By Malay Ojha | Published: 17 August 2026 at 11:35 AM
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने आखिरकार पार्टी से अलग होने का फैसला सार्वजनिक कर दिया है। उन्होंने सोमवार को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को दोबारा इस्तीफा भेजते हुए पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से मुक्त करने का आग्रह किया। पूनावाला ने इस्तीफे के पीछे आर्थिक और निजी परिस्थितियों को वजह बताया है। खास बात यह है कि वह इससे पहले 30 जुलाई को भी इस्तीफे की पेशकश कर चुके थे, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने तब उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था।
शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया पर इस्तीफे की जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने एक बार फिर पूरे सम्मान और आभार के साथ बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन को अपना इस्तीफा सौंपा है और इसे स्वीकार करने का अनुरोध किया है। उनके ताजा कदम से साफ है कि इस बार उन्होंने पार्टी से अलग होने का फैसला सोच-समझकर लिया है। इससे पहले पार्टी नेतृत्व ने उन्हें अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा था, लेकिन लंबी बातचीत और विचार-विमर्श के बाद भी पूनावाला अपने निर्णय पर कायम रहे।
30 जुलाई को भी दिया था इस्तीफा
पूनावाला ने अपने पत्र में बताया कि उन्होंने 30 जुलाई को ही बीजेपी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से बिना किसी शर्त इस्तीफा देने की पेशकश की थी। उन्होंने इसके पीछे गंभीर आर्थिक और निजी परिस्थितियों का हवाला दिया था। हालांकि, पार्टी ने उस समय उनका इस्तीफा तुरंत स्वीकार करने के बजाय उनसे फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा। पूनावाला ने कहा कि पार्टी का यह रुख उनके लिए भावुक क्षण था, क्योंकि उन्हें लगा कि संगठन ने उनके साथ अपनेपन का व्यवहार किया।
पार्टी छोड़ रहे हैं, PM मोदी के समर्थन से पीछे नहीं हटेंगे
इस्तीफे के बावजूद शहजाद पूनावाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के कामकाज के प्रति अपना समर्थन जारी रखने की बात कही है। उन्होंने साफ किया कि वह संगठन से अलग हो रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के विचारों से खुद को अलग नहीं कर रहे। उनका कहना है कि जहां भी और जिस भी रूप में संभव होगा, वह प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के दृष्टिकोण तथा काम का समर्थन करते रहेंगे।
वरिष्ठ नेताओं का जताया आभार
पूनावाला ने अपने विदाई संदेश में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार जताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नितिन नबीन, अमित शाह, बीएल संतोष, जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पूरे संघ परिवार का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें जिस तरह मार्गदर्शन, सम्मान, भरोसा और अपनी बात रखने का मंच दिया, उसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगे।
पसमांदा मुस्लिम होने का भी किया जिक्र
अपने इस्तीफे में शहजाद पूनावाला ने अपनी राजनीतिक यात्रा का जिक्र करते हुए खुद को एक युवा पसमांदा मुस्लिम और गैर-राजनीतिक परिवार से आने वाला व्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि बीजेपी में उन्हें अपनी बात रखने और आगे बढ़ने का अवसर मिला। पूनावाला का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह लंबे समय तक बीजेपी के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में गिने जाते रहे और टेलीविजन बहसों में पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते रहे।
निजी क्षेत्र में जाने की तैयारी
पूनावाला ने इस्तीफे में अपने अगले कदम का भी संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि वह जरूरी आर्थिक और निजी परिस्थितियों के कारण निजी क्षेत्र में जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि निजी क्षेत्र में उनकी नई भूमिका क्या होगी या वह किस संस्था से जुड़ने जा रहे हैं। इसलिए उनके अगले पेशेवर कदम को लेकर फिलहाल सिर्फ अटकलें ही लगाई जा सकती हैं।
एक्स प्रोफाइल बदलने के बाद बढ़ी थीं अटकलें
पूनावाला के बीजेपी छोड़ने की चर्चा अचानक नहीं शुरू हुई थी। कुछ दिन पहले उन्होंने अपने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ के परिचय से बीजेपी से जुड़ा उल्लेख हटा दिया था। इसके बाद राजनीतिक हलकों में उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हो गई थीं। उस समय उनके इस्तीफे को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। अब खुद पूनावाला ने इस्तीफा सार्वजनिक कर इन अटकलों पर विराम लगा दिया है।
बीजेपी के चर्चित प्रवक्ताओं में रहे पूनावाला
शहजाद पूनावाला बीजेपी के उन प्रवक्ताओं में रहे हैं, जो लंबे समय तक टेलीविजन बहसों और राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखते रहे। पार्टी में उनकी भूमिका केवल प्रवक्ता तक सीमित नहीं रही। उन्होंने संगठन से जुड़ी अलग-अलग जिम्मेदारियां भी संभालीं और सोशल मीडिया से जुड़े काम में भी सक्रिय रहे। ऐसे में उनका पार्टी से बाहर जाना बीजेपी के लिए एक चर्चित राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
कांग्रेस से बीजेपी तक पहुंची थी राजनीति
पूनावाला का राजनीतिक सफर बीजेपी से शुरू नहीं हुआ था। वह पहले कांग्रेस से जुड़े रहे और पार्टी की छात्र इकाई तथा मीडिया से जुड़े काम में सक्रिय रहे। वर्ष 2017 में कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को लेकर उनके तीखे विरोध के बाद उनका राजनीतिक रुख बदला और बाद में वह बीजेपी में शामिल हो गए। इसके बाद बीजेपी ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का पक्ष रखने वाले प्रमुख चेहरों में जगह दी।
अब आगे क्या करेंगे पूनावाला?
शहजाद पूनावाला का इस्तीफा स्वीकार किया जाता है या नहीं, इस पर अब बीजेपी नेतृत्व के अगले कदम पर नजर रहेगी। हालांकि, पूनावाला ने अपने पत्र में जिस तरह अपने फैसले को दोबारा स्पष्ट किया है, उससे संकेत मिलता है कि वह संगठन में अपनी जिम्मेदारी जारी रखने के इच्छुक नहीं हैं। उन्होंने पार्टी की व्यवस्था से अलग होने की बात कही है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के विचारों के समर्थन को लेकर अपना रुख साफ रखा है। इसलिए उनकी राजनीति का अगला अध्याय फिलहाल सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।
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