By Malay Ojha | Published: 28 August 2026 at 10:46 AM
सुभाष चंद्रा से जुड़े करीब ₹22,006 करोड़ के व्यक्तिगत गारंटी मामले में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के फैसले के बाद विवाद और बढ़ गया है। NCLT ने मंगलवार को उनके repayment plan को मंजूरी दी थी। अब HDFC Bank और LIC Housing Finance इस फैसले को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। HDFC Bank ने कहा है कि उसने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया था और अब अपील के विकल्प पर विचार कर रहा है।
मंजूर योजना के तहत सुभाष चंद्रा की ओर से लेनदारों के लिए ₹6.25 करोड़ का भुगतान रखा गया है। वहीं मामले से जुड़ी मुख्य कर्जदार कंपनियों की ओर से करीब ₹1,494 करोड़ के भुगतान का प्रावधान है। ₹6.25 करोड़ की रकम करीब ₹22,006 करोड़ के admitted claims का महज 0.03 प्रतिशत बैठती है। इसी बेहद कम वसूली को लेकर कई वित्तीय संस्थानों ने आपत्ति जताई है।
LIC Housing Finance ने भी जताई कड़ी आपत्ति
LIC Housing Finance ने योजना का विरोध किया है और अब NCLAT जाने का फैसला किया है। कंपनी के मामले में करीब ₹1,322.39 करोड़ का admitted claim था, जबकि repayment plan में उसके लिए लगभग ₹38.09 लाख का भुगतान तय हुआ है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन संपत्तियों पर उसका सुरक्षा अधिकार है, उन पर उसके अधिकार और कानूनी उपाय बने हुए हैं।
HDFC Bank ने भी प्रस्ताव के खिलाफ किया था मतदान
HDFC Bank ने कहा है कि उसने इस resolution के खिलाफ वोट किया था, जिसे बहुमत से मंजूरी मिली। बैंक के मुताबिक इस मामले में उसका admitted claim कुल रकम का करीब 3.2 प्रतिशत था। अब बैंक NCLAT में अपील की संभावना तलाश रहा है।
कई बड़े बैंक पहले ही जता चुके हैं विरोध
इस योजना को लेकर केवल HDFC Bank और LIC Housing Finance ही असहमत नहीं थे। Axis Bank, Canara Bank, RBL Bank और Union Bank समेत कई लेनदारों ने भी प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया था। इसके बावजूद कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स में 80.8 प्रतिशत से अधिक वोटिंग शेयर वाले लेनदारों ने योजना के पक्ष में मतदान किया।
₹22 हजार करोड़ सुभाष चंद्रा का निजी कर्ज नहीं
इस मामले में एक अहम बात यह है कि ₹22,006 करोड़ की पूरी रकम सुभाष चंद्रा द्वारा व्यक्तिगत रूप से लिया गया कर्ज नहीं है। सरकारी सूत्रों के अनुसार यह रकम उन कंपनियों के कर्ज से जुड़े admitted claims हैं, जिनके लिए चंद्रा ने व्यक्तिगत गारंटी दी थी। मुख्य कर्जदार कंपनियों की अपनी देनदारी बनी हुई है और repayment plan में उनकी ओर से करीब ₹1,494 करोड़ के भुगतान का प्रावधान है।
अब NCLAT के फैसले पर टिकी नजर
NCLT ने सुभाष चंद्रा की ओर से पेश repayment plan को मंजूरी देते हुए असहमति जताने वाले लेनदारों की आपत्तियां खारिज कर दी थीं। अब HDFC Bank और LIC Housing Finance की संभावित अपील से मामला NCLAT के सामने पहुंच सकता है। ऐसे में अगली सुनवाई में योजना, लेनदारों की आपत्तियों और भुगतान की बेहद कम रकम पर अदालत का रुख अहम होगा।
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