By Malay Ojha | Published: 03 October 2026 at 05:25 AM
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के विपक्षी दलों से एकजुट होने के आह्वान पर योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पलटवार किया है। राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव लंबे समय से संविधान के खतरे में होने की बात कहते रहे हैं, जबकि उनके मुताबिक संविधान सुरक्षित है और राजनीतिक तौर पर खतरा अखिलेश के सामने है।
ओपी राजभर ने मुस्लिम वोटों का जिक्र करते हुए सपा की राजनीति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज ने यादव नेताओं को मुख्यमंत्री बनाने में भूमिका निभाई, लेकिन सपा की ओर से किसी मुस्लिम को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर आगे नहीं किया गया। यह बयान उन्होंने अखिलेश यादव की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते हुए दिया।
‘भाईचारे का नहीं, दौलत का चुनाव’
अखिलेश यादव के ‘भाईचारे के चुनाव’ वाले बयान पर भी राजभर ने निशाना साधा। उन्होंने इसे ‘दौलत का चुनाव’ बताया। साथ ही पीडीए को लेकर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए उन्होंने रामगोपाल यादव और अन्य नेताओं का नाम लेकर अपनी बात रखी। राजभर की ये टिप्पणियां उनके राजनीतिक आरोप हैं।
2017 के गठबंधन का भी जिक्र
सपा और कांग्रेस के पुराने गठबंधन का जिक्र करते हुए राजभर ने 2017 के विधानसभा चुनाव के नतीजों की बात की। उनका कहना था कि उस समय सपा के साथ कांग्रेस भी थी और यादव-मुस्लिम वोटों के साथ कांग्रेस का समर्थन भी मिला था, फिर भी सपा 47 सीटों पर ही जीत सकी।
2022 के चुनाव पर राजभर का दावा
राजभर ने 2022 के विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया। उस समय वह सपा के साथ गठबंधन में थे। उन्होंने दावा किया कि गठबंधन के बाद सपा की सीटें बढ़ीं और पूर्वांचल की 62 सीटों पर सुभासपा की वजह से सपा को फायदा मिला। यह राजभर का राजनीतिक दावा है, जिसे उन्होंने अपने बयान के दौरान रखा।
‘सपा की सरकार नहीं आने वाली’
ओपी राजभर ने आगे दावा किया कि अखिलेश यादव को अब पता चल गया है कि सपा की सरकार नहीं बनने वाली है और इसी वजह से वह अपने लिए राजनीतिक व्यवस्था करने में जुटे हैं। राजभर का यह बयान आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच आया है।
अखिलेश ने क्या कहा था?
इससे पहले अखिलेश यादव ने राज्यसभा चुनाव को ‘मिलन का समय’ बताते हुए पुराने मतभेद भुलाकर साथ आने की अपील की थी। उन्होंने लोकतंत्र और संविधान से जुड़े मुद्दों का हवाला देते हुए विपक्षी दलों और अन्य साथियों से एकजुट होने की बात कही थी। इसी बयान पर राजभर ने अपनी प्रतिक्रिया दी।
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