By Malay Ojha | Published: 02 October 2026 at 11:33 AM
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल के बीच बसपा प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है। मायावती ने सपा पर परिवारवाद और धनबल की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बसपा चुनावों में अपने परिवार या रिश्तेदारों को टिकट देने की नीति नहीं अपनाती, जबकि सपा के उम्मीदवारों के चयन पर सवाल उठते हैं।
मायावती ने सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव को दोबारा राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने को परिवारवाद से जोड़कर हमला बोला। रामगोपाल यादव ने 30 सितंबर को लखनऊ में नामांकन दाखिल किया था। वह सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के चाचा हैं और लंबे समय से पार्टी की राजनीति में सक्रिय हैं।
नथवानी की उम्मीदवारी पर भी सवाल
मायावती ने सपा के दूसरे उम्मीदवार धनराज परिमल नथवानी को लेकर भी सवाल उठाए। नथवानी कॉरपोरेट क्षेत्र से जुड़े हैं और रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी के तौर पर काम कर चुके हैं। उन्होंने भी अखिलेश यादव की मौजूदगी में राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया है।
PDA के दावे पर मायावती का वार
बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सपा खुद को PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों की पार्टी बताती है, लेकिन उम्मीदवारों के चयन में उसकी राजनीति अलग दिखाई देती है। मायावती ने कहा कि सपा को PDA का समर्थन चाहिए, लेकिन टिकट देने में परिवार और बड़े कारोबारी वर्ग से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। ये मायावती द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।
बसपा की टिकट नीति का किया जिक्र
मायावती ने कहा कि बसपा छोटे-बड़े चुनावों में अपने परिवार, सगे-संबंधियों और भाई-भतीजों को टिकट नहीं देती। उनके मुताबिक पार्टी गरीब, मध्यम वर्ग और कमजोर तबकों से जुड़े मेहनती अंबेडकरवादी कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार बनाने पर जोर देती है।
तीसरे उम्मीदवार को लेकर भी तंज
मायावती ने सपा के संभावित तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि तीसरा उम्मीदवार चुनाव में हार की स्थिति में केवल पार्टी की छवि बचाने के लिए उतारा जा सकता है। हालांकि सपा की ओर से उस समय तीसरे उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की गई थी।
2027 की सियासत पर भी नजर
मायावती ने अपने बयान को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से भी जोड़ा। उन्होंने दलित, आदिवासी, अति-पिछड़े, मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक वर्गों के साथ गरीब सवर्ण समाज के लोगों से बसपा से जुड़ने की अपील की। राज्यसभा चुनाव के बीच उनका यह हमला यूपी की आगे की सियासत के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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