By Malay Ojha | Published: 10 June 2026 at 04:01 PM
देशभर में इन दिनों सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कहा जा रहा है कि 30 जून 2026 से कागज के नोट चलन से बाहर कर दिए जाएंगे और उनकी जगह प्लास्टिक के नोट जारी किए जाएंगे। इस दावे के सामने आने के बाद आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। हालांकि अब सरकार की आधिकारिक फैक्ट चेक एजेंसी ने इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट कर दी है।
प्रेस सूचना ब्यूरो की फैक्ट चेक इकाई ने वायरल हो रहे दावे को पूरी तरह झूठा और भ्रामक बताया है। एजेंसी ने कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है, जिसमें मौजूदा कागज के नोटों को वापस लेने या उन्हें प्लास्टिक नोटों से बदलने की बात कही गई हो।
सोशल मीडिया पर प्रसारित कई पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि 30 जून से देश में केवल प्लास्टिक करेंसी ही मान्य होगी। इन पोस्ट में रिजर्व बैंक का नाम लेकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई। पीआईबी ने ऐसे दावों से सावधान रहने की अपील की है।
पीआईबी ने बताया दावा पूरी तरह फर्जी
फैक्ट चेक इकाई ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि रिजर्व बैंक ने न तो कागज के नोट वापस लेने की घोषणा की है और न ही ऐसी कोई समयसीमा तय की है। इसलिए लोगों को किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
पीआईबी ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को मुद्रा या बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ी कोई जानकारी मिलती है तो उसकी पुष्टि सीधे रिजर्व बैंक के आधिकारिक माध्यमों से करनी चाहिए। सोशल मीडिया पर प्रसारित संदेशों के आधार पर निष्कर्ष निकालना गलत हो सकता है।
फिर प्लास्टिक नोटों की चर्चा क्यों हो रही है?
दरअसल, हाल के महीनों में प्लास्टिक आधारित करेंसी नोटों को लेकर चर्चाएं तेज हुई थीं। इसके पीछे वजह रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा का वह बयान है, जिसमें उन्होंने बताया था कि केंद्रीय बैंक पॉलीमर आधारित नोटों की संभावनाओं का अध्ययन कर रहा है।
यही बयान सोशल मीडिया पर अलग-अलग रूप में फैलाया गया और कुछ लोगों ने इसे कागज के नोट बंद होने की खबर के रूप में पेश करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह दावा वायरल होता गया और लोगों के बीच भ्रम फैल गया।
क्या होते हैं पॉलीमर या प्लास्टिक नोट?
पॉलीमर नोट विशेष प्रकार की मजबूत सामग्री से तैयार किए जाते हैं। ये पारंपरिक कागज के नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ माने जाते हैं। कई देशों में इनका उपयोग पहले से किया जा रहा है क्योंकि ये जल्दी फटते नहीं हैं और इनकी उम्र भी अधिक होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नोटों में सुरक्षा सुविधाएं बेहतर तरीके से जोड़ी जा सकती हैं। इससे नकली नोटों की समस्या पर भी कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। यही कारण है कि दुनिया के कई देशों ने वर्षों पहले पॉलीमर करेंसी को अपनाया था।
आरबीआई ने अभी नहीं लिया कोई अंतिम फैसला
रिजर्व बैंक के गवर्नर ने स्पष्ट किया है कि पॉलीमर नोटों को लेकर अभी केवल प्रारंभिक स्तर पर अध्ययन चल रहा है। बैंक यह जांच रहा है कि भारतीय परिस्थितियों में ऐसे नोट वास्तव में कितने उपयोगी साबित होंगे और उनकी लागत तथा लाभ का संतुलन क्या रहेगा।
उन्होंने कहा था कि फिलहाल केंद्रीय बैंक विभिन्न पहलुओं की समीक्षा कर रहा है। जब तक सभी पहलुओं का मूल्यांकन पूरा नहीं हो जाता, तब तक किसी तरह का अंतिम निर्णय लेना संभव नहीं है।
फिलहाल पुराने नोट पूरी तरह वैध
सरकारी स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया है कि देश में चल रहे सभी वैध कागज के नोट पहले की तरह मान्य हैं। आम लोगों को अपने पास रखे नोटों को लेकर चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
यदि भविष्य में प्लास्टिक नोटों को लेकर कोई बड़ा फैसला लिया जाता है तो उसकी आधिकारिक घोषणा रिजर्व बैंक द्वारा की जाएगी। फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक है।
कागज के नोट 30 जून से बंद होने की खबर पूरी तरह फर्जी साबित हुई है। रिजर्व बैंक ने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है। हालांकि भविष्य में पॉलीमर नोटों पर विचार जरूर किया जा रहा है, लेकिन अभी यह प्रक्रिया शुरुआती चरण में है और कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में लोगों को केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करना चाहिए।

