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चीन ने बाढ़ की तबाही के वीडियो क्यों हटाए? नेपाल-तिब्बत में 676 मौतें, 3 हजार लोग लापता

By Malay Ojha | Published: 30 August 2026 at 11:21 AM

नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 676 लोगों की मौत की खबर है, जबकि करीब 3,000 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस बीच चीन पर तिब्बत में बाढ़ की असली तस्वीर दुनिया के सामने आने से रोकने का आरोप लगा है। रिपोर्टों के मुताबिक, बाढ़ और भूस्खलन के कई वीडियो चीनी सोशल मीडिया से हटा दिए गए।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में बॉर्डर क्रॉसिंग पर आई मलबे और पानी की तेज लहर का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। इसमें लोग जान बचाने के लिए भागते दिखाई दे रहे थे। कुछ समय बाद यह वीडियो चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से गायब हो गया। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने सैटेलाइट और दूसरे उपलब्ध सबूतों के आधार पर वीडियो की पुष्टि की है।

सरकारी मीडिया में राहत पर ज्यादा जोर
रिपोर्टों के अनुसार, चीन के सरकारी मीडिया में बाढ़ के बाद चल रहे राहत और बचाव अभियान को प्रमुखता दी जा रही है। सेना के जवानों, राहतकर्मियों, ड्रोन और हेलिकॉप्टरों को प्रभावित इलाकों में भेजे जाने की जानकारी दी गई है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी ग्यिरोंग में प्रभावित लोगों की मदद के लिए हरसंभव प्रयास करने का निर्देश दिया है।

तबाही की पूरी तस्वीर पर उठ रहे सवाल
विदेशी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि तिब्बत में बाढ़ से हुए नुकसान की स्वतंत्र जानकारी जुटाना आसान नहीं है। विदेशी पत्रकारों के लिए प्रभावित इलाकों तक पहुंच और स्थानीय लोगों से सीधे बातचीत करने में कई तरह की पाबंदियां सामने आ रही हैं। ऐसे में चीन के बाहर बैठे लोगों के लिए तिब्बत में हुई तबाही की पूरी तस्वीर सामने लाना मुश्किल हो रहा है।

चीन पर वीडियो हटाने के आरोप
रिपोर्टों में कहा गया है कि स्थानीय लोगों ने बाढ़ और भूस्खलन के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए थे। इनमें ग्यिरोंग बॉर्डर पोर्ट पर पानी और मलबे की भयावह तस्वीरें भी थीं। कुछ वीडियो और स्थानीय रिपोर्ट बाद में ऑनलाइन दिखाई देना बंद हो गए। चीन के सरकारी मीडिया ने भी कथित तौर पर वीडियो के बजाय उसकी तस्वीर का इस्तेमाल किया।

नेपाल में सबसे ज्यादा तबाही
नेपाल की आपदा एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक, देश में 669 लोगों की मौत हुई है और 2,426 लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव दल अब तक 3,700 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाल चुके हैं। दूसरी ओर, चीन ने तिब्बत में शुरुआती तौर पर सात मौतों और 550 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी दी थी। ताजा रिपोर्टों में चीन की ओर से मौतों का आंकड़ा बढ़कर 16 बताया गया है, जबकि 546 लोग अब भी लापता हैं।

ग्लेशियर टूटने से आई थी तबाही
अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे समेत वैज्ञानिक आकलनों के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई जानलेवा पानी और मलबे की लहर ग्लेशियर के टूटने से शुरू हुई थी। इसने पहाड़ी इलाकों में भारी तबाही मचाई और पानी के साथ बड़ी मात्रा में मलबा नीचे की ओर बह गया।

सूचना पर नियंत्रण ने बढ़ाई चिंता
तिब्बत पहले से ही चीन के सबसे संवेदनशील और कड़े नियंत्रण वाले क्षेत्रों में माना जाता है। ऐसे में बाढ़ जैसी बड़ी आपदा के दौरान वीडियो और स्थानीय जानकारी के ऑनलाइन हटने की खबरों ने पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। दूसरी तरफ, नेपाल में पत्रकारों और राहत एजेंसियों को प्रभावित इलाकों से जानकारी जुटाने की अपेक्षाकृत ज्यादा स्वतंत्रता मिल रही है।

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चीन ने बाढ़ की तबाही के वीडियो क्यों हटाए? नेपाल-तिब्बत में 676 मौतें, 3 हजार लोग लापता

By Malay Ojha | Published: 30 August 2026 at 11:21 AM

नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 676 लोगों की मौत की खबर है, जबकि करीब 3,000 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस बीच चीन पर तिब्बत में बाढ़ की असली तस्वीर दुनिया के सामने आने से रोकने का आरोप लगा है। रिपोर्टों के मुताबिक, बाढ़ और भूस्खलन के कई वीडियो चीनी सोशल मीडिया से हटा दिए गए।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में बॉर्डर क्रॉसिंग पर आई मलबे और पानी की तेज लहर का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। इसमें लोग जान बचाने के लिए भागते दिखाई दे रहे थे। कुछ समय बाद यह वीडियो चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से गायब हो गया। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने सैटेलाइट और दूसरे उपलब्ध सबूतों के आधार पर वीडियो की पुष्टि की है।

सरकारी मीडिया में राहत पर ज्यादा जोर
रिपोर्टों के अनुसार, चीन के सरकारी मीडिया में बाढ़ के बाद चल रहे राहत और बचाव अभियान को प्रमुखता दी जा रही है। सेना के जवानों, राहतकर्मियों, ड्रोन और हेलिकॉप्टरों को प्रभावित इलाकों में भेजे जाने की जानकारी दी गई है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी ग्यिरोंग में प्रभावित लोगों की मदद के लिए हरसंभव प्रयास करने का निर्देश दिया है।

तबाही की पूरी तस्वीर पर उठ रहे सवाल
विदेशी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि तिब्बत में बाढ़ से हुए नुकसान की स्वतंत्र जानकारी जुटाना आसान नहीं है। विदेशी पत्रकारों के लिए प्रभावित इलाकों तक पहुंच और स्थानीय लोगों से सीधे बातचीत करने में कई तरह की पाबंदियां सामने आ रही हैं। ऐसे में चीन के बाहर बैठे लोगों के लिए तिब्बत में हुई तबाही की पूरी तस्वीर सामने लाना मुश्किल हो रहा है।

चीन पर वीडियो हटाने के आरोप
रिपोर्टों में कहा गया है कि स्थानीय लोगों ने बाढ़ और भूस्खलन के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए थे। इनमें ग्यिरोंग बॉर्डर पोर्ट पर पानी और मलबे की भयावह तस्वीरें भी थीं। कुछ वीडियो और स्थानीय रिपोर्ट बाद में ऑनलाइन दिखाई देना बंद हो गए। चीन के सरकारी मीडिया ने भी कथित तौर पर वीडियो के बजाय उसकी तस्वीर का इस्तेमाल किया।

नेपाल में सबसे ज्यादा तबाही
नेपाल की आपदा एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक, देश में 669 लोगों की मौत हुई है और 2,426 लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव दल अब तक 3,700 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाल चुके हैं। दूसरी ओर, चीन ने तिब्बत में शुरुआती तौर पर सात मौतों और 550 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी दी थी। ताजा रिपोर्टों में चीन की ओर से मौतों का आंकड़ा बढ़कर 16 बताया गया है, जबकि 546 लोग अब भी लापता हैं।

ग्लेशियर टूटने से आई थी तबाही
अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे समेत वैज्ञानिक आकलनों के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई जानलेवा पानी और मलबे की लहर ग्लेशियर के टूटने से शुरू हुई थी। इसने पहाड़ी इलाकों में भारी तबाही मचाई और पानी के साथ बड़ी मात्रा में मलबा नीचे की ओर बह गया।

सूचना पर नियंत्रण ने बढ़ाई चिंता
तिब्बत पहले से ही चीन के सबसे संवेदनशील और कड़े नियंत्रण वाले क्षेत्रों में माना जाता है। ऐसे में बाढ़ जैसी बड़ी आपदा के दौरान वीडियो और स्थानीय जानकारी के ऑनलाइन हटने की खबरों ने पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। दूसरी तरफ, नेपाल में पत्रकारों और राहत एजेंसियों को प्रभावित इलाकों से जानकारी जुटाने की अपेक्षाकृत ज्यादा स्वतंत्रता मिल रही है।

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