By aryavartalive | Published: 24 August 2026 at 10:23 PM
गंगा जल बंटवारे को लेकर बिहार में सियासी बहस एक बार फिर तेज हो गई है। जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने राजद सांसद सुधाकर सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए 1996 की गंगा जल संधि का मुद्दा उठाया है। उन्होंने सवाल किया कि जब यह संधि हुई थी, तब बिहार में राजद की सरकार थी और केंद्र में संयुक्त मोर्चे की सरकार थी, तब बिहार के हितों को लेकर आवाज क्यों नहीं उठाई गई।
राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि दिसंबर 2026 में 1996 की भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि की अवधि पूरी होने वाली है और ऐसे समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी बढ़ गई है। उन्होंने सुधाकर सिंह से कहा कि मीडिया में बयान देने से पहले पूरे मामले के तथ्यों को देखना चाहिए। 12 दिसंबर 1996 को हुई यह संधि 30 साल के लिए थी और दिसंबर 2026 में इसकी अवधि समाप्त होनी है।
‘1996 में बिहार के हित की बात क्यों नहीं हुई?’
जदयू प्रवक्ता ने कहा कि जिस समय यह संधि हुई, उस समय लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे। केंद्र में संयुक्त मोर्चे की सरकार थी और आईके गुजराल विदेश मंत्री थे। राजीव रंजन प्रसाद का आरोप है कि उस समय बिहार के हितों को लेकर इस संधि का विरोध नहीं किया गया, जबकि आज राजद की ओर से बिहार के हक की बात की जा रही है।
संधि के नवीकरण का मुद्दा अब बना राजनीतिक बहस
राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि जदयू इस संधि के नवीकरण के खिलाफ अपनी बात लगातार रख रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने भी राज्यसभा में गंगा जल बंटवारे और बिहार के हितों से जुड़े सवाल को प्रमुखता से उठाया है। उनका कहना है कि बिहार को अपने हिस्से के पानी और गंगा से जुड़ी समस्याओं को लेकर स्पष्ट नीति की जरूरत है।
अंतरराष्ट्रीय संधि के नियमों का भी दिया हवाला
जदयू नेता ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच हुई यह एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, इसलिए इसके नवीकरण या बदलाव की प्रक्रिया सामान्य राजनीतिक फैसले की तरह नहीं होती। उन्होंने सुधाकर सिंह से इस विषय के संवैधानिक और कानूनी पहलुओं को समझने की अपील की। हालांकि, संधि के कानूनी प्रावधानों पर बात करते हुए उन्होंने संविधान की सातवीं अनुसूची का भी हवाला दिया।
फरक्का बैराज को लेकर कांग्रेस पर भी सवाल
राजीव रंजन प्रसाद ने फरक्का बैराज के इतिहास को लेकर भी राजद और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि फरक्का बैराज का निर्माण लंबे समय तक चला और इसे 1975 में चालू किया गया था। केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के दस्तावेज के अनुसार फरक्का बैराज परियोजना 1975 में चालू हुई थी और इसका प्रमुख उद्देश्य हुगली-भागीरथी जलमार्ग में पानी का प्रवाह बढ़ाने और कोलकाता बंदरगाह के संरक्षण से जुड़ा था। ([Jal Shakti][2])
‘कांग्रेस से सवाल करे राजद’
जदयू प्रवक्ता ने कहा कि आज राजद जिस राजनीतिक गठबंधन के साथ खड़ा है, उसमें कांग्रेस भी प्रमुख सहयोगी है। ऐसे में फरक्का बैराज से जुड़े पुराने फैसलों को लेकर राजद को कांग्रेस से भी सवाल करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार के हितों की अनदेखी का सवाल केवल आज की राजनीति से नहीं जुड़ा है, बल्कि इसका इतिहास काफी पुराना है।
नीतीश कुमार के रुख का किया बचाव
राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लंबे समय से फरक्का बैराज और गंगा में बढ़ती गाद की समस्या को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते रहे हैं। उनके मुताबिक नीतीश कुमार ने कई मौकों पर फरक्का बैराज की समीक्षा और गंगा में गाद प्रबंधन की जरूरत पर जोर दिया है।
बिहार की जल परियोजनाओं का भी किया जिक्र
जदयू प्रवक्ता ने कहा कि नीतीश कुमार के शासनकाल में बिहार में कई महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं पर काम हुआ। उन्होंने दुर्गावती जलाशय परियोजना और गया में फल्गु नदी पर रबर बांध का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण को लेकर कई योजनाएं आगे बढ़ाई गई हैं।
बाढ़ से बचाव के लिए कई नदियों पर काम का दावा
उन्होंने कहा कि बागमती, गंडक, कमला बलान, सिकरहना और मसान जैसी नदियों से जुड़े इलाकों में तटबंध और बांधों के निर्माण तथा उनकी ऊंचाई बढ़ाने का काम किया जा रहा है। उनका दावा है कि राज्य में बाढ़ सुरक्षा और जल प्रबंधन को लेकर लंबे समय की योजना पर काम चल रहा है।
दिसंबर 2026 के बाद क्या होगा, इस पर नजर
1996 की गंगा जल संधि का दिसंबर 2026 में 30 साल का कार्यकाल पूरा होना इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू है। भारत सरकार ने फरवरी 2026 में लोकसभा में बताया था कि संधि 12 दिसंबर 1996 को हुई थी और दिसंबर 2026 में समाप्त होगी। उस समय सरकार ने यह भी कहा था कि दोनों देशों के बीच इसके नवीकरण को लेकर बातचीत शुरू नहीं हुई थी।
बिहार के पानी के हिस्से को लेकर बढ़ी उम्मीदें
संधि के नवीकरण को लेकर बिहार में भी पानी के हिस्से और गंगा के जल प्रबंधन को लेकर चर्चा तेज है। 2026 में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्तावित नए समझौते में बिहार को कम पानी की अवधि में करीब 900 घन फीट प्रति सेकंड पानी आवंटित किए जाने की संभावना पर चर्चा हुई थी। हालांकि, यह अंतिम समझौता नहीं है और वास्तविक व्यवस्था दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगी।
जदयू बोला- बिहार के हित से पीछे नहीं हटेंगे
राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि जदयू दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली संधि के नवीकरण के खिलाफ बिहार के हितों को मजबूती से उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी केंद्र सरकार के साथ समन्वय बनाकर यह कोशिश करेगी कि संधि के अगले चरण में बिहार के हितों को पर्याप्त महत्व मिले।
सुधाकर सिंह पर फिर साधा सीधा निशाना
अपने बयान के आखिर में जदयू प्रवक्ता ने सुधाकर सिंह पर व्यक्तिगत राजनीतिक हमला भी किया। उन्होंने कहा कि राजद सांसद को फरक्का बैराज, गंगा जल बंटवारे और बिहार के जल संसाधनों से जुड़े पूरे इतिहास को समझने के बाद ही बयान देना चाहिए। उन्होंने सुधाकर सिंह के पिता जगदानंद सिंह के लंबे समय तक बिहार के जल संसाधन मंत्री रहने का जिक्र करते हुए राजद के पुराने शासनकाल की जल संसाधन नीति पर भी सवाल उठाए।
संधि के साथ बिहार के हित का सवाल अहम
फरक्का और गंगा जल बंटवारे का मुद्दा अब केवल भारत-बांग्लादेश संबंधों तक सीमित नहीं रह गया है। दिसंबर 2026 में संधि की अवधि पूरी होने के साथ बिहार के पानी, गंगा में गाद, जल प्रबंधन और सूखे के समय पानी की उपलब्धता जैसे मुद्दे भी राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में इस मुद्दे पर बिहार की राजनीति के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर भी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
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