By Malay Ojha | Published: 25 August 2026 at 04:13 PM
वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिए जाने वाले दान और मंदिर के धन के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मंदिर की आय और प्रबंधन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही पर जोर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के कामकाज की निगरानी के लिए उच्चस्तरीय समिति भी गठित की है, जिसका उद्देश्य मंदिर की व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाना है।
सुप्रीम कोर्ट के सामने बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन और विकास से जुड़े कई मामले आए थे। अदालत ने मंदिर की व्यवस्था को लेकर सामने आई समस्याओं को गंभीरता से लिया। न्यायालय ने कहा कि मंदिर को मिलने वाली बड़ी राशि का इस्तेमाल श्रद्धालुओं की सुविधाओं और मंदिर की जरूरतों के अनुरूप पारदर्शी तरीके से होना चाहिए।
मंदिर की आय और व्यवस्था पर बनेगी निगरानी
अदालत ने मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज की निगरानी के लिए पूर्व इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अशोक कुमार की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की। समिति में प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों के साथ मंदिर से जुड़े प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है।
श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर भी जोर
सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित समिति को केवल धन और प्रबंधन देखने तक सीमित नहीं रखा गया है। उसे मंदिर और उसके आसपास श्रद्धालुओं के लिए साफ पानी, शौचालय, पर्याप्त आश्रय, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा जैसी सुविधाओं पर भी ध्यान देने की जिम्मेदारी दी गई है।
मंदिर में आने वाले दान का हिसाब जरूरी
अदालत के रुख से साफ है कि मंदिर में आने वाले धन के इस्तेमाल को लेकर किसी तरह की अस्पष्टता नहीं रहनी चाहिए। दान की रकम कहां से आई, उसका इस्तेमाल किस काम में हुआ और मंदिर की जरूरतों पर कितना पैसा खर्च किया गया, इन सभी पहलुओं में जवाबदेही जरूरी है।
मंदिर के पैसे को लेकर अदालत पहले भी कर चुकी है टिप्पणी
मंदिर की संपत्ति और धन के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अलग-अलग मामलों में भी यह बात स्पष्ट की है कि धार्मिक संस्थानों की रकम का इस्तेमाल निजी हितों को बढ़ाने के लिए नहीं किया जा सकता। दिसंबर 2025 में एक अन्य मंदिर मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की थी कि मंदिर का पैसा देवता का है और उसका इस्तेमाल किसी निजी संस्था को फायदा पहुंचाने के लिए नहीं होना चाहिए।
बांके बिहारी मंदिर में बड़ी संख्या में पहुंचते हैं श्रद्धालु
वृंदावन का बांके बिहारी मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां पूरे साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। त्योहारों और विशेष अवसरों पर भीड़ और बढ़ जाती है। ऐसे में मंदिर की व्यवस्था, सुरक्षा, दान और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर लगातार बेहतर प्रबंधन की जरूरत रहती है।
मंदिर की व्यवस्था को लेकर लंबे समय से विवाद
बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन को लेकर लंबे समय से अलग-अलग पक्षों के बीच विवाद रहा है। मंदिर के प्रशासन को लेकर पुराने प्रबंधकीय ढांचे और नई व्यवस्था के बीच मतभेद भी अदालत तक पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट के सामने भी मंदिर के प्रबंधन से जुड़े कई मामले विचाराधीन रहे हैं।
मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता पर जोर
अदालत ने मंदिर की व्यवस्था को लेकर स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए और मंदिर से जुड़े कामकाज में पारदर्शिता बनी रहनी चाहिए। मंदिर में आने वाले चढ़ावे और अन्य आय का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है, इसकी निगरानी जरूरी है।
मंदिर के विकास की योजना पर भी ध्यान
मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने बांके बिहारी मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र के समग्र विकास की योजना तैयार करने का निर्देश उत्तर प्रदेश सरकार को दिया था। इसमें सड़क चौड़ीकरण, व्यावसायिक गतिविधियों का नियमन, होटल और धर्मशाला, पेयजल, शौचालय, आपात निकास और सार्वजनिक परिवहन जैसी सुविधाओं को शामिल करने को कहा गया था।
भीड़ प्रबंधन भी बड़ी चुनौती
बांके बिहारी मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए भीड़ प्रबंधन अदालत की प्राथमिकताओं में रहा है। उच्चस्तरीय समिति को भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी दी गई है, खासकर उन दिनों में जब मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मंदिर की संपत्ति के इस्तेमाल पर भी नजर
मंदिर के धन और संपत्ति से जुड़े फैसलों को लेकर भी अदालत ने सावधानी बरतने पर जोर दिया है। मंदिर की संपत्ति या धन से जुड़े बड़े फैसलों में पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया का पालन जरूरी माना गया है। इसका मकसद मंदिर की संपत्ति को किसी भी तरह के विवाद या गलत इस्तेमाल से बचाना है।
दान करने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी अहम संदेश
अदालत के रुख का सीधा असर मंदिर में दान करने वाले श्रद्धालुओं के भरोसे से भी जुड़ा है। जब कोई श्रद्धालु मंदिर में चढ़ावा या दान देता है तो उसकी उम्मीद होती है कि रकम मंदिर और धार्मिक व्यवस्था के काम आएगी। ऐसे में दान की व्यवस्था स्पष्ट और जवाबदेह होना जरूरी है।
समिति मंदिर की रोजमर्रा की व्यवस्था देखेगी
सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित समिति मंदिर के अंदर और बाहर की रोजमर्रा की व्यवस्था की निगरानी करेगी। इसमें प्रशासनिक कामकाज, श्रद्धालुओं की सुविधाएं, भीड़ नियंत्रण और मंदिर के आसपास विकास से जुड़े विषय शामिल हैं।
आगे भी अदालत की नजर रहेगी
बांके बिहारी मंदिर से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी का मुख्य उद्देश्य मंदिर की धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाना है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि मंदिर की आवश्यक धार्मिक परंपराओं और पूजा-पद्धति से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।
श्रद्धालुओं के भरोसे को बनाए रखना सबसे जरूरी
बांके बिहारी मंदिर में दान और मंदिर की संपत्ति से जुड़े विवादों के बीच अदालत का जोर इसी बात पर है कि व्यवस्था ऐसी हो जिसमें श्रद्धालुओं का भरोसा बना रहे। मंदिर की आय का पारदर्शी प्रबंधन, सुविधाओं में सुधार और जवाबदेही तय करना आने वाले समय में सबसे अहम मुद्दों में रहेगा।
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