National

spot_img

ट्रंप का भारत पर नया टैरिफ वार, जबरन मजदूरी के नाम पर 10% अतिरिक्त शुल्क; 60 देशों पर अमेरिका की बड़ी कार्रवाई

By Malay Ojha | Published: 24 July 2026 at 10:30 AM

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने भारत से अमेरिका पहुंचने वाले सामान पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है। यह फैसला जबरन मजदूरी से तैयार किए गए उत्पादों के आयात पर रोक को प्रभावी तरीके से लागू नहीं करने के आरोपों से जुड़ा है। भारत के अलावा 16 अन्य देशों पर भी इसी दर से अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है। अमेरिका ने कुल 60 व्यापारिक साझेदार अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ यह कार्रवाई की है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने 1974 के व्यापार कानून की धारा 301 के तहत यह कार्रवाई की है। इस प्रावधान के तहत अमेरिका ने उन देशों की व्यापार नीतियों और व्यवस्थाओं की जांच की, जिन पर जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात को रोकने और ऐसे प्रतिबंधों को प्रभावी तरीके से लागू नहीं करने का आरोप लगाया गया था। अमेरिका के अनुसार, इस कार्रवाई का मकसद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जबरन मजदूरी को खत्म करने के लिए दूसरे देशों पर दबाव बढ़ाना है।

भारत को 12.5% की जगह 10% दर क्यों मिली?
भारत के लिए इस फैसले का एक अहम पहलू यह है कि उसे 12.5% की दर वाले देशों की सूची में नहीं रखा गया। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के मुताबिक भारत उन 17 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जिनके लिए 10% शुल्क तय किया गया है। इस सूची में बांग्लादेश, पाकिस्तान, कनाडा, ब्रिटेन, इंडोनेशिया, मलेशिया, मेक्सिको और श्रीलंका समेत अन्य देश भी शामिल हैं।

अमेरिका ने 60 अर्थव्यवस्थाओं की जांच की थी
अमेरिकी सरकार ने इस पूरी कार्रवाई से पहले 60 प्रमुख व्यापारिक साझेदार अर्थव्यवस्थाओं की समीक्षा की थी। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के मुताबिक इस जांच के दौरान सार्वजनिक सुनवाई के दो दौर हुए और 2,100 से अधिक टिप्पणियां मिलीं। इसके साथ ही संबंधित देशों की सरकारों के साथ भी बातचीत की गई। अमेरिका का कहना है कि इस प्रक्रिया का मकसद जबरन मजदूरी से जुड़े उत्पादों के आयात को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था तैयार करना है।

कई देशों पर 12.5% तक का अतिरिक्त शुल्क
अमेरिका ने सभी देशों के लिए एक जैसी दर तय नहीं की है। भारत समेत 17 देशों के सामान पर 10% अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है, जबकि कई अन्य जांच के दायरे में आई अर्थव्यवस्थाओं के लिए 12.5% की दर निर्धारित की गई है। यूरोपीय संघ, ताइवान, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैंड के कुछ उत्पादों के लिए शुल्क की गणना अलग व्यवस्था के तहत की जाएगी, जिसमें पहले से लागू शुल्क को भी ध्यान में रखा जाएगा।

ट्रंप प्रशासन ने मानवाधिकार का मुद्दा उठाया
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि जबरन मजदूरी मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और इसे खत्म करने के लिए वैश्विक स्तर पर सख्त कदम उठाने की जरूरत है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि ऐसे उत्पादों के आयात पर रोक लगाने के लिए सिर्फ नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करना भी जरूरी है।

ट्रंप ने व्यापारिक साझेदारों पर बढ़ाया दबाव
राष्ट्रपति ट्रंप ने व्यापार प्रतिनिधि की सलाह के आधार पर इन अर्थव्यवस्थाओं के सामान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के फैसले को मंजूरी दी। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि इस तरह के शुल्क से संबंधित देशों को जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगाने और मौजूदा नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

भारत के लिए 10% शुल्क का क्या मतलब है?
भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाले सामान पर यह अतिरिक्त शुल्क ऐसे समय लगाया गया है, जब दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर बातचीत पहले से ही अहम दौर में है। नए शुल्क का सीधा असर उन भारतीय निर्यातकों पर पड़ सकता है, जिनके उत्पाद अमेरिकी बाजार में पहुंचते हैं। हालांकि वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि किन उत्पादों पर यह शुल्क लागू होता है और किन वस्तुओं को इससे छूट दी गई है।

अमेरिका का कहना- जबरन मजदूरी पर सख्ती जरूरी
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय का कहना है कि जबरन मजदूरी से बने उत्पादों का वैश्विक कारोबार मानवाधिकारों के साथ-साथ निष्पक्ष व्यापार के लिए भी चुनौती है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि दूसरे देशों में ऐसी व्यवस्था लागू होनी चाहिए, जिससे जबरन मजदूरी से बने सामान को उनके बाजारों में प्रवेश न मिले।

नई कार्रवाई ऐसे समय हुई जब पुराना शुल्क खत्म हो रहा था
ट्रंप प्रशासन की यह नई कार्रवाई ऐसे समय सामने आई है, जब पहले लगाया गया व्यापक 10% अतिरिक्त शुल्क खत्म होने की स्थिति में था। नई व्यवस्था के तहत धारा 301 का इस्तेमाल किया गया है। इस कदम से अमेरिकी प्रशासन ने व्यापार नीति में टैरिफ को एक बार फिर प्रमुख हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का संकेत दिया है।

भारत समेत कई बड़े व्यापारिक साझेदार निशाने पर
इस कार्रवाई में भारत के साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, कनाडा, ब्रिटेन, मेक्सिको, मलेशिया, इंडोनेशिया और अर्जेंटीना जैसे देश भी शामिल हैं। अमेरिका ने इन देशों के लिए 10% की दर तय की है। वहीं जांच के दायरे में शामिल अन्य अर्थव्यवस्थाओं पर 12.5% तक अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है।

आगे क्या होगा, इस पर नजर
भारत पर लगाए गए नए शुल्क से दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों पर असर को लेकर अब नजर बनी हुई है। खासतौर पर भारतीय निर्यातकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी बाजार में किन उत्पादों की लागत बढ़ती है और नए शुल्क का असर कारोबार पर कितना पड़ता है। फिलहाल अमेरिकी प्रशासन ने इस फैसले को जबरन मजदूरी के खिलाफ कार्रवाई और निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है।

ट्रंप प्रशासन का यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत दुनिया के उन प्रमुख देशों में शामिल है, जिनके साथ अमेरिका का बड़ा व्यापारिक रिश्ता है। ऐसे में 10% अतिरिक्त शुल्क भले ही 12.5% वाली दर से कम हो, लेकिन इसका असर अमेरिकी बाजार पर निर्भर भारतीय कारोबारियों और निर्यातकों पर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में भारत की प्रतिक्रिया और दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता इस पूरे मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

📢 बड़ी खबर आते ही सबसे पहले जानना चाहते हैं?
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।

WhatsApp चैनल जॉइन करें
Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

International

spot_img

ट्रंप का भारत पर नया टैरिफ वार, जबरन मजदूरी के नाम पर 10% अतिरिक्त शुल्क; 60 देशों पर अमेरिका की बड़ी कार्रवाई

By Malay Ojha | Published: 24 July 2026 at 10:30 AM

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने भारत से अमेरिका पहुंचने वाले सामान पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है। यह फैसला जबरन मजदूरी से तैयार किए गए उत्पादों के आयात पर रोक को प्रभावी तरीके से लागू नहीं करने के आरोपों से जुड़ा है। भारत के अलावा 16 अन्य देशों पर भी इसी दर से अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है। अमेरिका ने कुल 60 व्यापारिक साझेदार अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ यह कार्रवाई की है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने 1974 के व्यापार कानून की धारा 301 के तहत यह कार्रवाई की है। इस प्रावधान के तहत अमेरिका ने उन देशों की व्यापार नीतियों और व्यवस्थाओं की जांच की, जिन पर जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात को रोकने और ऐसे प्रतिबंधों को प्रभावी तरीके से लागू नहीं करने का आरोप लगाया गया था। अमेरिका के अनुसार, इस कार्रवाई का मकसद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जबरन मजदूरी को खत्म करने के लिए दूसरे देशों पर दबाव बढ़ाना है।

भारत को 12.5% की जगह 10% दर क्यों मिली?
भारत के लिए इस फैसले का एक अहम पहलू यह है कि उसे 12.5% की दर वाले देशों की सूची में नहीं रखा गया। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के मुताबिक भारत उन 17 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जिनके लिए 10% शुल्क तय किया गया है। इस सूची में बांग्लादेश, पाकिस्तान, कनाडा, ब्रिटेन, इंडोनेशिया, मलेशिया, मेक्सिको और श्रीलंका समेत अन्य देश भी शामिल हैं।

अमेरिका ने 60 अर्थव्यवस्थाओं की जांच की थी
अमेरिकी सरकार ने इस पूरी कार्रवाई से पहले 60 प्रमुख व्यापारिक साझेदार अर्थव्यवस्थाओं की समीक्षा की थी। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के मुताबिक इस जांच के दौरान सार्वजनिक सुनवाई के दो दौर हुए और 2,100 से अधिक टिप्पणियां मिलीं। इसके साथ ही संबंधित देशों की सरकारों के साथ भी बातचीत की गई। अमेरिका का कहना है कि इस प्रक्रिया का मकसद जबरन मजदूरी से जुड़े उत्पादों के आयात को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था तैयार करना है।

कई देशों पर 12.5% तक का अतिरिक्त शुल्क
अमेरिका ने सभी देशों के लिए एक जैसी दर तय नहीं की है। भारत समेत 17 देशों के सामान पर 10% अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है, जबकि कई अन्य जांच के दायरे में आई अर्थव्यवस्थाओं के लिए 12.5% की दर निर्धारित की गई है। यूरोपीय संघ, ताइवान, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैंड के कुछ उत्पादों के लिए शुल्क की गणना अलग व्यवस्था के तहत की जाएगी, जिसमें पहले से लागू शुल्क को भी ध्यान में रखा जाएगा।

ट्रंप प्रशासन ने मानवाधिकार का मुद्दा उठाया
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि जबरन मजदूरी मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और इसे खत्म करने के लिए वैश्विक स्तर पर सख्त कदम उठाने की जरूरत है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि ऐसे उत्पादों के आयात पर रोक लगाने के लिए सिर्फ नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करना भी जरूरी है।

ट्रंप ने व्यापारिक साझेदारों पर बढ़ाया दबाव
राष्ट्रपति ट्रंप ने व्यापार प्रतिनिधि की सलाह के आधार पर इन अर्थव्यवस्थाओं के सामान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के फैसले को मंजूरी दी। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि इस तरह के शुल्क से संबंधित देशों को जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगाने और मौजूदा नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

भारत के लिए 10% शुल्क का क्या मतलब है?
भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाले सामान पर यह अतिरिक्त शुल्क ऐसे समय लगाया गया है, जब दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर बातचीत पहले से ही अहम दौर में है। नए शुल्क का सीधा असर उन भारतीय निर्यातकों पर पड़ सकता है, जिनके उत्पाद अमेरिकी बाजार में पहुंचते हैं। हालांकि वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि किन उत्पादों पर यह शुल्क लागू होता है और किन वस्तुओं को इससे छूट दी गई है।

अमेरिका का कहना- जबरन मजदूरी पर सख्ती जरूरी
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय का कहना है कि जबरन मजदूरी से बने उत्पादों का वैश्विक कारोबार मानवाधिकारों के साथ-साथ निष्पक्ष व्यापार के लिए भी चुनौती है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि दूसरे देशों में ऐसी व्यवस्था लागू होनी चाहिए, जिससे जबरन मजदूरी से बने सामान को उनके बाजारों में प्रवेश न मिले।

नई कार्रवाई ऐसे समय हुई जब पुराना शुल्क खत्म हो रहा था
ट्रंप प्रशासन की यह नई कार्रवाई ऐसे समय सामने आई है, जब पहले लगाया गया व्यापक 10% अतिरिक्त शुल्क खत्म होने की स्थिति में था। नई व्यवस्था के तहत धारा 301 का इस्तेमाल किया गया है। इस कदम से अमेरिकी प्रशासन ने व्यापार नीति में टैरिफ को एक बार फिर प्रमुख हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का संकेत दिया है।

भारत समेत कई बड़े व्यापारिक साझेदार निशाने पर
इस कार्रवाई में भारत के साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, कनाडा, ब्रिटेन, मेक्सिको, मलेशिया, इंडोनेशिया और अर्जेंटीना जैसे देश भी शामिल हैं। अमेरिका ने इन देशों के लिए 10% की दर तय की है। वहीं जांच के दायरे में शामिल अन्य अर्थव्यवस्थाओं पर 12.5% तक अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है।

आगे क्या होगा, इस पर नजर
भारत पर लगाए गए नए शुल्क से दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों पर असर को लेकर अब नजर बनी हुई है। खासतौर पर भारतीय निर्यातकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी बाजार में किन उत्पादों की लागत बढ़ती है और नए शुल्क का असर कारोबार पर कितना पड़ता है। फिलहाल अमेरिकी प्रशासन ने इस फैसले को जबरन मजदूरी के खिलाफ कार्रवाई और निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है।

ट्रंप प्रशासन का यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत दुनिया के उन प्रमुख देशों में शामिल है, जिनके साथ अमेरिका का बड़ा व्यापारिक रिश्ता है। ऐसे में 10% अतिरिक्त शुल्क भले ही 12.5% वाली दर से कम हो, लेकिन इसका असर अमेरिकी बाजार पर निर्भर भारतीय कारोबारियों और निर्यातकों पर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में भारत की प्रतिक्रिया और दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता इस पूरे मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

📢 बड़ी खबर आते ही सबसे पहले जानना चाहते हैं?
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।

WhatsApp चैनल जॉइन करें
Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

National

spot_img

International

spot_img
RELATED ARTICLES