By Malay Ojha | Published: 08 September 2026 at 05:30 PM
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में शिक्षक दिवस के अवसर पर सेवानिवृत्त होने वाले न्यायशास्त्र के वरिष्ठ आचार्य प्रो. रामपूजन पाण्डेय का सम्मान किया गया। कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने उन्हें माल्यार्पण, तिलक, अंगवस्त्र और रजतयुक्त स्मृतिचिह्न देकर सम्मानित किया। इस दौरान प्रो. पाण्डेय ने विश्वविद्यालय के संरक्षण और विकास के लिए इसे केंद्रीय दर्जा दिए जाने की दिशा में प्रयास करने का आग्रह किया।
समारोह में प्रो. पाण्डेय ने कहा कि भारतीय परंपरा में शिक्षक को केवल पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं माना गया, बल्कि उसे समाज को दिशा देने वाला गुरु माना गया है। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के आचार्यों ने देववाणी संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण में लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। तीन दशक से अधिक समय तक इस संस्था से जुड़े रहने के अनुभव को उन्होंने अपने जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
केंद्रीय दर्जे के लिए प्रयास का आग्रह
प्रो. पाण्डेय ने कहा कि सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय देश की प्राचीन और महत्वपूर्ण संस्कृत संस्थाओं में शामिल है। उन्होंने कुलपति से आग्रह किया कि विश्वविद्यालय के बेहतर विकास, संरक्षण और देशभर में इसकी भूमिका को मजबूत करने के लिए इसे केंद्रीय दर्जा दिलाने की दिशा में प्रयास किए जाएं।
शिक्षक का आचरण ही सबसे बड़ी सीख
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि विद्या, विनय, विवेक, सत्य, संयम, करुणा, धैर्य, आचार, प्रज्ञा और लोकमंगल जैसे गुणों से शिक्षक का व्यक्तित्व बनता है। शिक्षक का काम केवल किताबों का ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और चरित्र को मजबूत करना भी है।
गुरु के प्रति सम्मान हमारी जिम्मेदारी
कुलपति ने कहा कि भारतीय परंपरा में गुरु के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता को विशेष महत्व दिया गया है। जिन आचार्यों ने अपना पूरा जीवन ज्ञान और शिक्षा को समर्पित किया, उनके प्रति सम्मान व्यक्त करना समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी शिक्षक की असली सफलता उसके पद या सम्मान से नहीं, बल्कि उसके विद्यार्थियों के जीवन में दिखाई देने वाले ज्ञान, संस्कार और सफलता से तय होती है।
राधाकृष्णन के योगदान को किया याद
प्रो. शर्मा ने शिक्षक दिवस के महत्व पर डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि राधाकृष्णन ने भारतीय दर्शन, शिक्षा और संस्कृति को दुनिया के सामने मजबूती से रखा। शिक्षक दिवस उनके प्रति देश की श्रद्धा और कृतज्ञता का प्रतीक है।
सेवानिवृत्ति के बाद भी जारी रहेगी ज्ञान की यात्रा
कुलपति ने प्रो. रामपूजन पाण्डेय के लंबे शैक्षणिक और विद्वतापूर्ण योगदान की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ और सक्रिय जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति सेवा का अंत नहीं है, बल्कि वर्षों के अनुभव और ज्ञान को समाज के हित में लगाने का एक नया अवसर है।
समारोह में कई शिक्षक रहे मौजूद
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक और पौराणिक मंगलाचरण से हुई। इसके बाद दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती तथा डॉ. राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। वैदिक एवं वेदान्त विभागाध्यक्ष आचार्य सुधाकर मिश्र और न्यायशास्त्र के अध्यापक डॉ. दुर्गेश पाठक ने भी शिक्षक दिवस के महत्व पर अपने विचार रखे।
शिक्षकों का भी किया गया अभिनंदन
विज्ञान विभागाध्यक्ष एवं कुलानुशासक प्रो. जितेन्द्र कुमार ने स्वागत किया और कार्यक्रम का संयोजन भी किया। ज्योतिष शास्त्र के सहायक आचार्य डॉ. मधुसूदन मिश्र ने संचालन किया, जबकि ज्योतिष शास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. अमित कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस मौके पर कुलपति ने उपस्थित आचार्यों और शिक्षकों का भी परंपरागत रूप से माल्यार्पण कर अभिनंदन किया। अंत में विश्वविद्यालय परिवार की ओर से शांति पाठ किया गया।
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