By Malay Ojha | Published: 28 August 2026 at 10:33 PM
एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के आरोपों पर रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शुक्रवार को कड़ा जवाब दिया है। रिलायंस ने 28 अगस्त को जारी आधिकारिक बयान में चंद्रा की टिप्पणियों को निराधार बताया और कहा कि उसके मीडिया ब्रांड्स का इस्तेमाल कभी किसी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाने के लिए नहीं किया गया। यह विवाद चंद्रा के व्यक्तिगत दिवालियापन मामले को लेकर सामने आए बयानों के बाद तेज हुआ है।
रिलायंस ने अपने बयान में कहा कि सुभाष चंद्रा की टिप्पणियों और उनके जरिए लगाए गए संकेतों पर उसे निराशा हुई है। कंपनी ने अपने मीडिया संस्थानों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि उसके मीडिया ब्रांड्स का इस्तेमाल किसी पर हमला करने के लिए न पहले किया गया है और न ही आगे किया जाएगा।
सुभाष चंद्रा के लिए सम्मान भी जताया
कड़े खंडन के बावजूद रिलायंस ने सुभाष चंद्रा के प्रति व्यक्तिगत सम्मान का रुख बनाए रखा। कंपनी ने उन्हें उद्योगपति और उद्यमी के तौर पर सम्मान देने की बात कही और उनके बेहतर भविष्य की कामना की। इस तरह कंपनी ने आरोपों का जवाब देने के साथ विवाद को और आगे बढ़ाने से भी परहेज किया है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद
दरअसल, सुभाष चंद्रा ने अपने व्यक्तिगत दिवालियापन मामले से जुड़ी खबरों को लेकर कुछ मीडिया संस्थानों पर सवाल उठाए थे। उनकी ओर से कहा गया था कि उनके खिलाफ दावों की रकम और एनसीएलटी में हुई कार्रवाई को लेकर गलत तस्वीर पेश की जा रही है। चंद्रा ने दावा किया था कि संबंधित दावे करीब 3,992 करोड़ रुपये के हैं, जबकि 22,006 करोड़ रुपये का आंकड़ा अलग-अलग दावों से जुड़ा है।
₹22,006 करोड़ के दावे ने बढ़ाई चर्चा
विवाद का दूसरा बड़ा पहलू एनसीएलटी की ओर से मंजूर समाधान योजना है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, चंद्रा के व्यक्तिगत दिवालियापन मामले में करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकार किए गए दावों के मुकाबले 6.25 करोड़ रुपये का भुगतान प्रस्ताव मंजूर हुआ है। इस आधार पर कई रिपोर्टों में करीब 99.97 प्रतिशत के ‘हेयरकट’ की चर्चा हुई।
यह रकम चंद्रा का निजी कर्ज नहीं
हालांकि, इस आंकड़े को लेकर एक अहम स्पष्टीकरण भी सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार 22,006 करोड़ रुपये का आंकड़ा चंद्रा के नाम पर व्यक्तिगत रूप से लिए गए कर्ज का सीधा आंकड़ा नहीं है। यह उन दावों से जुड़ा है जिनमें उन्होंने कंपनियों के कर्ज के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी। इसी वजह से इस मामले को केवल चंद्रा के निजी कर्ज के रूप में देखना सही तस्वीर नहीं देता।
विवेक इन्फ्राकॉन के कर्ज से जुड़ा मामला
यह दिवालियापन कार्यवाही उस व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ी है, जो सुभाष चंद्रा ने विवेक इन्फ्राकॉन द्वारा लिए गए कर्ज के लिए दी थी। कर्ज में चूक के बाद ऋणदाता की ओर से चंद्रा के खिलाफ व्यक्तिगत दिवालियापन की प्रक्रिया शुरू की गई थी। मामला वर्ष 2022 से एनसीएलटी के समक्ष चल रहा था।
80.81 प्रतिशत वोटिंग शेयर से मिली मंजूरी
एनसीएलटी की दिल्ली पीठ में मामले पर शुरुआती फैसला बंटा हुआ था। बाद में मामला न्यायिक सदस्य नीलेश शर्मा के पास गया और समाधान योजना को मंजूरी मिली। रिपोर्टों के मुताबिक, योजना को 80.81 प्रतिशत वोटिंग हिस्सेदारी वाले ऋणदाताओं का समर्थन मिला। योजना के तहत चंद्रा की ओर से 6.25 करोड़ रुपये और कॉरपोरेट उधारकर्ताओं से करीब 1,494 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद जताई गई है।
ऋणदाताओं की आपत्तियों से मामला और गरम
समाधान योजना को लेकर कुछ बड़े ऋणदाताओं ने आपत्ति जताई है। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस और एचडीएफसी बैंक समेत कुछ संस्थानों ने इस फैसले को चुनौती देने की तैयारी की है। ऐसे में सुभाष चंद्रा के बयान और रिलायंस के जवाब के बीच यह मामला अब केवल मीडिया विवाद तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि एनसीएलटी के फैसले और ऋणदाताओं की वसूली से भी जुड़ गया है।
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