By Malay Ojha | Published: 25 October 2026 at 10:28 AM
फ्रांस में महंगाई और शिक्षा बजट में कटौती के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ। शनिवार को देशभर में करीब 4.10 लाख लोग सड़कों पर उतरे। राजधानी पेरिस में ही लगभग 1.10 लाख प्रदर्शनकारियों के जुटने की जानकारी गृह मंत्रालय ने दी। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और लोगों के बीच झड़पें हुईं। पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया।
करीब 1,000 लोग गिरफ्तार, 70 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के मुताबिक, देशभर में हुए प्रदर्शनों के दौरान करीब 1,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि काले कपड़े पहने कुछ समूहों के साथ पुलिस की गंभीर झड़पें हुईं। नुनेज ने इन समूहों को अति-वामपंथी चरमपंथी बताया।
हालात को काबू में रखने और हिंसा रोकने के लिए देशभर में करीब 70 हजार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था। सरकार ने पुलिस को प्रदर्शनकारियों को शहरों के प्रमुख इलाकों और कारोबारी क्षेत्रों से दूर रखने के निर्देश भी दिए।
पेरिस में आंसू गैस, सरकार और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी
शनिवार को पेरिस में प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी और पानी की बौछारें कीं। प्रदर्शन में ट्रेड यूनियनों के बैनर दिखाई दिए। कई पोस्टरों पर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार और पुलिस के खिलाफ नारे लिखे थे।
समाचार एजेंसी AFP के मुताबिक, मैक्रों ने अधिकारियों से उन प्रदर्शनों पर रोक लगाने को कहा है, जो ट्रेड यूनियनों से जुड़े नहीं हैं। उन्होंने ऐसे प्रदर्शनों को अवैध बताया। हालांकि, सरकार के इन कदमों के बीच छात्र संगठनों और मजदूर यूनियनों ने आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं के लिए ज्यादा बजट की मांग
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग महंगाई से राहत और सरकार के प्रस्तावित बजट में बदलाव की है। छात्र संगठनों और मजदूर यूनियनों का कहना है कि शिक्षा सहित जरूरी सार्वजनिक सेवाओं के लिए ज्यादा पैसा दिया जाना चाहिए। वे चाहते हैं कि सरकार बजट से जुड़े अपने फैसले वापस ले।
समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग के मुताबिक, गृह मंत्री नुनेज ने कहा कि लोगों को अपनी बात रखने की आजादी दी गई, लेकिन कुछ समूह प्रदर्शनों को हिंसक बनाना चाहते थे।
पहले भी कई शहरों में हुई थी हिंसा और तोड़फोड़
फ्रांस में ताजा प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है, जब एक सप्ताह पहले भी कई शहरों में हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं सामने आई थीं। लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों ने मैक्रों सरकार के सामने कानून-व्यवस्था और बजट से जुड़ी चुनौतियां बढ़ा दी हैं।
फ्रांस में मई 2027 में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। ऐसे में महंगाई, शिक्षा पर खर्च और सरकारी बजट को लेकर जारी विरोध आने वाले महीनों में भी राजनीतिक चर्चा का अहम मुद्दा बना रह सकता है।
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