By Malay Ojha | Published: 29 August 2026 at 09:55 AM
दिल्ली-NCR में CNG से वाहन चलाने वालों की जेब पर एक बार फिर बोझ बढ़ गया है।** इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने CNG की कीमत में ₹3.89 प्रति किलो की बढ़ोतरी कर दी है। नई कीमतें शनिवार, 29 अगस्त सुबह 6 बजे से लागू हो गई हैं। दिल्ली में CNG का भाव अब ₹86.98 प्रति किलो हो गया है, जो पहले ₹83.09 था।
नई बढ़ोतरी के बाद नोएडा और गाजियाबाद में CNG ₹95.59 प्रति किलो हो गई है। वहीं मेरठ में इसका नया भाव ₹95.47 और गुरुग्राम में ₹92.01 प्रति किलो है। अलग-अलग राज्यों में टैक्स और स्थानीय लागत अलग होने के कारण शहरों के हिसाब से CNG की कीमत में अंतर है।
इस साल पांचवीं बार बढ़े CNG के दाम
यह 2026 में CNG की कीमत में पांचवीं बढ़ोतरी है। इससे पहले मई में IGL ने करीब 10 दिनों के भीतर चार चरणों में कीमत कुल ₹6 प्रति किलो बढ़ाई थी। मई के बाद यह पहली बढ़ोतरी है। ताजा फैसले से दिल्ली-NCR में CNG से चलने वाले निजी और व्यावसायिक वाहनों का खर्च बढ़ना तय है।
LNG महंगी होने से बढ़ी गैस की लागत
IGL के मुताबिक CNG के लिए इस्तेमाल होने वाली गैस का एक बड़ा हिस्सा आयातित LNG से पूरा होता है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और गैस की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज उछाल से कंपनी की इनपुट लागत बढ़ी है। IGL ने कहा है कि बढ़ी लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालने के लिए ₹3.89 प्रति किलो की बढ़ोतरी जरूरी हो गई थी।
ऑटो-टैक्सी से लेकर माल ढुलाई तक असर
CNG की कीमत बढ़ने का सीधा असर ऑटो, टैक्सी, कैब और दूसरे कमर्शियल वाहनों पर पड़ सकता है। इन वाहनों का ईंधन खर्च बढ़ने के बाद किराया बढ़ाने की मांग भी उठ सकती है। माल ढोने वाले CNG वाहनों की लागत बढ़ने से परिवहन खर्च पर भी असर पड़ने की संभावना है।
आम लोगों की जेब पर कैसे पड़ेगा असर?
परिवहन लागत बढ़ने का असर रोजमर्रा की कई चीजों पर पड़ सकता है। दूसरे राज्यों से दिल्ली-NCR आने वाली सब्जियों, फलों और अन्य सामान की ढुलाई महंगी होने पर इनके दाम बढ़ने का दबाव बन सकता है। हालांकि, CNG की कीमत बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर वस्तु के दाम तुरंत बढ़ जाएंगे; इसका असर परिवहन लागत और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
हॉर्मुज संकट ने बढ़ाई ऊर्जा बाजार की चिंता
अंतरराष्ट्रीय LNG बाजार में कीमतों पर पश्चिम एशिया का तनाव असर डाल रहा है। हॉर्मुज स्ट्रेट से जुड़े व्यवधान और अनिश्चितता ने तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ाई है। IGL ने भी बढ़ी हुई अंतरराष्ट्रीय LNG कीमतों को अपने फैसले की प्रमुख वजह बताया है।
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