National

spot_img

रोहिणी आचार्य पर दीपा मांझी का पलटवार, बोलीं- माता-पिता का सम्मान सबके लिए बराबर, सामंती सोच से बाहर आइए

By Malay Ojha | Published: 21 August 2026 at 02:03 PM

बिहार की सियासत में जीतन राम मांझी और लालू यादव परिवार के बीच चल रही बयानबाजी अब परिवार और माता-पिता के सम्मान तक पहुंच गई है। इमामगंज की विधायक दीपा मांझी ने रोहिणी आचार्य पर तीखा पलटवार करते हुए कहा है कि अगर अपने माता-पिता का सम्मान किसी के लिए सबसे ऊपर है, तो दलित परिवारों के माता-पिता भी उतने ही सम्मान के हकदार हैं। उन्होंने रोहिणी से राजसी और सामंती सोच से बाहर आने की अपील की है।

दीपा मांझी ने कहा कि किसी व्यक्ति के लिए उसके माता-पिता का सम्मान सबसे महत्वपूर्ण हो सकता है और होना भी चाहिए, लेकिन यही सम्मान दूसरे परिवारों के बुजुर्गों के लिए भी होना चाहिए। उनके मुताबिक किसी राजनीतिक परिवार को सिर्फ इसलिए विशेष अधिकार नहीं मिल जाता कि उसके सदस्य लंबे समय से राजनीति में हैं।

उन्होंने साफ कहा कि लोकतंत्र में विरोध करने की पूरी आजादी है, लेकिन किसी के माता-पिता या परिवार के बुजुर्गों को अपमानित करने की छूट किसी को नहीं मिल सकती। दीपा का कहना है कि राजनीतिक बहस को निजी रिश्तों और परिवार के सम्मान तक ले जाना ठीक नहीं है।

‘मेरे लिए भी जीतन राम मांझी का सम्मान सर्वोपरि’
दीपा मांझी ने रोहिणी आचार्य की उस सोच पर भी सवाल उठाया कि माता-पिता से बढ़कर उनके लिए कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि जैसे रोहिणी के लिए उनके माता-पिता का सम्मान सबसे ऊपर है, वैसे ही उनके लिए भी उनके ससुर जीतन राम मांझी का सम्मान सर्वोपरि है।

दीपा ने अपने परिवार की परवरिश और रिश्तों को लेकर कहा कि उनके घर में बेटी और बहू के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाता। उनके मुताबिक बेटी हो या बहू, दोनों को परिवार में सम्मान, अधिकार और अपनापन बराबर मिलता है।

‘बहू को हमारे यहां पराया नहीं समझा जाता’
विधायक ने कहा कि उनके परिवार में बहू को कभी बाहरी सदस्य की तरह नहीं देखा जाता। उनका कहना है कि परिवार के रिश्तों में सम्मान केवल बेटी तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि बहू को भी वही जगह और सम्मान मिलना चाहिए।

दीपा ने इसी बात को रोहिणी आचार्य की ओर से परिवार और बेटियों-बहुओं के सम्मान को लेकर कही जा रही बातों से जोड़ते हुए आत्ममंथन की सलाह दी। उन्होंने कहा कि दूसरों के परिवार और रिश्तों पर सवाल उठाने से पहले हर व्यक्ति को अपने घर के रिश्तों और व्यवहार को भी देखना चाहिए।

‘पहले अपनी भाषा का आईना देखिए’
दीपा मांझी ने रोहिणी आचार्य से यह भी पूछा कि आखिर किसी दूसरे परिवार के माता-पिता और बुजुर्गों के बारे में आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल करने का अधिकार किसे मिला है। उन्होंने कहा कि राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप होते रहते हैं, लेकिन भाषा की एक सीमा होनी चाहिए।

उनका कहना है कि यदि राजनीतिक विरोध के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली भाषा खुद सम्मानजनक नहीं है, तो बाद में सम्मान और मर्यादा की बात करना दोहरे मापदंड जैसा लगता है। दीपा ने इसी आधार पर कहा कि जिस भाषा को अपने लिए गलत माना जाता है, उसी भाषा को दूसरों के लिए भी गलत माना जाना चाहिए।

‘आप बोलें तो बेटी का जवाब, कोई बोले तो अमर्यादित?’
दीपा मांझी ने बयानबाजी के इस पूरे तरीके पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर किसी नेता या परिवार का सदस्य राजनीतिक विरोध में तीखी भाषा का इस्तेमाल करता है और उसे ‘एक बेटी का जवाब’ बताया जाता है, तो उसी तरह जवाब मिलने पर उसे अमर्यादित बताना सही नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि राजनीति में सवाल पूछे जाने चाहिए, सरकार की आलोचना होनी चाहिए और राजनीतिक विरोध भी होना चाहिए, लेकिन निजी रिश्तों और परिवार के बुजुर्गों को निशाना बनाना उचित नहीं है।

‘गलत भाषा का सिद्धांत सब पर लागू होना चाहिए’
दीपा ने कहा कि अगर किसी भाषा या बयान को गलत माना जाता है तो उसका पैमाना सभी के लिए एक जैसा होना चाहिए। उनके मुताबिक राजनीति में किसी व्यक्ति की पहचान, परिवार या राजनीतिक हैसियत के आधार पर भाषा की अलग-अलग व्याख्या नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा कि जो बात गलत है, वह सामने वाले के लिए भी गलत है और अपने लिए भी। इसी के साथ उन्होंने रोहिणी आचार्य को यह संदेश देने की कोशिश की कि राजनीतिक लड़ाई को व्यक्तिगत और पारिवारिक विवाद में बदलने से बचना चाहिए।

जीतन राम मांझी और लालू परिवार के बीच बढ़ी बयानबाजी
दरअसल, बिहार की राजनीति में जीतन राम मांझी और लालू प्रसाद यादव के परिवार के बीच हाल के दिनों में बयानबाजी तेज हुई है। हालिया विवाद में तेजस्वी यादव के एक कार्यक्रम में जीतन राम मांझी को श्रद्धांजलि देने की घटना के बाद मांझी ने तंज कसा था। इसके बाद रोहिणी आचार्य ने मांझी पर निशाना साधते हुए उनके बयान और आचरण पर सवाल उठाए।

इसके बाद रोहिणी आचार्य की ओर से मांझी के माता-पिता और परिवार से जुड़े बयानों पर भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने अपने माता-पिता को लेकर किसी भी तरह की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को स्वीकार नहीं करने की बात कही। ([Navbharat Times][1])

विवाद अब राजनीतिक से पारिवारिक मुद्दे तक
मांझी और लालू परिवार के बीच पुरानी राजनीतिक तल्खी के बीच ताजा बयानबाजी ने विवाद को और व्यक्तिगत बना दिया है। अब दोनों पक्षों की ओर से परिवार, माता-पिता, बेटी और बहू के सम्मान जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं।

दीपा मांझी ने इसी क्रम में कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन परिवार के बुजुर्गों का सम्मान हर परिवार के लिए बराबर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी को यह अधिकार नहीं है कि वह राजनीतिक विरोध के नाम पर दूसरे के माता-पिता को अपमानित करे।

‘सम्मान चाहिए तो सम्मान देना भी सीखिए’
अपने बयान के आखिर में दीपा मांझी ने कहा कि राजनीति में विरोध कीजिए, सवाल उठाइए और जरूरत पड़े तो कड़ा जवाब भी दीजिए, लेकिन परिवार के बुजुर्गों को बीच में लाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सम्मान की अपेक्षा रखने वाले हर व्यक्ति को पहले दूसरों को सम्मान देना सीखना चाहिए।

दीपा ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके परिवार के सम्मान पर किसी तरह की टिप्पणी को अब चुपचाप स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनके मुताबिक राजनीतिक बहस के लिए राजनीतिक मुद्दे काफी हैं और उसे निजी परिवारों तक ले जाने से समाज में गलत संदेश जाता है।

फिलहाल, इस पूरे मामले ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर लालू परिवार और मांझी परिवार के बीच चल रही जुबानी जंग को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में रोहिणी आचार्य की ओर से इस बयान पर कोई नई प्रतिक्रिया आती है या नहीं, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं।

📢 बड़ी खबर आते ही सबसे पहले जानना चाहते हैं?
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।

WhatsApp चैनल जॉइन करें
Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

International

spot_img

रोहिणी आचार्य पर दीपा मांझी का पलटवार, बोलीं- माता-पिता का सम्मान सबके लिए बराबर, सामंती सोच से बाहर आइए

By Malay Ojha | Published: 21 August 2026 at 02:03 PM

बिहार की सियासत में जीतन राम मांझी और लालू यादव परिवार के बीच चल रही बयानबाजी अब परिवार और माता-पिता के सम्मान तक पहुंच गई है। इमामगंज की विधायक दीपा मांझी ने रोहिणी आचार्य पर तीखा पलटवार करते हुए कहा है कि अगर अपने माता-पिता का सम्मान किसी के लिए सबसे ऊपर है, तो दलित परिवारों के माता-पिता भी उतने ही सम्मान के हकदार हैं। उन्होंने रोहिणी से राजसी और सामंती सोच से बाहर आने की अपील की है।

दीपा मांझी ने कहा कि किसी व्यक्ति के लिए उसके माता-पिता का सम्मान सबसे महत्वपूर्ण हो सकता है और होना भी चाहिए, लेकिन यही सम्मान दूसरे परिवारों के बुजुर्गों के लिए भी होना चाहिए। उनके मुताबिक किसी राजनीतिक परिवार को सिर्फ इसलिए विशेष अधिकार नहीं मिल जाता कि उसके सदस्य लंबे समय से राजनीति में हैं।

उन्होंने साफ कहा कि लोकतंत्र में विरोध करने की पूरी आजादी है, लेकिन किसी के माता-पिता या परिवार के बुजुर्गों को अपमानित करने की छूट किसी को नहीं मिल सकती। दीपा का कहना है कि राजनीतिक बहस को निजी रिश्तों और परिवार के सम्मान तक ले जाना ठीक नहीं है।

‘मेरे लिए भी जीतन राम मांझी का सम्मान सर्वोपरि’
दीपा मांझी ने रोहिणी आचार्य की उस सोच पर भी सवाल उठाया कि माता-पिता से बढ़कर उनके लिए कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि जैसे रोहिणी के लिए उनके माता-पिता का सम्मान सबसे ऊपर है, वैसे ही उनके लिए भी उनके ससुर जीतन राम मांझी का सम्मान सर्वोपरि है।

दीपा ने अपने परिवार की परवरिश और रिश्तों को लेकर कहा कि उनके घर में बेटी और बहू के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाता। उनके मुताबिक बेटी हो या बहू, दोनों को परिवार में सम्मान, अधिकार और अपनापन बराबर मिलता है।

‘बहू को हमारे यहां पराया नहीं समझा जाता’
विधायक ने कहा कि उनके परिवार में बहू को कभी बाहरी सदस्य की तरह नहीं देखा जाता। उनका कहना है कि परिवार के रिश्तों में सम्मान केवल बेटी तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि बहू को भी वही जगह और सम्मान मिलना चाहिए।

दीपा ने इसी बात को रोहिणी आचार्य की ओर से परिवार और बेटियों-बहुओं के सम्मान को लेकर कही जा रही बातों से जोड़ते हुए आत्ममंथन की सलाह दी। उन्होंने कहा कि दूसरों के परिवार और रिश्तों पर सवाल उठाने से पहले हर व्यक्ति को अपने घर के रिश्तों और व्यवहार को भी देखना चाहिए।

‘पहले अपनी भाषा का आईना देखिए’
दीपा मांझी ने रोहिणी आचार्य से यह भी पूछा कि आखिर किसी दूसरे परिवार के माता-पिता और बुजुर्गों के बारे में आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल करने का अधिकार किसे मिला है। उन्होंने कहा कि राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप होते रहते हैं, लेकिन भाषा की एक सीमा होनी चाहिए।

उनका कहना है कि यदि राजनीतिक विरोध के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली भाषा खुद सम्मानजनक नहीं है, तो बाद में सम्मान और मर्यादा की बात करना दोहरे मापदंड जैसा लगता है। दीपा ने इसी आधार पर कहा कि जिस भाषा को अपने लिए गलत माना जाता है, उसी भाषा को दूसरों के लिए भी गलत माना जाना चाहिए।

‘आप बोलें तो बेटी का जवाब, कोई बोले तो अमर्यादित?’
दीपा मांझी ने बयानबाजी के इस पूरे तरीके पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर किसी नेता या परिवार का सदस्य राजनीतिक विरोध में तीखी भाषा का इस्तेमाल करता है और उसे ‘एक बेटी का जवाब’ बताया जाता है, तो उसी तरह जवाब मिलने पर उसे अमर्यादित बताना सही नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि राजनीति में सवाल पूछे जाने चाहिए, सरकार की आलोचना होनी चाहिए और राजनीतिक विरोध भी होना चाहिए, लेकिन निजी रिश्तों और परिवार के बुजुर्गों को निशाना बनाना उचित नहीं है।

‘गलत भाषा का सिद्धांत सब पर लागू होना चाहिए’
दीपा ने कहा कि अगर किसी भाषा या बयान को गलत माना जाता है तो उसका पैमाना सभी के लिए एक जैसा होना चाहिए। उनके मुताबिक राजनीति में किसी व्यक्ति की पहचान, परिवार या राजनीतिक हैसियत के आधार पर भाषा की अलग-अलग व्याख्या नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा कि जो बात गलत है, वह सामने वाले के लिए भी गलत है और अपने लिए भी। इसी के साथ उन्होंने रोहिणी आचार्य को यह संदेश देने की कोशिश की कि राजनीतिक लड़ाई को व्यक्तिगत और पारिवारिक विवाद में बदलने से बचना चाहिए।

जीतन राम मांझी और लालू परिवार के बीच बढ़ी बयानबाजी
दरअसल, बिहार की राजनीति में जीतन राम मांझी और लालू प्रसाद यादव के परिवार के बीच हाल के दिनों में बयानबाजी तेज हुई है। हालिया विवाद में तेजस्वी यादव के एक कार्यक्रम में जीतन राम मांझी को श्रद्धांजलि देने की घटना के बाद मांझी ने तंज कसा था। इसके बाद रोहिणी आचार्य ने मांझी पर निशाना साधते हुए उनके बयान और आचरण पर सवाल उठाए।

इसके बाद रोहिणी आचार्य की ओर से मांझी के माता-पिता और परिवार से जुड़े बयानों पर भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने अपने माता-पिता को लेकर किसी भी तरह की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को स्वीकार नहीं करने की बात कही। ([Navbharat Times][1])

विवाद अब राजनीतिक से पारिवारिक मुद्दे तक
मांझी और लालू परिवार के बीच पुरानी राजनीतिक तल्खी के बीच ताजा बयानबाजी ने विवाद को और व्यक्तिगत बना दिया है। अब दोनों पक्षों की ओर से परिवार, माता-पिता, बेटी और बहू के सम्मान जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं।

दीपा मांझी ने इसी क्रम में कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन परिवार के बुजुर्गों का सम्मान हर परिवार के लिए बराबर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी को यह अधिकार नहीं है कि वह राजनीतिक विरोध के नाम पर दूसरे के माता-पिता को अपमानित करे।

‘सम्मान चाहिए तो सम्मान देना भी सीखिए’
अपने बयान के आखिर में दीपा मांझी ने कहा कि राजनीति में विरोध कीजिए, सवाल उठाइए और जरूरत पड़े तो कड़ा जवाब भी दीजिए, लेकिन परिवार के बुजुर्गों को बीच में लाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सम्मान की अपेक्षा रखने वाले हर व्यक्ति को पहले दूसरों को सम्मान देना सीखना चाहिए।

दीपा ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके परिवार के सम्मान पर किसी तरह की टिप्पणी को अब चुपचाप स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनके मुताबिक राजनीतिक बहस के लिए राजनीतिक मुद्दे काफी हैं और उसे निजी परिवारों तक ले जाने से समाज में गलत संदेश जाता है।

फिलहाल, इस पूरे मामले ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर लालू परिवार और मांझी परिवार के बीच चल रही जुबानी जंग को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में रोहिणी आचार्य की ओर से इस बयान पर कोई नई प्रतिक्रिया आती है या नहीं, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं।

📢 बड़ी खबर आते ही सबसे पहले जानना चाहते हैं?
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।

WhatsApp चैनल जॉइन करें
Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

National

spot_img

International

spot_img
RELATED ARTICLES