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खेतिहर मजदूरों की बड़ी रैली का ऐलान, 10 दिसंबर को पटना में होगा बड़ा जुटान

By Malay Ojha | Published: 20 August 2026 at 06:11 PM

बिहार में खेतिहर मजदूरों और ग्रामीण गरीबों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन की तैयारी तेज हो गई है। बिहार प्रांतीय खेतिहर मजदूर यूनियन ने 10 दिसंबर 2026 को पटना में बड़ी रैली आयोजित करने का ऐलान किया है। रैली से पहले 2 से 8 सितंबर तक राज्य के सभी अंचलों में धरना-प्रदर्शन किए जाएंगे। इसके बाद 30 सितंबर को दरभंगा और 24 अक्टूबर को बेगूसराय में बड़े सम्मेलन आयोजित कर पटना रैली की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।

बिहार प्रांतीय खेतिहर मजदूर यूनियन की दो दिवसीय राज्य कमेटी की बैठक 19 और 20 अगस्त को पटना के जमाल रोड स्थित पार्टी राज्य कार्यालय में हुई। बैठक की अध्यक्षता साथी रंगलाल पासवान ने की। बैठक में संगठन से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा के बाद आने वाले महीनों के आंदोलन की रूपरेखा तय की गई।

बैठक के बाद अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव कॉमरेड विक्रम सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने 10 दिसंबर को पटना में खेतिहर मजदूरों की बड़ी रैली आयोजित किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि रैली के जरिए खेतिहर मजदूरों, भूमिहीन परिवारों और ग्रामीण गरीबों से जुड़े सवालों को मजबूती से उठाया जाएगा।

सितंबर में अंचल स्तर पर होगा आंदोलन
संगठन ने आंदोलन को सीधे पटना तक सीमित रखने के बजाय इसकी शुरुआत गांव और अंचल स्तर से करने की योजना बनाई है। कॉमरेड विक्रम सिंह के मुताबिक 2 से 8 सितंबर 2026 के बीच बिहार के सभी अंचलों में धरना और प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।

इन कार्यक्रमों के जरिए स्थानीय स्तर पर गरीब परिवारों की समस्याओं को उठाया जाएगा। संगठन का कहना है कि अंचल स्तर के कार्यक्रमों के बाद आंदोलन को जिला और राज्य स्तर पर विस्तार दिया जाएगा। इसी क्रम में दिसंबर की पटना रैली के लिए बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ने का अभियान चलाया जाएगा।

दरभंगा में 30 सितंबर को बड़ा सम्मेलन
पटना में प्रस्तावित रैली की तैयारी के लिए 30 सितंबर को दरभंगा में बड़ा सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में खेतिहर मजदूरों और ग्रामीण गरीबों के बीच संगठन को मजबूत करने तथा रैली में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की रणनीति पर चर्चा होगी।

संगठन की कोशिश है कि अलग-अलग जिलों में स्थानीय समस्याओं को लेकर लोगों को एकजुट किया जाए और उन्हें दिसंबर में पटना में होने वाले बड़े आंदोलन से जोड़ा जाए।

बेगूसराय में 24 अक्टूबर को जुटेंगे कार्यकर्ता
इसके बाद 24 अक्टूबर 2026 को बेगूसराय में बड़ा सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। यह सम्मेलन भी पटना रैली की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संगठन के मुताबिक दोनों सम्मेलनों में कार्यकर्ताओं को रैली की तैयारी से जुड़ी जिम्मेदारियां दी जाएंगी।

दरभंगा और बेगूसराय के कार्यक्रमों के जरिए आसपास के जिलों के खेतिहर मजदूरों और गरीब परिवारों तक पहुंच बनाने की योजना है। संगठन दिसंबर तक इस अभियान को लगातार तेज करने की तैयारी में है।

पांच डिसमिल जमीन देने की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉमरेड विक्रम सिंह ने भूमिहीन परिवारों को जमीन देने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भूमिहीनों को पांच डिसमिल जमीन का पर्चा देने के बजाय गरीबों के घरों को बुलडोजर से उजाड़ा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भूमिहीन परिवारों के लिए जमीन का सवाल लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। संगठन इस मुद्दे को आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल करेगा और सरकार पर गरीब परिवारों के हित में कदम उठाने का दबाव बनाएगा।

राशन कार्ड से नाम हटाने का आरोप
खेतिहर मजदूर यूनियन ने गरीब परिवारों के राशन कार्ड से नाम काटे जाने का भी आरोप लगाया है। संगठन का कहना है कि राशन गरीब परिवारों के लिए बेहद जरूरी सुविधा है और पात्र लोगों को इससे वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

यूनियन का कहना है कि राशन कार्ड से जुड़े मामलों को भी आंदोलन के दौरान प्रमुखता से उठाया जाएगा। ग्रामीण इलाकों में ऐसे परिवारों से संपर्क कर उनकी समस्याओं को सामने लाने की तैयारी की जा रही है।

होल्डिंग और पानी टैक्स के खिलाफ भी आंदोलन
आंदोलन के एजेंडे में होल्डिंग टैक्स और पानी टैक्स का मुद्दा भी शामिल किया गया है। संगठन का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाली व्यवस्थाओं का विरोध किया जाएगा।

कॉमरेड विक्रम सिंह ने स्मार्ट मीटर को लेकर भी संगठन के विरोध की बात कही। खेतिहर मजदूर यूनियन इन सभी मुद्दों को एक साथ उठाकर ग्रामीण और गरीब तबके के बीच आंदोलन को मजबूत करने की तैयारी में है।

मनरेगा को लेकर भी उठेगी आवाज
ग्रामीण मजदूरों के रोजगार से जुड़े मनरेगा के मुद्दे को भी आंदोलन में शामिल किया गया है। संगठन ने मनरेगा की पुनर्बहाली की मांग उठाई है। यूनियन का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों की कमी का सीधा असर गरीब परिवारों की आमदनी पर पड़ता है।

खेतिहर मजदूर यूनियन का कहना है कि ग्रामीण मजदूरों को रोजगार और मजदूरी से जुड़े अधिकार मिलना जरूरी है। इसी मांग को लेकर संगठन आने वाले दिनों में व्यापक अभियान चलाएगा।

सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
कॉमरेड विक्रम सिंह ने बिहार की भाजपा-एनडीए सरकार पर गरीबों, दलितों, महादलितों, महिलाओं और कमजोर तबकों के खिलाफ हमले बढ़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के खिलाफ खेतिहर मजदूरों और ग्रामीण गरीबों को संगठित कर आंदोलन को तेज किया जाएगा।

हालांकि, सरकार पर लगाए गए ये आरोप संगठन की राजनीतिक राय हैं। यूनियन ने अपने आंदोलन के जरिए इन मुद्दों को जनता के बीच ले जाने और सरकार के सामने अपनी मांगें रखने की बात कही है।

राज्य कमेटी की बैठक में बनी आंदोलन की रणनीति
दो दिवसीय बैठक में संगठन के राज्य महासचिव कॉमरेड रामाश्रय महतो ने भी आंदोलन और संगठन की तैयारियों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। बैठक में राज्यभर में संगठन को मजबूत करने और खेतिहर मजदूरों से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर दिया गया।

बैठक के बाद संगठन ने साफ कर दिया कि अब आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। पहले अंचल स्तर पर धरना-प्रदर्शन होंगे, फिर बड़े सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे और आखिर में दिसंबर में पटना में बड़ी रैली होगी।

दिसंबर में दिखेगी आंदोलन की ताकत
खेतिहर मजदूर यूनियन की घोषणा के बाद अब नजर सितंबर से शुरू होने वाले कार्यक्रमों पर रहेगी। अंचल स्तर के धरना-प्रदर्शन से लेकर दरभंगा और बेगूसराय के सम्मेलनों तक संगठन अपनी तैयारियों को जमीन पर उतारेगा।

इन कार्यक्रमों के जरिए कितने खेतिहर मजदूर और ग्रामीण गरीब संगठन के साथ जुड़ते हैं, यह दिसंबर की रैली की तस्वीर तय करेगा। फिलहाल यूनियन ने 10 दिसंबर को पटना में बड़ा जुटान करने का लक्ष्य रखा है और इसके लिए राज्यभर में अभियान चलाने की तैयारी शुरू कर दी है।

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खेतिहर मजदूरों की बड़ी रैली का ऐलान, 10 दिसंबर को पटना में होगा बड़ा जुटान

By Malay Ojha | Published: 20 August 2026 at 06:11 PM

बिहार में खेतिहर मजदूरों और ग्रामीण गरीबों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन की तैयारी तेज हो गई है। बिहार प्रांतीय खेतिहर मजदूर यूनियन ने 10 दिसंबर 2026 को पटना में बड़ी रैली आयोजित करने का ऐलान किया है। रैली से पहले 2 से 8 सितंबर तक राज्य के सभी अंचलों में धरना-प्रदर्शन किए जाएंगे। इसके बाद 30 सितंबर को दरभंगा और 24 अक्टूबर को बेगूसराय में बड़े सम्मेलन आयोजित कर पटना रैली की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।

बिहार प्रांतीय खेतिहर मजदूर यूनियन की दो दिवसीय राज्य कमेटी की बैठक 19 और 20 अगस्त को पटना के जमाल रोड स्थित पार्टी राज्य कार्यालय में हुई। बैठक की अध्यक्षता साथी रंगलाल पासवान ने की। बैठक में संगठन से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा के बाद आने वाले महीनों के आंदोलन की रूपरेखा तय की गई।

बैठक के बाद अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव कॉमरेड विक्रम सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने 10 दिसंबर को पटना में खेतिहर मजदूरों की बड़ी रैली आयोजित किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि रैली के जरिए खेतिहर मजदूरों, भूमिहीन परिवारों और ग्रामीण गरीबों से जुड़े सवालों को मजबूती से उठाया जाएगा।

सितंबर में अंचल स्तर पर होगा आंदोलन
संगठन ने आंदोलन को सीधे पटना तक सीमित रखने के बजाय इसकी शुरुआत गांव और अंचल स्तर से करने की योजना बनाई है। कॉमरेड विक्रम सिंह के मुताबिक 2 से 8 सितंबर 2026 के बीच बिहार के सभी अंचलों में धरना और प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।

इन कार्यक्रमों के जरिए स्थानीय स्तर पर गरीब परिवारों की समस्याओं को उठाया जाएगा। संगठन का कहना है कि अंचल स्तर के कार्यक्रमों के बाद आंदोलन को जिला और राज्य स्तर पर विस्तार दिया जाएगा। इसी क्रम में दिसंबर की पटना रैली के लिए बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ने का अभियान चलाया जाएगा।

दरभंगा में 30 सितंबर को बड़ा सम्मेलन
पटना में प्रस्तावित रैली की तैयारी के लिए 30 सितंबर को दरभंगा में बड़ा सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में खेतिहर मजदूरों और ग्रामीण गरीबों के बीच संगठन को मजबूत करने तथा रैली में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की रणनीति पर चर्चा होगी।

संगठन की कोशिश है कि अलग-अलग जिलों में स्थानीय समस्याओं को लेकर लोगों को एकजुट किया जाए और उन्हें दिसंबर में पटना में होने वाले बड़े आंदोलन से जोड़ा जाए।

बेगूसराय में 24 अक्टूबर को जुटेंगे कार्यकर्ता
इसके बाद 24 अक्टूबर 2026 को बेगूसराय में बड़ा सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। यह सम्मेलन भी पटना रैली की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संगठन के मुताबिक दोनों सम्मेलनों में कार्यकर्ताओं को रैली की तैयारी से जुड़ी जिम्मेदारियां दी जाएंगी।

दरभंगा और बेगूसराय के कार्यक्रमों के जरिए आसपास के जिलों के खेतिहर मजदूरों और गरीब परिवारों तक पहुंच बनाने की योजना है। संगठन दिसंबर तक इस अभियान को लगातार तेज करने की तैयारी में है।

पांच डिसमिल जमीन देने की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉमरेड विक्रम सिंह ने भूमिहीन परिवारों को जमीन देने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भूमिहीनों को पांच डिसमिल जमीन का पर्चा देने के बजाय गरीबों के घरों को बुलडोजर से उजाड़ा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भूमिहीन परिवारों के लिए जमीन का सवाल लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। संगठन इस मुद्दे को आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल करेगा और सरकार पर गरीब परिवारों के हित में कदम उठाने का दबाव बनाएगा।

राशन कार्ड से नाम हटाने का आरोप
खेतिहर मजदूर यूनियन ने गरीब परिवारों के राशन कार्ड से नाम काटे जाने का भी आरोप लगाया है। संगठन का कहना है कि राशन गरीब परिवारों के लिए बेहद जरूरी सुविधा है और पात्र लोगों को इससे वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

यूनियन का कहना है कि राशन कार्ड से जुड़े मामलों को भी आंदोलन के दौरान प्रमुखता से उठाया जाएगा। ग्रामीण इलाकों में ऐसे परिवारों से संपर्क कर उनकी समस्याओं को सामने लाने की तैयारी की जा रही है।

होल्डिंग और पानी टैक्स के खिलाफ भी आंदोलन
आंदोलन के एजेंडे में होल्डिंग टैक्स और पानी टैक्स का मुद्दा भी शामिल किया गया है। संगठन का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाली व्यवस्थाओं का विरोध किया जाएगा।

कॉमरेड विक्रम सिंह ने स्मार्ट मीटर को लेकर भी संगठन के विरोध की बात कही। खेतिहर मजदूर यूनियन इन सभी मुद्दों को एक साथ उठाकर ग्रामीण और गरीब तबके के बीच आंदोलन को मजबूत करने की तैयारी में है।

मनरेगा को लेकर भी उठेगी आवाज
ग्रामीण मजदूरों के रोजगार से जुड़े मनरेगा के मुद्दे को भी आंदोलन में शामिल किया गया है। संगठन ने मनरेगा की पुनर्बहाली की मांग उठाई है। यूनियन का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों की कमी का सीधा असर गरीब परिवारों की आमदनी पर पड़ता है।

खेतिहर मजदूर यूनियन का कहना है कि ग्रामीण मजदूरों को रोजगार और मजदूरी से जुड़े अधिकार मिलना जरूरी है। इसी मांग को लेकर संगठन आने वाले दिनों में व्यापक अभियान चलाएगा।

सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
कॉमरेड विक्रम सिंह ने बिहार की भाजपा-एनडीए सरकार पर गरीबों, दलितों, महादलितों, महिलाओं और कमजोर तबकों के खिलाफ हमले बढ़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के खिलाफ खेतिहर मजदूरों और ग्रामीण गरीबों को संगठित कर आंदोलन को तेज किया जाएगा।

हालांकि, सरकार पर लगाए गए ये आरोप संगठन की राजनीतिक राय हैं। यूनियन ने अपने आंदोलन के जरिए इन मुद्दों को जनता के बीच ले जाने और सरकार के सामने अपनी मांगें रखने की बात कही है।

राज्य कमेटी की बैठक में बनी आंदोलन की रणनीति
दो दिवसीय बैठक में संगठन के राज्य महासचिव कॉमरेड रामाश्रय महतो ने भी आंदोलन और संगठन की तैयारियों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। बैठक में राज्यभर में संगठन को मजबूत करने और खेतिहर मजदूरों से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर दिया गया।

बैठक के बाद संगठन ने साफ कर दिया कि अब आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। पहले अंचल स्तर पर धरना-प्रदर्शन होंगे, फिर बड़े सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे और आखिर में दिसंबर में पटना में बड़ी रैली होगी।

दिसंबर में दिखेगी आंदोलन की ताकत
खेतिहर मजदूर यूनियन की घोषणा के बाद अब नजर सितंबर से शुरू होने वाले कार्यक्रमों पर रहेगी। अंचल स्तर के धरना-प्रदर्शन से लेकर दरभंगा और बेगूसराय के सम्मेलनों तक संगठन अपनी तैयारियों को जमीन पर उतारेगा।

इन कार्यक्रमों के जरिए कितने खेतिहर मजदूर और ग्रामीण गरीब संगठन के साथ जुड़ते हैं, यह दिसंबर की रैली की तस्वीर तय करेगा। फिलहाल यूनियन ने 10 दिसंबर को पटना में बड़ा जुटान करने का लक्ष्य रखा है और इसके लिए राज्यभर में अभियान चलाने की तैयारी शुरू कर दी है।

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