By Malay Ojha | Published: 29 August 2026 at 10:50 PM
न्यूयॉर्क: अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने धर्म और इंसानियत को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग धर्मों के रास्ते भले ही अलग हों, लेकिन उनका मकसद सत्य तक पहुंचना है। भागवत ने साफ कहा कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा।
मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय समाज की पारंपरिक सोच यह रही है कि धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत एक है। सत्य एक है और इंसानियत उसी सत्य से निकलती है। उनके मुताबिक हर इंसान की अपनी गरिमा है और लोगों के बीच किसी तरह का भेद नहीं होना चाहिए।
मुस्लिमों के सवाल का दिया उदाहरण
भागवत ने अपने एक पुराने संवाद का जिक्र करते हुए कहा कि एक कार्यक्रम में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उनसे पूछा था कि अगर आरएसएस हिंदू संगठन है और हिंदू राष्ट्र की बात करता है तो भारत में मुसलमानों का क्या होगा। उन्होंने जवाब दिया था कि किसी मुस्लिम को भारत से बाहर करने की सोच हिंदुत्व नहीं है। उनके मुताबिक ऐसी सोच रखने वाला व्यक्ति हिंदू नहीं रह सकता।
धर्म की पहचान सिर्फ रीति-रिवाज नहीं
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि आज धर्मों की पहचान अक्सर उनके रीति-रिवाजों से की जाती है। उन्होंने माना कि धार्मिक अनुशासन और परंपराएं जरूरी हैं, लेकिन धर्म का असली मकसद इंसान को सत्य और दिव्यता की ओर ले जाना है।
‘उंगली नहीं, रोशनी को देखना होगा’
भागवत ने इसे समझाने के लिए उंगली और रोशनी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब कोई किसी दिशा में रोशनी दिखाता है तो हमारा ध्यान रोशनी की ओर होना चाहिए, सिर्फ उंगली पर नहीं। इसी तरह धर्म के बाहरी तौर-तरीकों से आगे बढ़कर उसके असली उद्देश्य को समझना जरूरी है।
राजनीति को प्रभावित करने की बात
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि संगठन नीतियां बनने से पहले उन्हें सही दिशा में प्रभावित करना चाहता है। उन्होंने कहा कि आरएसएस युद्ध रोकने समेत कई ऐसे काम करना चाहता है और इसके लिए राजनीति को सक्रिय रूप से प्रभावित करना जरूरी होगा। उन्होंने संकेत दिया कि संगठन को किसी न किसी समय इस दिशा में आगे बढ़ना ही होगा।
न्यूयॉर्क में कार्यक्रम को लेकर रही चर्चा
‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ का आयोजन 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में हुआ। आयोजकों के मुताबिक कार्यक्रम का मकसद अलग-अलग समुदायों के बीच एकता और संवाद का संदेश देना था। इसमें मोहन भागवत मुख्य वक्ताओं में शामिल रहे। कार्यक्रम को लेकर न्यूयॉर्क में समर्थन के साथ विरोध भी देखने को मिला और कई संगठनों ने भागवत की मौजूदगी पर सवाल उठाए।
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

