By aryavartalive | Published: 26 September 2026 at 05:16 PM
पटना के दानापुर स्थित राजकीय मध्य विद्यालय, रामजीचक में शनिवार को अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी के दौरान शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने अभिभावकों से बच्चों की पढ़ाई में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सिर्फ बच्चों को स्कूल भेज देने से अभिभावकों की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। बच्चों की सीखने की प्रक्रिया में घर और स्कूल, दोनों की भूमिका जरूरी है।
शिक्षा मंत्री ने अभिभावकों से कहा कि वे घर पर बच्चों की पढ़ाई के बारे में बात करें, उनकी परेशानियों को समझें और जरूरत पड़ने पर शिक्षकों से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए घर में ऐसा माहौल बनाया जाना चाहिए, जहां वे बिना झिझक अपनी बात रख सकें और पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा कर सकें।
अभिभावकों से सीधे सुनी समस्याएं
संगोष्ठी के बाद मंत्री ने विद्यालय पहुंचे अभिभावकों से एक-एक कर बातचीत की। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई और स्कूल से जुड़ी उनकी समस्याओं की जानकारी ली और संबंधित मामलों के समाधान का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि स्कूल और परिवार के बीच लगातार संवाद रहने से बच्चों की पढ़ाई के साथ उनके व्यक्तित्व विकास में भी मदद मिलती है।
प्रदर्शनी में बच्चों की रचनात्मकता देखी
विद्यालय में ‘मेरे सपनों का भारत : सेवा चित्र’ अभियान के तहत लगाई गई प्रदर्शनी का भी शिक्षा मंत्री ने अवलोकन किया। उन्होंने छात्र-छात्राओं की ओर से तैयार की गई चित्रों और अन्य कलाकृतियों को देखा और बच्चों की रचनात्मक सोच की सराहना की। इस तरह की गतिविधियों से बच्चों को अपनी कल्पना और विचारों को सामने रखने का मौका मिलता है।
बच्चों का बढ़ाया उत्साह
मंत्री ने कहा कि पढ़ाई के साथ रचनात्मक गतिविधियां भी बच्चों के विकास का अहम हिस्सा हैं। चित्रकला जैसी गतिविधियां बच्चों की कल्पनाशक्ति और आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद करती हैं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बच्चियों के साथ ग्रुप फोटो भी खिंचवाई और उनका उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक, अभिभावक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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