By Malay Ojha | Published: 28 October 2026 at 09:23 PM
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान और उनसे जुड़े मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत ED ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। इन संपत्तियों का निर्धारित मूल्य 426.46 करोड़ रुपये है, जबकि इनकी मौजूदा बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपये बताई गई है।
जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतें अटैच
ED ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA), 2002 के तहत की है। रामपुर के सिंहानखेड़ा गांव स्थित जौहर नगर में बनी इस यूनिवर्सिटी का परिसर मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के पास है। इस ट्रस्ट की स्थापना आजम खान ने की थी और वही इसे नियंत्रित करते हैं। आजम खान यूनिवर्सिटी के मानद चांसलर भी हैं।
किसानों की जमीन पर कब्जे के आरोप से शुरू हुई जांच
ED ने रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। इन मामलों में आरोप लगाया गया था कि यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए किसानों की कृषि भूमि पर जबरन कब्जा किया गया। जांच के दौरान सरकारी जमीन से जुड़े मामले भी सामने आए।
34 एकड़ की शत्रु संपत्ति पर भी कब्जे का आरोप
रामपुर जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, सिंहानखेड़ा गांव में करीब 34 एकड़ में फैले शत्रु संपत्ति के 45 भूखंडों पर भी यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए अवैध कब्जा किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, इस जमीन को ट्रस्ट को पट्टे पर देने का आदेश रद्द होने के बाद भी कब्जा जारी रहा। बाद में गृह मंत्रालय के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक ने जिला प्रशासन के जरिए जमीन का कब्जा वापस ले लिया।
सरकारी ठेकों के पैसे से यूनिवर्सिटी बनाने का आरोप
ED की जांच में कथित तौर पर सामने आया कि सरकारी कार्यों के लिए निर्धारित धनराशि का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी के निर्माण में किया गया। जांच एजेंसी को यह भी पता चला कि सरकारी ठेके हासिल करने वाले कुछ ठेकेदारों से रकम वापस ट्रस्ट को दान के रूप में भेजी गई थी। इन आरोपों की जांच के दौरान ठेके की रकम और निर्माण सामग्री के इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की गई।
186 करोड़ के ठेकों वाली कंपनी पर भी जांच
ED के मुताबिक, एक कंपनी के प्रबंध निदेशक ने स्वीकार किया कि उनकी कंपनी को लोक निर्माण विभाग (PWD) से करीब 186 करोड़ रुपये के ठेके मिले थे। कंपनी ने कथित तौर पर ठेका राशि का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा यूनिवर्सिटी के लिए निर्माण सामग्री खरीदने में इस्तेमाल किया। जांच में एक दूसरी फर्म के साझेदारों के बयान भी सामने आए। आरोप है कि उन्होंने आजम खान के प्रभाव में काम किया था। इस फर्म ने ट्रस्ट को 40 लाख रुपये का दान भी दिया था।
ED ने पुलिस से साझा की थी जांच की जानकारी
ED ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून की धारा 66(2) के तहत जांच से मिली जानकारी उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ साझा की थी। इसके आधार पर 13 अक्टूबर 2026 को अजीमनगर थाने में FIR दर्ज की गई। इसमें आजम खान, ट्रस्ट और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 61, 316(5) और 318(4) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं 7 और 13 के तहत मामला दर्ज किया गया।
ED की मौजूदा कार्रवाई इसी मामले में यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच करने से जुड़ी है। जांच एजेंसी के आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
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