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तरुण तेजपाल ने किया सरेंडर, 2013 दुष्कर्म केस में अब 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में होगी बड़ी सुनवाई

By Malay Ojha | Published: 14 September 2026 at 03:44 PM

तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल ने सोमवार को गोवा की मापुसा अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद उठाया गया है, जिसमें उनकी सजा के खिलाफ अपील सुनने से पहले सरेंडर करने को जरूरी बताया गया था। तेजपाल के सरेंडर के बाद अब उनकी अपील पर 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की थी छूट की मांग
25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल की सरेंडर से छूट देने की अर्जी खारिज कर दी थी। जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने और उसका प्रमाण पत्र अदालत में जमा करने का समय दिया था। कोर्ट ने साफ किया था कि तय समय में प्रमाण पत्र दाखिल होने पर उनकी आपराधिक अपील को 22 सितंबर को सूचीबद्ध किया जाएगा।

2013 से चल रहा है मामला
यह मामला नवंबर 2013 का है। एक महिला पत्रकार ने आरोप लगाया था कि गोवा के एक होटल की लिफ्ट में 7 और 8 नवंबर को तेजपाल ने उसका यौन उत्पीड़न किया। मामले में तेजपाल को 30 नवंबर 2013 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद लंबी कानूनी प्रक्रिया चली और मामला कई अदालतों तक पहुंचा।

पहले ट्रायल कोर्ट से हुए थे बरी
मापुसा की अतिरिक्त सत्र अदालत ने मई 2021 में तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। इसके बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने 6 अगस्त 2026 को निचली अदालत का फैसला पलट दिया और तेजपाल को दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसी फैसले के खिलाफ तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

तेजपाल ने मांगी थी सरेंडर से राहत
सुप्रीम कोर्ट में तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि अपील पर सुनवाई के लिए पहले सरेंडर करना अनिवार्य नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि अदालत उचित मामले में सरेंडर की शर्त से छूट दे सकती है और पहले अपील को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है। गोवा सरकार ने इस मांग का विरोध किया था।

कोर्ट ने क्यों जरूरी माना सरेंडर?
सुप्रीम कोर्ट ने सरेंडर से छूट की मांग स्वीकार नहीं की। 25 अगस्त के आदेश में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तेजपाल को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण कर उसका प्रमाण पत्र दाखिल करना होगा। आदेश के मुताबिक, प्रमाण पत्र 21 सितंबर तक दाखिल होने पर उनकी आपराधिक अपील 22 सितंबर को नियमित अदालत के सामने लगाई जाएगी।

अब 22 सितंबर पर टिकी नजर
सोमवार को मापुसा अदालत में सरेंडर करने के बाद तेजपाल की सुप्रीम कोर्ट में अपील की अगली प्रक्रिया आगे बढ़ने की स्थिति में है। अब 22 सितंबर को शीर्ष अदालत उनकी बॉम्बे हाईकोर्ट की दोषसिद्धि और 10 साल की सजा को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई करेगी।

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तरुण तेजपाल ने किया सरेंडर, 2013 दुष्कर्म केस में अब 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में होगी बड़ी सुनवाई

By Malay Ojha | Published: 14 September 2026 at 03:44 PM

तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल ने सोमवार को गोवा की मापुसा अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद उठाया गया है, जिसमें उनकी सजा के खिलाफ अपील सुनने से पहले सरेंडर करने को जरूरी बताया गया था। तेजपाल के सरेंडर के बाद अब उनकी अपील पर 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की थी छूट की मांग
25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल की सरेंडर से छूट देने की अर्जी खारिज कर दी थी। जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने और उसका प्रमाण पत्र अदालत में जमा करने का समय दिया था। कोर्ट ने साफ किया था कि तय समय में प्रमाण पत्र दाखिल होने पर उनकी आपराधिक अपील को 22 सितंबर को सूचीबद्ध किया जाएगा।

2013 से चल रहा है मामला
यह मामला नवंबर 2013 का है। एक महिला पत्रकार ने आरोप लगाया था कि गोवा के एक होटल की लिफ्ट में 7 और 8 नवंबर को तेजपाल ने उसका यौन उत्पीड़न किया। मामले में तेजपाल को 30 नवंबर 2013 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद लंबी कानूनी प्रक्रिया चली और मामला कई अदालतों तक पहुंचा।

पहले ट्रायल कोर्ट से हुए थे बरी
मापुसा की अतिरिक्त सत्र अदालत ने मई 2021 में तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। इसके बाद गोवा सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने 6 अगस्त 2026 को निचली अदालत का फैसला पलट दिया और तेजपाल को दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसी फैसले के खिलाफ तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

तेजपाल ने मांगी थी सरेंडर से राहत
सुप्रीम कोर्ट में तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि अपील पर सुनवाई के लिए पहले सरेंडर करना अनिवार्य नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि अदालत उचित मामले में सरेंडर की शर्त से छूट दे सकती है और पहले अपील को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है। गोवा सरकार ने इस मांग का विरोध किया था।

कोर्ट ने क्यों जरूरी माना सरेंडर?
सुप्रीम कोर्ट ने सरेंडर से छूट की मांग स्वीकार नहीं की। 25 अगस्त के आदेश में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तेजपाल को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण कर उसका प्रमाण पत्र दाखिल करना होगा। आदेश के मुताबिक, प्रमाण पत्र 21 सितंबर तक दाखिल होने पर उनकी आपराधिक अपील 22 सितंबर को नियमित अदालत के सामने लगाई जाएगी।

अब 22 सितंबर पर टिकी नजर
सोमवार को मापुसा अदालत में सरेंडर करने के बाद तेजपाल की सुप्रीम कोर्ट में अपील की अगली प्रक्रिया आगे बढ़ने की स्थिति में है। अब 22 सितंबर को शीर्ष अदालत उनकी बॉम्बे हाईकोर्ट की दोषसिद्धि और 10 साल की सजा को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई करेगी।

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