By Malay Ojha | Published: 25 August 2026 at 03:13 PM
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के एक बयान ने महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। नागपुर के एक कार्यक्रम में गडकरी ने अपने करीब 30 साल के सार्वजनिक जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि अब वह पहले जितना काम नहीं कर पाते और नई पीढ़ी को जिम्मेदारी देने का मौका मिलना चाहिए। हालांकि, उन्होंने राजनीति छोड़ने या संन्यास लेने की कोई घोषणा नहीं की है।
गडकरी नागपुर जिले के काटोल इलाके में आयोजित एकलव्य एकल विद्यालय के शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वह पिछले 30 वर्षों से लगातार सार्वजनिक जीवन में काम कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे और कई सम्मान भी मिले, लेकिन अब उनकी काम करने की क्षमता पहले जैसी नहीं है। ऐसे में नई पीढ़ी को आगे आने का अवसर मिलना चाहिए।
क्या गडकरी राजनीति छोड़ने वाले हैं?
गडकरी के इस बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या वह सक्रिय राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बनाने का संकेत दे रहे हैं। हालांकि, अभी तक ऐसा कहने का कोई आधिकारिक आधार नहीं है। गडकरी ने अपने संबोधन में कहीं भी यह नहीं कहा कि वह राजनीति से संन्यास लेने जा रहे हैं या मंत्री पद छोड़ने वाले हैं। इसलिए फिलहाल इसे उनके राजनीतिक भविष्य की घोषणा के बजाय नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की बात के तौर पर ही देखा जा रहा है।
पुरानी पीढ़ी मार्गदर्शन करे, युवा आगे आएं
गडकरी ने कहा कि नई पीढ़ी अब आगे आ चुकी है और पुराने लोग उनका मार्गदर्शन कर रहे हैं। उनके मुताबिक जिम्मेदारी धीरे-धीरे नए लोगों को सौंपने से काम का दायरा और बढ़ सकता है। उनके बयान में सत्ता या पद छोड़ने की सीधी बात नहीं थी, बल्कि लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे लोगों की भूमिका और अगली पीढ़ी को अवसर देने पर जोर था।
आदिवासी गांवों के विकास का भी जिक्र
अपने संबोधन में गडकरी ने केवल राजनीति या संगठन की बात नहीं की। उन्होंने महाराष्ट्र के आदिवासी इलाकों में विकास की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में राज्य का कोई भी आदिवासी गांव विकास और बिजली की रोशनी से वंचित नहीं रहेगा। उन्होंने इसे सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए कहा कि इस तस्वीर को बदलने के लिए लगातार काम करना होगा।
‘मैं कोई प्रेरणा स्रोत नहीं हूं’
गडकरी ने अपने संबोधन में खुद को किसी बड़े प्रेरणा स्रोत के तौर पर पेश करने से भी इनकार किया। उन्होंने कहा कि वह पहले ज्यादा काम कर पाते थे, लेकिन अब काम में उनका हिस्सा कम हुआ है। साथ ही उन्होंने बताया कि पुराने लोग नए लोगों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और इस प्रक्रिया से काम आगे बढ़ रहा है।
पुराने दिनों को भी याद किया
कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने अपने शुरुआती राजनीतिक दिनों की जीवनशैली का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि संगठन के लिए काम करते समय उनकी दिनचर्या काफी अलग थी। कई बार पार्टी का काम करते हुए समोसा खा लेते थे और जहां जगह मिली, वहीं सो जाते थे। उस समय काम और संगठन की गतिविधियां उनकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर रहती थीं।
कोरोना के बाद बदली जीवनशैली
गडकरी ने बताया कि कोरोना महामारी के बाद उन्होंने अपनी जीवनशैली में बड़ा बदलाव किया। अब वह स्वास्थ्य को लेकर पहले से ज्यादा सजग हैं और नियमित रूप से योग करते हैं। उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है और व्यक्ति को अपनी सेहत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
‘सेहत नहीं तो सत्ता और पद का क्या फायदा’
स्वास्थ्य को लेकर गडकरी ने बेहद सीधी बात कही। उनका कहना था कि यदि व्यक्ति स्वस्थ नहीं है तो सत्ता, पद और पैसा किसी काम के नहीं हैं। उनके मुताबिक जिंदगी को बेहतर तरीके से जीने के लिए सबसे पहले स्वास्थ्य का ठीक रहना जरूरी है। इसी वजह से उन्होंने लोगों को नियमित व्यायाम और योग करने की सलाह दी।
किसानों के लिए भी काम करने की बात
गडकरी ने किसानों की स्थिति को लेकर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि वह आने वाले वर्षों में किसानों के कल्याण के लिए और काम करना चाहते हैं। यानी उनके संबोधन में एक तरफ जिम्मेदारी नई पीढ़ी को देने की बात थी, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने अपने बचे हुए समय में सामाजिक और किसान हित से जुड़े काम जारी रखने की इच्छा भी जताई।
बयान का समय क्यों है अहम?
गडकरी का यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी में संभावित बदलावों को लेकर राजनीतिक चर्चा चल रही है। हाल ही में पार्टी के संगठन में भी बड़े स्तर पर बदलाव हुए हैं और कई नए चेहरों को जिम्मेदारी मिली है। ऐसे माहौल में गडकरी का नई पीढ़ी को आगे लाने वाला बयान स्वाभाविक रूप से ज्यादा चर्चा में आ गया है।
मंत्रिमंडल में बदलाव की चर्चा से भी जुड़ा मामला
गडकरी के बयान के साथ संभावित केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चाओं को भी जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ रिपोर्टों में इसे लेकर अटकलें लगाई गई हैं कि आने वाले समय में सरकार में जिम्मेदारियों और विभागों में बदलाव हो सकता है। हालांकि, गडकरी के बयान को सीधे मंत्रिमंडल में बदलाव या पद छोड़ने से जोड़ने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अभी संन्यास की कोई घोषणा नहीं
सबसे अहम बात यह है कि गडकरी ने अपने बयान में राजनीतिक संन्यास की बात नहीं कही है। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि अब वह पहले की तरह ज्यादा काम नहीं कर पाते और नई पीढ़ी को आगे आने का मौका मिलना चाहिए। इसलिए फिलहाल उनके बयान को लेकर चल रही संन्यास की चर्चा **अटकलों पर आधारित है, कोई आधिकारिक फैसला नहीं।
अब गडकरी के बयान पर सबकी नजर
नितिन गडकरी लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं और भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। ऐसे में उनका नई पीढ़ी को जिम्मेदारी देने वाला बयान निश्चित तौर पर ध्यान खींचता है। लेकिन उन्होंने खुद राजनीति छोड़ने की बात नहीं कही है। अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा यही है कि गडकरी का यह बयान केवल संगठन और समाज में पीढ़ीगत बदलाव की सामान्य बात है या इसके पीछे भविष्य की कोई बड़ी योजना भी है।
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