By Malay Ojha | Published: 02 September 2026 at 08:29 PM
वाराणसी के सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में बुधवार को सावन का रंग कुछ अलग नजर आया। विश्वविद्यालय के मुख्य भवन सभागार में महिला अध्ययन केन्द्र की ओर से ‘सावन उत्सव-2026’ का आयोजन किया गया। लोकगीत, कजरी, नृत्य और पारंपरिक प्रतियोगिताओं के बीच महिलाओं की बड़ी भागीदारी ने कार्यक्रम को खास बना दिया।
कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता और मार्गदर्शन में हुए कार्यक्रम में भारतीय लोकपरम्पराओं और नारी शक्ति को केंद्र में रखा गया। कुलपति ने कहा कि सावन केवल मौसम और त्योहार का समय नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, लोकजीवन और हमारी परम्पराओं से जुड़ा अवसर भी है। महिलाओं ने पीढ़ियों से लोकगीतों और पर्व-त्योहारों के जरिए इन परम्पराओं को आगे बढ़ाया है।
महिलाओं की भूमिका को बताया अहम
प्रो. शर्मा ने कहा कि भारतीय परिवार और समाज में महिलाओं की भूमिका केवल घर तक सीमित नहीं रही है। उन्होंने लोकगीतों, व्रत, पूजा और पारंपरिक आयोजनों के माध्यम से संस्कृति और संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का काम करते हैं।
लोकगीतों में सुरक्षित है लोकजीवन की कहानी
मुख्य अतिथि बसन्ता महाविद्यालय, राजघाट की गृहविज्ञान एवं इंटीरियर डिजाइनर प्रो. आम्रपाली त्रिवेदी ने कहा कि लोकगीत हमारी संस्कृति और संस्कारों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनमें परिवार, रिश्ते, सामाजिक परम्पराएं और रोजमर्रा के जीवन की भावनाएं दिखाई देती हैं। बदलते समय में इन गीतों और परम्पराओं को बचाए रखना जरूरी है।
लोकसंगीत हमारी पहचान को मजबूत करता है
राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, चौकाघाट की पूर्व प्राचार्या प्रो. नीलम गुप्ता ने कहा कि लोकसंगीत में हमारी सांस्कृतिक विरासत का बड़ा हिस्सा सुरक्षित है। महिलाओं ने लोकगीतों के जरिए अपने सुख-दुःख, अनुभव और भावनाओं को अभिव्यक्त किया है। यही वजह है कि लोकगीतों का संरक्षण हमारी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने से भी जुड़ा है।
कजरी और नृत्य प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम में प्रसिद्ध लोकगायिका ने कजरी की प्रस्तुति देकर सावन के पारंपरिक रंग को जीवंत कर दिया। इसके अलावा कुलगीत, गणेश नृत्य-वंदना, शिव-पार्वती, राधा-कृष्ण नाट्य-नृत्य और तिब्बती नृत्य की प्रस्तुतियां हुईं। इन कार्यक्रमों में लोकजीवन, भक्ति और सावन की उमंग की झलक देखने को मिली।
फैशन शो से मेहंदी प्रतियोगिता तक दिखा उत्साह
सावन उत्सव के दौरान लोकगीत, फैशन शो, क्विज, मेहंदी, चूड़ी और सुहाग से जुड़ी कई प्रतियोगिताएं भी कराई गईं। महिलाओं ने इन गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम स्थल को हरियाली, फूलों, झूले और पारंपरिक सजावट से सजाया गया था, जिससे पूरे परिसर में सावन का माहौल नजर आया।
महिला अध्ययन केन्द्र की पहल को सराहा गया
महिला अध्ययन केन्द्र की निदेशक एवं संयोजिका प्रो. विधु द्विवेदी ने कहा कि उत्सव का उद्देश्य महिलाओं की रचनात्मक प्रतिभा और पारंपरिक ज्ञान को मंच देना है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम लोकसंस्कृति को आगे बढ़ाने के साथ महिलाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी देते हैं।
दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद मंगलाचरण और गणेश वंदना प्रस्तुत की गई। अतिथियों का माल्यार्पण, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया गया। अलग-अलग गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
विश्वविद्यालय के शिक्षक और छात्र भी हुए शामिल
कार्यक्रम का संचालन डॉ. कंचन मिश्रा ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव राकेश कुमार, चीफ प्रॉक्टर प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो. हीरक कान्ति चक्रवर्ती, डॉ. विशाखा शुक्ला, डॉ. रविशंकर पाण्डेय, प्रो. शशिरानी मिश्रा, डॉ. रानी द्विवेदी समेत विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, छात्राएं और बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।
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