By aryavartalive | Published: 29 August 2026 at 12:18 PM
नेपाल में लगातार बिगड़ते हालात के बीच अब बिहार में भी बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। तिब्बत-नेपाल सीमा पर एक और अस्थायी झील के फटने की खबर के बाद बिहार सरकार ने उत्तर बिहार में निगरानी और बढ़ा दी है। गंडक और कोसी बराज समेत संवेदनशील तटबंधों पर अधिकारियों और इंजीनियरों की टीमों को चौबीसों घंटे नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
नेपाल से आने वाले अतिरिक्त पानी को तेजी से निकालने के लिए वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं। बराज पर तकनीकी टीम लगातार स्थिति पर नजर रख रही है। अधिकारियों के मुताबिक नेपाल में बाढ़ के बाद गंडक नदी के प्रवाह पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
कोसी बराज पर भी बढ़ाई गई निगरानी
वीरपुर स्थित कोसी बराज के फाटकों से भी पानी छोड़ा जा रहा है। जल संसाधन विभाग लगातार डिस्चार्ज और नदी के जलस्तर की जानकारी ले रहा है। विभाग के स्तर पर नियमित अंतराल पर अपडेट लिया जा रहा है, जबकि संबंधित जिलों के अधिकारियों को तटबंधों की खुद निगरानी करने को कहा गया है।
तटबंधों पर इंजीनियरों की टीम तैनात
नेपाल से आने वाले पानी के साथ मलबा आने की आशंका को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। मुख्यालय स्तर से अधिकारियों और इंजीनियरों की विशेष टीमें लगाई गई हैं। सारण तटबंध समेत उत्तर बिहार के दूसरे संवेदनशील तटबंधों पर भी गश्त बढ़ाई गई है।
सरकार ने कहा- घबराने की जरूरत नहीं
बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि नेपाल में जिस जगह ग्लेशियर से जुड़ी घटना हुई है, वह वाल्मीकिनगर से करीब 250 से 300 किलोमीटर दूर है। इतनी दूरी तय करने के दौरान पानी का वेग कम होता है। उन्होंने कहा कि घटना के समय गंडक का जलस्तर भी सामान्य से नीचे था, जिससे बिहार में स्थिति ज्यादा गंभीर नहीं बनी।
नेपाल से आने वाली नदियों पर नजर
नेपाल की पहाड़ियों से निकलने वाली गंडक, त्रिशूली, भोटेकोशी और नारायणी जैसी नदियां उत्तर बिहार के कई जिलों के लिए संवेदनशील मानी जाती हैं। नेपाल में अचानक आने वाली बाढ़ का असर पश्चिम चंपारण, गोपालगंज, सारण और आसपास के इलाकों में पड़ सकता है। इसी वजह से प्रशासन पहले से ही सतर्कता बरत रहा है।
हाल की बाढ़ ने बढ़ाई चिंता
26 अगस्त को नेपाल में ग्लेशियर से जुड़ी घटना के बाद अचानक आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। इसके बाद भारत-नेपाल सीमा से लगे बिहार के जिलों में भी अलर्ट जारी किया गया। गंडक में पानी बढ़ने की आशंका के चलते प्रशासन ने निगरानी और राहत-बचाव की तैयारियां तेज कर दी थीं।
अभी सबसे ज्यादा नजर गंडक पर
फिलहाल बिहार में प्रशासन की सबसे ज्यादा नजर गंडक नदी और वाल्मीकिनगर बराज पर है। सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर तत्काल कदम उठाए जाएंगे। ऐसे में उत्तर बिहार के नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए आने वाले घंटों में प्रशासन के अलर्ट पर नजर रखना जरूरी होगा।
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