By Malay Ojha | Published: 16 August 2026 at 05:46 PM
देशभर में ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए कैग की नई रिपोर्ट ने रेलवे की यात्री सुविधाओं पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। संसद में पेश रिपोर्ट के मुताबिक, जांच किए गए 512 गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों में से 458 पर जरूरी यात्री सुविधाओं में कमी मिली। कई स्टेशनों के पीने के पानी में ई-कोलाई और कुल कोलीफॉर्म जैसे बैक्टीरिया पाए गए। छह रेलवे क्षेत्रों के 59 स्टेशनों पर तो पीने के पानी की जीवाणु जांच तक नहीं कराई गई।
कैग की जांच में सामने आया कि जिन स्टेशनों के पानी के नमूनों की जांच हुई, उनमें कुछ जगह स्थिति बेहद चिंताजनक थी। मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, कल्याण, लोनावला और भिवंडी रोड के वाटर कूलरों से लिए गए नमूनों में ई-कोलाई की मौजूदगी मिली। दक्षिण रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़ जंक्शन तथा दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद स्टेशन के पेयजल को लेकर भी जांच में गंभीर खामियां सामने आईं। पूर्व रेलवे के मधुपुर स्टेशन का पानी भी गुणवत्ता जांच में सवालों के घेरे में रहा।
59 स्टेशनों पर पानी की जांच ही नहीं हुई
रिपोर्ट का एक और गंभीर पहलू यह है कि छह अलग-अलग रेलवे क्षेत्रों के 59 स्टेशनों पर पीने के पानी की जीवाणु संबंधी जांच नहीं कराई गई। यानी जिन जगहों पर यात्रियों को पीने का पानी उपलब्ध कराया जा रहा था, वहां यह सुनिश्चित करने के लिए नियमित जांच नहीं हुई कि पानी सुरक्षित है या नहीं। कैग ने इसे रेलवे बोर्ड के तय नियमों के पालन में कमी के तौर पर दर्ज किया है।
नलों के पानी में भी मिले बैक्टीरिया
सिर्फ वाटर कूलर ही नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म पर लगे नलों के पानी को लेकर भी रिपोर्ट में चिंता जताई गई है। कैग के मुताबिक, वर्ष 2022-23 में आठ रेलवे क्षेत्रों के 49 स्टेशनों और 2023-24 में नौ रेलवे क्षेत्रों के 56 स्टेशनों पर नलों के पानी में कुल कोलीफॉर्म पाया गया। ऐसे बैक्टीरिया पानी की स्वच्छता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं और दूषित पानी के इस्तेमाल से पेट तथा आंत से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
512 में से 458 स्टेशन जरूरी सुविधाओं में पीछे
कैग ने सिर्फ पानी की गुणवत्ता ही नहीं देखी, बल्कि यात्रियों के लिए उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की भी जांच की। रिपोर्ट के मुताबिक, ऑडिट में शामिल 512 स्टेशनों में से 458 ऐसे मिले जहां एक या उससे अधिक न्यूनतम जरूरी सुविधाएं तय मानक के मुताबिक उपलब्ध नहीं थीं। इसका मतलब है कि करीब नौ में से आठ जांचे गए स्टेशन किसी न किसी बुनियादी सुविधा की कमी से जूझ रहे थे।
पानी, सीट से लेकर शौचालय तक की कमी
रेलवे बोर्ड ने यात्रियों के लिए पीने का पानी, बैठने की जगह, प्लेटफॉर्म पर छाया, शौचालय, पंखे, पैदल पुल और सूचना बोर्ड जैसी सुविधाओं के मानक तय किए हैं। रेलवे के मौजूदा नियमों में गैर-उपनगरीय स्टेशनों की अलग-अलग श्रेणियों के लिए पीने का पानी, बैठने की व्यवस्था, शौचालय, पंखे, पानी ठंडा करने की मशीन और कूड़ेदान जैसी सुविधाओं का प्रावधान है।
2035 स्टेशनों पर पानी के नलों की कमी
कैग के यात्री सुविधा प्रबंधन तंत्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि 2,035 स्टेशनों पर पानी के नलों की कमी पाई गई। ऐसे में सवाल सिर्फ पानी की गुणवत्ता का नहीं है, बल्कि यात्रियों तक पर्याप्त मात्रा में पानी पहुंचाने की व्यवस्था का भी है। गर्मी के मौसम में इस कमी का असर और ज्यादा गंभीर हो सकता है।
बड़े और व्यस्त स्टेशनों पर भी हालत चिंताजनक
रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंता इसलिए बढ़ती है क्योंकि खामियां सिर्फ छोटे स्टेशनों तक सीमित नहीं हैं। देश के प्रमुख श्रेणी के स्टेशनों में नई दिल्ली, हावड़ा, सियालदह, मुंबई सेंट्रल और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। यहां यात्रियों के लिए पर्याप्त बैठने की जगह, पंखे, पानी ठंडा करने की मशीन, कूड़ेदान और ट्रेन की जानकारी देने वाले सूचना बोर्ड जैसी सुविधाओं में कमी या खराब स्थिति दर्ज की गई।
रेलवे के अपने नियमों पर भी सवाल
कैग की जांच में यह भी सामने आया कि रेलवे बोर्ड की ओर से यात्री सुविधाओं को लेकर दिशा-निर्देश बनाए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर उनका पालन एक जैसा नहीं हो पाया। रेलवे के नियमों में यह साफ किया गया है कि न्यूनतम जरूरी सुविधाएं हर श्रेणी के स्टेशन पर उपलब्ध होनी चाहिए और उनकी नियमित देखभाल भी होनी चाहिए।
पांच साल की व्यवस्था की हुई जांच
कैग की यह जांच वर्ष 2019-20 से 2023-24 की अवधि को ध्यान में रखकर की गई। इस दौरान 512 गैर-उपनगरीय स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं, साफ-सफाई, पेयजल की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और उपलब्ध सुविधाओं की जांच की गई। कैग ने अपनी रिपोर्ट में रेलवे की व्यवस्था और नियमों के बीच मौजूद अंतर को सामने रखा है।
कैग ने रेलवे को दिए सुधार के सुझाव
कैग ने रेलवे मंत्रालय और संबंधित प्रशासन से स्थिति में तुरंत सुधार करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में पेयजल की गुणवत्ता पर नियमित निगरानी, जल आपूर्ति व्यवस्था की जांच और तय मानकों के मुताबिक पानी की जांच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। रेलवे के लिए चुनौती सिर्फ नए ढांचे तैयार करने की नहीं, बल्कि पहले से मौजूद सुविधाओं को लगातार चालू और साफ रखने की भी है।
यात्रियों की सेहत से जुड़ा सीधा सवाल
रेलवे में रोजाना करोड़ों यात्रियों की आवाजाही होती है। ऐसे में स्टेशन पर मिलने वाला पानी और शौचालय जैसी सुविधाएं केवल आराम का विषय नहीं हैं, बल्कि सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी हैं। कैग की रिपोर्ट ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि यात्रियों से बेहतर सुविधाओं का दावा करने वाली व्यवस्था क्या जमीन पर तय मानकों के मुताबिक काम कर रही है। अब इस रिपोर्ट के बाद रेलवे की ओर से इन कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।
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