहले यह सीमा चार लाख रुपये थी। दो लाख रुपये से अधिक की जरूरत वाले विद्यार्थियों को आगे की राशि के लिए केंद्र की दूसरी शिक्षा ऋण व्यवस्था का विकल्प दिया गया है।
तेजस्वी ने कहा- छात्रों की मुश्किल और बढ़ेगी
तेजस्वी यादव ने इसी बदलाव को बिहार की मौजूदा वित्तीय स्थिति से जोड़ते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब उच्च शिक्षा की फीस, हॉस्टल, किताबों और दूसरे खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, तब शिक्षा के लिए मिलने वाले ऋण की सीमा कम करना छात्रों के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला कदम है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास कर्मचारियों, पेंशनधारकों, ठेकेदारों और विकास कार्यों के भुगतान के लिए पर्याप्त राशि नहीं है और अब छात्रों से जुड़ी योजनाओं पर भी आर्थिक दबाव दिखाई देने लगा है।
‘सरकार के पास पैसे नहीं, इसलिए छात्रों पर असर’
तेजस्वी यादव ने बिहार की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद सरकार को जरूरी खर्चों के लिए पैसे की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार लगातार कर्ज ले रही है तो फिर सरकारी योजनाओं में कटौती की नौबत क्यों आ रही है?
उनका कहना है कि स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की सीमा कम किया जाना केवल एक योजना में बदलाव नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर उन विद्यार्थियों पर पड़ सकता है जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं और उच्च शिक्षा के लिए सरकारी मदद पर निर्भर रहते हैं।
दो लाख से ज्यादा की पढ़ाई का खर्च कैसे पूरा होगा?
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की सीमा घटाए जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल उन छात्रों को लेकर है जिनकी पढ़ाई का कुल खर्च दो लाख रुपये से ज्यादा है। ऐसे विद्यार्थियों को अतिरिक्त राशि के लिए केंद्र की दूसरी शिक्षा ऋण व्यवस्था का सहारा लेना होगा। इसका मतलब यह है कि अब पूरी जरूरत एक ही योजना के जरिए पूरी नहीं होगी।
तेजस्वी यादव का तर्क है कि बिहार जैसे राज्य में बड़ी संख्या में विद्यार्थी आर्थिक कारणों से उच्च शिक्षा से दूर रह जाते हैं। ऐसे में शिक्षा ऋण की सीमा घटाने के बजाय सरकार को विद्यार्थियों के लिए आर्थिक सहायता और आसान बनानी चाहिए।
योजना का मकसद था आर्थिक परेशानी के बावजूद पढ़ाई जारी रखना
बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक मदद देना है, जो पढ़ाई करना चाहते हैं लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति उनके सामने बड़ी बाधा बनती है। इस योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा से जुड़े खर्चों के लिए ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
योजना शुरू किए जाने के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य यह था कि आर्थिक कमजोरी किसी विद्यार्थी की उच्च शिक्षा के रास्ते में बाधा न बने। ऐसे में ऋण की अधिकतम सीमा आधी होने के बाद इस बदलाव को लेकर राजनीतिक बहस होना स्वाभाविक है।
तेजस्वी ने बिहार की आर्थिक स्थिति पर भी उठाए सवाल
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के मुद्दे के साथ तेजस्वी यादव ने बिहार की पूरी वित्तीय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि राज्य की राजकोषीय स्थिति चिंताजनक है और बिहार पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है।
उनके मुताबिक सरकार के सामने राजस्व बढ़ाने और खर्च को नियंत्रित करने की चुनौती है। उन्होंने आरोप लगाया कि वित्तीय प्रबंधन कमजोर होने का असर अब सरकारी योजनाओं पर दिखाई देने लगा है और इसका नुकसान सबसे ज्यादा आम लोगों और छात्रों को हो सकता है।
छात्रवृत्ति को लेकर भी सरकार पर हमला
तेजस्वी यादव ने छात्रवृत्ति को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति के भुगतान में परेशानी हो रही है। उनका कहना है कि एक तरफ सरकार युवाओं को बेहतर शिक्षा और रोजगार देने की बात करती है, दूसरी तरफ शिक्षा से जुड़ी आर्थिक सहायता में कटौती की जा रही है। उन्होंने इसे बिहार के विद्यार्थियों के भविष्य से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
सरकार के सामने सफाई देने की चुनौती
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की सीमा चार लाख से घटाकर दो लाख रुपये किए जाने के बाद सरकार के सामने यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि इस बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी। खासकर उन विद्यार्थियों के लिए यह बदलाव कितना असरदार होगा, जिनकी उच्च शिक्षा का खर्च दो लाख रुपये से अधिक है, यह बड़ा सवाल है।
सरकार की ओर से यह तर्क दिया जा सकता है कि दो लाख रुपये से अधिक की जरूरत वाले छात्रों के लिए दूसरी शिक्षा ऋण व्यवस्था उपलब्ध है। लेकिन तेजस्वी यादव इसी व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं कि जब बिहार की अपनी योजना से छात्रों को अधिक राशि मिल रही थी तो उसकी सीमा कम करने की जरूरत क्यों पड़ी।
बिहार की राजनीति में शिक्षा का मुद्दा फिर गरमाया
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की सीमा में कमी का मुद्दा अब सिर्फ शिक्षा योजना तक सीमित नहीं रह गया है। इसे बिहार की आर्थिक स्थिति और सरकार की प्राथमिकताओं से जोड़कर देखा जा रहा है। तेजस्वी यादव ने इसी आधार पर सरकार को घेरा है और आरोप लगाया है कि वित्तीय दबाव का असर धीरे-धीरे उन योजनाओं पर पड़ रहा है जिनका सीधा संबंध आम परिवारों और छात्रों से है।
आने वाले दिनों में सरकार इस बदलाव को लेकर क्या सफाई देती है और विद्यार्थियों के बीच इसका क्या असर पड़ता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की ऋण सीमा में हुई कमी तेजस्वी यादव के लिए सरकार को घेरने का एक बड़ा मुद्दा बन गई है।
सबसे बड़ा सवाल- छात्रों की पढ़ाई का खर्च कैसे चलेगा?
तेजस्वी यादव के बयान का सबसे अहम हिस्सा यही है कि जब बिहार में शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का खर्च लगातार बढ़ रहा है, तब छात्रों को मिलने वाले शिक्षा ऋण की सीमा कम क्यों की गई? चार लाख रुपये से दो लाख रुपये की सीमा होने के बाद अब दो लाख से अधिक खर्च वाली पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों को दूसरे विकल्प पर निर्भर रहना होगा।
यही वजह है कि स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की सीमा में कमी का फैसला अब बिहार की राजनीति में बड़ा मुद्दा बनता दिख रहा है। तेजस्वी यादव ने सरकार से सीधा सवाल किया है कि छात्रों के भविष्य को आर्थिक दबाव से बचाने के लिए सरकार की आगे की योजना क्या है?
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

