By Malay Ojha | Published: 25 August 2026 at 04:31 PM
बिहार में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को जमीनी स्तर पर तेज करने की तैयारी शुरू हो गई है। मंगलवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को काम की रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दिए गए। सरकार ने अक्टूबर 2026 तक 2.5 लाख रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही नवंबर तक योजना के निर्धारित लक्ष्यों को हर हाल में पूरा करने पर जोर दिया गया है। ([sangamtv.com][1])
समीक्षा बैठक में जिला-वार प्रगति, घरों की छतों पर सोलर संयंत्र लगाने की स्थिति, संयंत्रों की गुणवत्ता और काम कर रही एजेंसियों के प्रदर्शन की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि केवल कागजी प्रगति के बजाय जमीन पर काम दिखाई देना चाहिए और पात्र परिवारों तक योजना का लाभ तेजी से पहुंचना चाहिए।
एजेंसियों की जिम्मेदारी होगी तय
बैठक में यह भी साफ किया गया कि योजना में काम कर रही एजेंसियों की जिम्मेदारी केवल संयंत्र लगाने तक सीमित नहीं होगी। उन्हें अपने-अपने आवंटित क्षेत्रों में पात्र परिवारों तक पहुंचकर काम पूरा करना होगा। ऊर्जा विभाग को एजेंसियों के काम की लगातार निगरानी करने और लक्ष्य पूरा नहीं होने पर जवाबदेही तय करने को कहा गया है।
हर जिले की प्रगति पर रहेगी नजर
योजना की प्रगति को लेकर जिलावार निगरानी की व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिले में रूफटॉप सोलर लगाने के काम की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे यह पता चलता रहेगा कि किस जिले में काम तेज है और कहां एजेंसियों को अतिरिक्त प्रयास की जरूरत है।
अगले सोमवार तक सैचुरेशन पर जोर
समीक्षा बैठक के बाद ऊर्जा सचिव और बिजली कंपनी के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय यादव ने योजना से जुड़ी एजेंसियों के प्रतिनिधियों के साथ अलग बैठक की। उन्होंने एजेंसियों को आवंटित जिलों में अगले सोमवार तक अधिक से अधिक पात्र लाभुकों तक योजना पहुंचाने और क्षेत्र में सैचुरेशन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
काम में ढिलाई पर होगी कार्रवाई
ऊर्जा सचिव ने अधिकारियों और एजेंसियों की जवाबदेही स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि हर एजेंसी के काम की नियमित समीक्षा हो। तय लक्ष्य के मुताबिक काम नहीं करने वाली एजेंसियों के प्रदर्शन की समीक्षा कर जिम्मेदारी तय की जाएगी और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई भी की जाएगी।
रूफटॉप सोलर की गुणवत्ता भी जांच के दायरे में
सिर्फ सोलर संयंत्रों की संख्या बढ़ाना ही सरकार का लक्ष्य नहीं है। समीक्षा बैठक में संयंत्रों की गुणवत्ता को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनाया गया। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि घरों पर लगाए जा रहे सोलर संयंत्र निर्धारित मानकों के अनुरूप हों और लाभुकों को घटिया या खराब उपकरणों की वजह से परेशानी न हो।
जिलाधिकारियों को भी मिली जिम्मेदारी
योजना के सफल क्रियान्वयन में जिलाधिकारियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रखी गई है। उन्हें अपने जिले में संबंधित विभागों, बिजली कंपनियों और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल कराने को कहा गया है। स्थानीय स्तर पर आने वाली दिक्कतों को दूर कर काम को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया।
बिहार में 2.5 लाख घरों पर सोलर लगाने की बड़ी पहल
बिहार सरकार ने 2.5 लाख कुटीर ज्योति उपभोक्ताओं के घरों की छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का बड़ा अभियान शुरू किया है। जून में मुख्यमंत्री ने इस अभियान का शुभारंभ किया था। इसके लिए करीब 1,512 करोड़ रुपये की लागत निर्धारित की गई है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराना और सौर बिजली का इस्तेमाल बढ़ाना है।
125 यूनिट तक मुफ्त बिजली से जुड़ी योजना
इस पहल को बिहार में मुफ्त बिजली की व्यवस्था से भी जोड़ा गया है। राज्य सरकार के मुताबिक रूफटॉप सोलर के जरिए पात्र परिवार अपनी बिजली की जरूरत का बड़ा हिस्सा खुद पूरा कर सकेंगे। इससे बिजली पर होने वाला खर्च कम करने के साथ स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी। ([gidhaur.com][3])
केंद्र की मदद के साथ राज्य से भी अतिरिक्त सहायता
बिहार सरकार ने योजना को आकर्षक बनाने के लिए केंद्र की सहायता के अतिरिक्त राज्य स्तर पर भी आर्थिक मदद देने का फैसला किया है। राज्य सरकार की ओर से प्रति किलोवाट 10 हजार रुपये और अधिकतम 20 हजार रुपये तक की अतिरिक्त सहायता देने का प्रावधान किया गया है। अगस्त 2026 में राज्य मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
3 किलोवाट तक संयंत्र पर बड़ी मदद
राज्य और केंद्र की सहायता को मिलाकर पात्र परिवारों को रूफटॉप सोलर लगाने में काफी आर्थिक राहत मिल सकती है। केंद्र की मौजूदा योजना में 1 किलोवाट पर 30 हजार, 2 किलोवाट पर 60 हजार और 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता पर अधिकतम 78 हजार रुपये तक केंद्रीय सहायता का प्रावधान है। बिहार की अतिरिक्त सहायता जोड़ने पर 3 किलोवाट के संयंत्र पर कुल सहायता 98 हजार रुपये तक पहुंच सकती है।
योजना की रफ्तार बढ़ाना बनी बड़ी चुनौती
सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती तय समय में लक्ष्य पूरा करने की है। हाल की रिपोर्टों के मुताबिक नवंबर के लक्ष्य के मुकाबले अब तक योजना की प्रगति काफी पीछे चल रही थी। इसी वजह से जिलों, एजेंसियों और बिजली विभाग के स्तर पर निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
गांव-गांव तक पहुंचाने की तैयारी
सरकार की कोशिश है कि योजना की जानकारी सिर्फ शहरों तक सीमित न रहे। पात्र परिवारों की पहचान कर उन्हें आवेदन और संयंत्र स्थापना की प्रक्रिया से जोड़ने के लिए स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे अधिक परिवार योजना का लाभ ले सकेंगे और तय लक्ष्य तक पहुंचना आसान होगा।
एजेंसियों के प्रदर्शन की होगी लगातार समीक्षा
योजना को लागू करने वाली एजेंसियों के प्रदर्शन को अब नियमित निगरानी से जोड़ा गया है। किस एजेंसी को कितना काम दिया गया, कितने घरों में संयंत्र लगाया गया और काम की गुणवत्ता कैसी रही—इन सभी बिंदुओं पर नजर रखने की व्यवस्था की जा रही है। लक्ष्य से पीछे रहने वाली एजेंसियों से जवाब भी मांगा जाएगा।
बिहार में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की कोशिश
पीएम सूर्य घर योजना के जरिए बिहार सरकार घरों की छतों को बिजली उत्पादन का माध्यम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इससे एक तरफ परिवारों को बिजली खर्च में राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ राज्य में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ेगा।
नवंबर तक लक्ष्य पूरा करने का निर्देश
मुख्य सचिव की समीक्षा बैठक का सबसे अहम संदेश यही रहा कि योजना को अब और धीमा नहीं पड़ने दिया जाएगा। अक्टूबर तक 2.5 लाख रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाने की दिशा में तेजी से काम करने और नवंबर 2026 तक निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने का निर्देश दिया गया है। आने वाले हफ्तों में जिलावार प्रगति और एजेंसियों के प्रदर्शन पर विशेष नजर रहेगी।
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