By Malay Ojha | Published: 20 August 2026 at 05:58 PM
नवादा जिले के गोविंदपुर प्रखंड क्षेत्र में जंगली हाथियों की मौजूदगी ने एक बार फिर ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। सरकंडा पंचायत के महाबरा गांव के पास ग्रामीणों ने एक जंगली हाथी को घूमते देखा। देखते ही देखते इसकी खबर पूरे इलाके में फैल गई और बड़ी संख्या में लोग मौके के आसपास जुटने लगे। हालांकि इस बार ग्रामीणों ने हड़बड़ी में हाथी के करीब जाने या उसे घेरने के बजाय दूरी बनाए रखी और सामूहिक प्रयास से उसे आबादी वाले इलाके से दूर जंगल की ओर खदेड़ दिया।
हाथी के गांव के नजदीक पहुंचने की खबर मिलते ही लोगों में डर का माहौल बन गया। ग्रामीणों को अच्छी तरह पता था कि जंगली हाथी के करीब जाना या उसे चारों तरफ से घेरना खतरनाक हो सकता है। इसलिए लोगों ने समझदारी दिखाते हुए सुरक्षित दूरी बनाए रखी। सामूहिक रूप से हाथी को आबादी से दूर रखने की कोशिश की गई और अंत में उसे जंगल की तरफ जाने के लिए मजबूर कर दिया गया। इस दौरान किसी व्यक्ति के घायल होने या संपत्ति को नुकसान पहुंचने की पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों की सतर्कता से टला बड़ा हादसा
घटना के दौरान सबसे अहम बात यह रही कि ग्रामीणों ने उत्सुकता में हाथी के पास जाने की कोशिश नहीं की। जंगली जानवर को घेरने या उसके सामने खड़े होने के बजाय लोगों ने दूरी बनाकर स्थिति पर नजर रखी। यही सावधानी किसी बड़े हादसे को टालने में मददगार साबित हुई। गोविंदपुर के जंगल से सटे इलाकों में हाथियों की आवाजाही पहले भी ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनती रही है। ऐसे में महाबरा में हाथी के पहुंचने की घटना ने एक बार फिर सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गोविंदपुर में पहले भी पहुंच चुका है हाथियों का झुंड
महाबरा और आसपास के इलाकों में जंगली हाथियों की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है। मार्च 2026 में करीब 28 हाथियों का झुंड महाबरा गांव के आसपास पहुंचा था। उस दौरान हाथियों ने खेतों और एक धार्मिक स्थल को भी नुकसान पहुंचाया था। इसके बाद मई में सरकंडा पंचायत के महावरा और सरस्वती बीघा गांव में हाथी दोबारा पहुंचा था। उस घटना में कुछ घरों और आम के बगीचों को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई थी। वन विभाग और पुलिस की टीम ने काफी मशक्कत के बाद हाथी को जंगल की ओर खदेड़ा था।
झुंड से बिछड़ा हाथी बार-बार लौटने से बढ़ी परेशानी
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक गोविंदपुर इलाके में हाथियों की सक्रियता कई सप्ताह से बनी हुई है। मई की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि बड़े झुंड को जंगल की ओर भेजे जाने के बाद एक हाथी झुंड से अलग होकर बार-बार गोविंदपुर के गांवों की तरफ लौट रहा था। माधोपुर, बिशनपुर और जेटसारी समेत कई इलाकों में हाथी की मौजूदगी सामने आई थी। इससे ग्रामीणों के लिए रात के समय घर से निकलना और खेतों में अकेले जाना तक मुश्किल हो गया था।
पहले हो चुका है जान-माल का नुकसान
गोविंदपुर क्षेत्र में हाथियों की सक्रियता का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पहले इनके कारण लोगों की जान भी जा चुकी है। मई की स्थानीय रिपोर्टों में हाथियों के हमले में दो ग्रामीणों की मौत का उल्लेख किया गया था, जबकि बाद की रिपोर्ट में इस अवधि में तीन लोगों की मौत की जानकारी सामने आई। इसके अलावा कई घरों को नुकसान पहुंचने और खेतों में खड़ी फसल बर्बाद होने की भी खबरें प्रकाशित हुई हैं। ऐसे हालात में गांव के पास हाथी का फिर दिखाई देना ग्रामीणों के लिए सामान्य घटना नहीं, बल्कि गंभीर खतरे की घंटी है।
खेतों और घरों पर भी मंडरा रहा खतरा
ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता केवल अपनी सुरक्षा को लेकर नहीं है। जंगल के आसपास रहने वाले परिवारों की रोजी-रोटी का बड़ा हिस्सा खेती पर निर्भर है। हाथियों के खेतों में घुसने से तैयार फसल को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है। इससे किसानों को सीधे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। पहले भी हाथियों द्वारा घरों, झोपड़ियों, बगीचों और फसलों को नुकसान पहुंचाए जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। महावरा गांव में मई में हाथी ने दो घरों को नुकसान पहुंचाया था।
ग्रामीणों ने वन विभाग से निगरानी बढ़ाने की मांग की
महाबरा में हाथी के पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से इलाके में निगरानी बढ़ाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि हाथियों की आवाजाही को देखते हुए जंगल से सटे गांवों में पहले से सतर्कता व्यवस्था मजबूत रहनी चाहिए। हाथी के गांव में आने के बाद कार्रवाई शुरू करने के बजाय उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखने की जरूरत है, ताकि वह दोबारा आबादी वाले इलाके में प्रवेश न कर सके। जून में भी गोविंदपुर के पहाड़ी इलाकों में हाथियों का झुंड दिखाई देने के बाद ग्रामीणों ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की थी।
बार-बार गांव में लौट रहा हाथी बना चिंता का कारण
महाबरा की ताजा घटना ने यह साफ कर दिया है कि जंगल से सटे गांवों में हाथियों की आवाजाही अभी पूरी तरह थमी नहीं है। एक तरफ ग्रामीण अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, वहीं दूसरी ओर वन क्षेत्र के आसपास रहने वाले परिवारों के लिए खेती और रोजमर्रा का काम भी प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि हाथियों की गतिविधियों को लेकर वन विभाग नियमित निगरानी करे और संवेदनशील गांवों में समय रहते लोगों को सूचना देने की व्यवस्था मजबूत की जाए।
अभी कोई नुकसान नहीं, लेकिन खतरा बरकरार
फिलहाल महाबरा गांव के पास हाथी के पहुंचने की इस घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने या बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों की सतर्कता और सामूहिक प्रयास से हाथी को आबादी से दूर जंगल की तरफ भेज दिया गया। लेकिन जिस इलाके में पहले हाथियों के कारण मौत, घरों को नुकसान और फसलों की बर्बादी जैसी घटनाएं हो चुकी हों, वहां इस तरह हाथी का दोबारा पहुंचना चिंता बढ़ाने वाला है। ग्रामीणों को अब डर है कि यदि हाथी फिर लौटता है तो स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे में निगरानी और समय पर कार्रवाई ही किसी बड़ी घटना को रोकने का सबसे अहम रास्ता है।
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