By Malay Ojha | Published: 16 August 2026 at 06:38 PM
पटना: बिहार में 211 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज शुरू किए जाने के बाद कांग्रेस ने सरकार की शिक्षा नीति पर सवाल खड़े किए हैं। बिहार कांग्रेस के मीडिया विभाग के चेयरमैन और मुख्य प्रवक्ता राजेश राठौड़ ने कहा कि अगर सरकार हर प्रखंड में उच्च शिक्षा की सुविधा देने की दिशा में आगे बढ़ रही है और जिन प्रखंडों में पहले से कॉलेज मौजूद हैं, वहां नए कॉलेज की जरूरत नहीं समझी गई, तो पहले से चल रहे अनुदानित और वित्तरहित कॉलेजों के शिक्षकों एवं कर्मचारियों के साथ भी समान व्यवहार होना चाहिए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मई में 211 ऐसे प्रखंडों में डिग्री कॉलेज शुरू करने की बात कही थी, जहां डिग्री कॉलेज नहीं था।
राजेश राठौड़ ने कहा कि सरकार अगर पहले से चल रहे कॉलेजों को उच्च शिक्षा की व्यवस्था का हिस्सा मान रही है, तो वहां काम करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। उनका सवाल है कि इन कॉलेजों के शिक्षकों को अंगीभूत कॉलेजों के शिक्षकों के बराबर वेतन और दूसरी सुविधाएं क्यों नहीं मिल रही हैं।
विश्वविद्यालय सेवा आयोग के शिक्षकों के बराबर अधिकार की मांग
कांग्रेस नेता ने कहा कि विश्वविद्यालय सेवा आयोग के जरिए नियुक्त शिक्षकों को जिस तरह वेतन और दूसरी सुविधाएं मिलती हैं, उसी तर्ज पर अनुदानित और वित्तरहित कॉलेजों के शिक्षकों के बारे में भी सरकार को विचार करना चाहिए। उनका कहना है कि लंबे समय से कॉलेजों में पढ़ा रहे शिक्षकों को केवल अलग श्रेणी में रखकर उनकी सेवा शर्तों और वेतन में अंतर करना उचित नहीं है।
‘समान काम के लिए अलग-अलग नियम क्यों?’
राठौड़ ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि राज्य में एक ही तरह का काम करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए अलग-अलग नियम क्यों बनाए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर इन कॉलेजों की जरूरत सरकार को नहीं होती तो वहां पहले से चल रही उच्च शिक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाने का आधार क्या है और अगर जरूरत है तो वहां काम कर रहे शिक्षकों और कर्मचारियों के अधिकारों पर सरकार कब फैसला लेगी?
शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को भी राज्यकर्मियों जैसी सुविधाएं देने की मांग
बिहार कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता ने शिक्षकेत्तर कर्मचारियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इन कर्मचारियों को भी सेवा शर्तों और सुविधाओं के मामले में स्पष्ट व्यवस्था मिलनी चाहिए। उनका आरोप है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था का विस्तार तो कर रही है, लेकिन पहले से इस व्यवस्था को संभाल रहे शिक्षकों और कर्मचारियों की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं कर रही है।
कांग्रेस ने सरकार से मांगी स्पष्ट नीति
राजेश राठौड़ ने सरकार से मांग की कि अनुदानित और वित्तरहित कॉलेजों में काम कर रहे शिक्षकों एवं कर्मचारियों के वेतन, सेवा शर्तों और दूसरी सुविधाओं को लेकर स्पष्ट नीति बनाई जाए। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा का विस्तार तभी सार्थक होगा, जब कॉलेजों में पढ़ाने और काम करने वाले लोगों को भी सम्मानजनक वेतन और सुरक्षित भविष्य की गारंटी मिले।
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