By Malay Ojha | Published: 03 July 2026 at 09:19 PM
राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन के मामले ने अब नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने ऐलान किया है कि वह अयोध्या की अदालत में मुकदमा दायर करेंगे और मंदिर निर्माण के लिए दिए गए अपने 1 लाख 11 हजार रुपये वापस मांगेंगे। उनका कहना है कि जिस धन को भगवान राम की सेवा के लिए दिया गया था, उसका गलत इस्तेमाल हुआ है, इसलिए वह राशि उन्हें लौटाई जानी चाहिए।
भोपाल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्हें पुलिस जांच पर भरोसा नहीं है। उनका आरोप है कि पुलिस निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई नहीं करेगी, इसलिए वह सीधे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने कहा कि उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए श्रद्धा के साथ दान दिया था, लेकिन अब जब चढ़ावे में गड़बड़ी की बातें सामने आ रही हैं, तो वह अपनी दान की गई राशि वापस चाहते हैं।
दान लौटाने की मांग क्यों कर रहे हैं?
दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने भगवान राम में आस्था रखते हुए मंदिर निर्माण के लिए 1 लाख 11 हजार रुपये का योगदान दिया था। उनका कहना है कि यदि दान की राशि का सही उपयोग नहीं हुआ और उसमें गबन हुआ है, तो उस पैसे को वापस किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि राशि वापस मिलती है तो वह उसे किसी ऐसे धार्मिक ट्रस्ट को देंगे, जहां उसका सही इस्तेमाल हो।
पहले भी दिया था राम मंदिर के लिए चंदा
कांग्रेस नेता ने बताया कि राम मंदिर के लिए चलाए गए पहले चंदा अभियान के दौरान भी उन्होंने आर्थिक सहयोग दिया था। हालांकि, उनका दावा है कि उस समय जुटाई गई राशि का पूरा हिसाब कभी सार्वजनिक नहीं किया गया। बाद में जब सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद दोबारा चंदा अभियान चला, तब उन्होंने किसी संगठन को पैसा देने के बजाय सीधे ट्रस्ट में दान जमा कराया।
शिवराज से ज्यादा दान देने की बताई वजह
दिग्विजय सिंह ने कहा कि उस समय मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक लाख रुपये का दान दिया था। इसके बाद उन्होंने उनसे अधिक राशि देने का फैसला किया और 1 लाख 11 हजार रुपये ट्रस्ट को दिए। उन्होंने बताया कि यह राशि विधिवत जमा कराई गई थी और उसकी रसीद भी उनके पास मौजूद है।
ट्रस्ट प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि मंदिर में आने वाले दान के प्रबंधन में गंभीर लापरवाही और अनियमितताएं हुईं। उनका दावा है कि कम वेतन पर नियुक्त कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से रोज आने वाले नकद चढ़ावे का एक हिस्सा गायब किया जाता था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में कुछ बैंक कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच के दायरे में है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं और मामले की जांच जारी है।
क्या है पूरा मामला?
राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाई गई नकदी, सोना, चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं के कथित गबन का मामला इस वर्ष जून में सामने आया था। आरोप है कि चढ़ावे के रखरखाव से जुड़े कुछ कर्मचारियों और बैंक से जुड़े लोगों की मिलीभगत से धन में गड़बड़ी की गई। मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल का गठन किया। जांच के दौरान अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
अब अदालत में होगी अगली लड़ाई
दिग्विजय सिंह ने साफ कहा है कि वह केवल बयान देकर नहीं रुकेंगे, बल्कि कानूनी लड़ाई भी लड़ेंगे। उनका कहना है कि अदालत में मुकदमा दायर कर वह अपने दान की राशि वापस मांगेंगे। ऐसे में राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब केवल जांच का विषय नहीं रह गया है, बल्कि इसके राजनीतिक और कानूनी दोनों पहलू भी तेजी से सामने आने लगे हैं।
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