By Malay Ojha | Published: 02 September 2026 at 09:04 PM
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के वनस्पति विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने गेहूं की फसल को लेकर एक अहम अध्ययन किया है। शोध में सामने आया कि मिट्टी में पाए जाने वाले लाभकारी बैक्टीरिया गेहूं के पौधों को बीमारी के साथ-साथ आसपास के पौधों से होने वाली प्रतिस्पर्धा के तनाव से निपटने में भी मदद कर सकते हैं। डॉ. प्रशांत सिंह के नेतृत्व में किया गया यह शोध अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘फिजियोलॉजिकल एंड मॉलिक्यूलर प्लांट पैथोलॉजी’ में प्रकाशित हुआ है।
शोध में पौध वृद्धि को बढ़ावा देने वाले जड़ क्षेत्र के लाभकारी बैक्टीरिया यानी पीजीपीआर का इस्तेमाल किया गया। वैज्ञानिकों ने खास तौर पर बैसिलस अमाइलोलिक्वेफेशियन्स को लेकर अध्ययन किया। गेहूं के पौधों को स्पॉट ब्लॉच रोग पैदा करने वाले फफूंद बाइपोलैरिस सोरोकिनियाना से संक्रमित किया गया और अलग-अलग पौध घनत्व पर उगाकर प्रतिस्पर्धात्मक तनाव का भी परीक्षण किया गया।
बैक्टीरिया से उपचारित पौधों ने बेहतर प्रदर्शन किया
अध्ययन में पाया गया कि पास-पास उगने वाले पौधों के बीच प्रकाश, पानी, पोषक तत्व और जगह को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ने के बावजूद लाभकारी बैक्टीरिया से उपचारित गेहूं की वृद्धि बेहतर रही। रोग का संक्रमण होने के बाद भी इन पौधों ने बिना उपचार वाले पौधों की तुलना में अधिक प्रतिरोध दिखाया और बेहतर वृद्धि बनाए रखी।
पौधे की रक्षा प्रणाली को पहले से तैयार करता है बैक्टीरिया
शोध की खास बात ‘डिफेंस प्राइमिंग’ से जुड़ी है। वैज्ञानिकों के अनुसार लाभकारी बैक्टीरिया पौधे की रक्षा प्रणाली को लगातार सक्रिय नहीं रखते, बल्कि उसे संभावित रोग के हमले के लिए पहले से तैयार करते हैं। रोगजनक के हमले के समय पौधा तेजी से प्रतिक्रिया देता है और वृद्धि तथा रक्षा के बीच बेहतर संतुलन बना पाता है।
डीएनए स्तर पर भी मिले अहम बदलाव
शोधकर्ताओं ने पौधों में आणविक स्तर पर बदलाव भी दर्ज किए। पीआर-1 और पीआर-3 जैसे रक्षा जीनों के नियामक क्षेत्रों में डीएनए मिथाइलेशन में परिवर्तन देखा गया। इससे संकेत मिलता है कि लाभकारी बैक्टीरिया पौधे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को एपिजेनेटिक स्तर पर प्रभावित कर सकते हैं।
टिकाऊ खेती के लिए महत्वपूर्ण संकेत
डॉ. प्रशांत सिंह, बंडाना देवी, निधि यादव और नंदिता दुबे की टीम का यह अध्ययन केवल गेहूं के स्पॉट ब्लॉच रोग तक सीमित नहीं है। वास्तविक खेतों में फसलों को एक साथ बीमारी, पोषक तत्वों की कमी, तापमान में बदलाव और प्रतिस्पर्धा जैसे कई दबावों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पौधों की प्राकृतिक क्षमता मजबूत करने के तरीके टिकाऊ खेती के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
बीएचयू में एआई आधारित रिसर्च टूल की ट्रेनिंग
राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में ‘लीपस्पेस-एआई पॉवर्ड रिसर्च असिस्टेंट’ विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी हुआ। एल्सेवियर की कस्टमर सक्सेस मैनेजर ऐश्वर्या नयाल ने शिक्षकों और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को एआई की मदद से शोध सामग्री खोजने, साहित्य समीक्षा बेहतर करने, शोध के अवसर और संभावित सहयोगी तलाशने की जानकारी दी। कार्यक्रम का उद्देश्य शोध कार्य को ज्यादा आसान और प्रभावी बनाने के लिए एआई टूल के इस्तेमाल से परिचित कराना था।
संस्कृत दिवस पर 100 से ज्यादा विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
बीएचयू के संस्कृत विभाग में दो दिवसीय संस्कृत दिवस समारोह के दौरान विभिन्न प्रतियोगिताएं कराई गईं। संस्कृत भाषण, सामान्य ज्ञान, सुस्वर स्तोत्र पाठ और श्लोक अन्ताक्षरी में विश्वविद्यालय के अलग-अलग संकायों और महाविद्यालयों के 100 से अधिक छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। विजेताओं को 3 सितंबर को पुरस्कार दिए जाएंगे।
मास्कलेस लेजर लिथोग्राफी का मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण
एसएटीएचआई-बीएचयू में 1 और 2 सितंबर को मास्कलेस लेजर लिथोग्राफी पर दो दिवसीय कार्यशाला हुई। प्रतिभागियों को लेजर राइटिंग, क्लीनरूम प्रोटोकॉल और सेमीकंडक्टर डिवाइस बनाने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। समापन पर कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र देकर सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिवाइस फैब्रिकेशन जैसे क्षेत्रों में शोध के लिए प्रोत्साहित किया।
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