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TMC का नाम-चिह्न फ्रीज, ममता गुट को मिला फुटबॉल खिलाड़ी; जानें अब क्या होगा

By Malay Ojha | Published: 19 September 2026 at 10:48 AM

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहा विवाद अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। आयोग ने पार्टी के मूल नाम ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और उसके पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह को अंतरिम तौर पर फ्रीज कर दिया है। इसके साथ ही ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चिन्ह दिया गया है। दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है।

चुनाव आयोग का यह फैसला आगामी 6 अक्टूबर के उपचुनावों को देखते हुए आया है। आयोग ने कहा है कि फिलहाल दोनों गुट मूल TMC नाम और ‘फूल-घास’ चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। दोनों नए नाम और चिन्ह अंतरिम व्यवस्था के तहत दिए गए हैं, जब तक पार्टी पर नियंत्रण को लेकर अंतिम फैसला नहीं हो जाता। यह व्यवस्था पश्चिम बंगाल के साथ मेघालय और त्रिपुरा में भी लागू होगी।

ममता गुट को मिला फुटबॉल खिलाड़ी का चिन्ह
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के लिए आयोग ने ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम मंजूर किया है। इसके साथ फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। ममता गुट ने आयोग के सामने नाम और चिन्ह के कई विकल्प दिए थे, जिनमें फुटबॉल भी शामिल था। ममता बनर्जी का फुटबॉल से जुड़ाव भी सार्वजनिक रूप से सामने आता रहा है। मार्च 2025 में लियोनेल मेस्सी की हस्ताक्षर वाली जर्सी मिलने के बाद उन्होंने फुटबॉल को अपने लिए जुनून बताया था।

दूसरे गुट को मिला लिफाफा चिन्ह
आयोग ने अरूप रॉय के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह दिया है। ऋतब्रता बनर्जी भी इस गुट से जुड़े नेताओं में हैं। दोनों पक्षों ने आयोग को तीन-तीन नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प भेजे थे। आयोग ने उपचुनावों में उम्मीदवारों के सामने चुनाव चिन्ह और नाम को लेकर किसी तरह की स्थिति साफ नहीं रहने देने के लिए यह अंतरिम व्यवस्था की है। ([The Times of India][1])

मूल TMC नाम और चिन्ह पर फैसला अभी बाकी
चुनाव आयोग ने कहा है कि पार्टी के वास्तविक संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर मामला पैरा 15 के तहत देखा जाएगा। इसी प्रक्रिया में उपलब्ध दस्तावेजों और दोनों पक्षों के दावों पर विचार के बाद मूल पार्टी नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह को लेकर अंतिम फैसला किया जाएगा। फिलहाल ‘फूल और घास’ चिन्ह किसी भी गुट के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध नहीं है।

फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ममता
चुनाव आयोग के फैसले के बाद ममता बनर्जी ने इसका विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उनकी याचिका में मूल TMC नाम और ‘फूल-घास’ चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगाने वाले आयोग के फैसले को चुनौती दी गई है। इस मामले पर 21 सितंबर को सुनवाई के लिए उल्लेख किए जाने की संभावना बताई गई है।

TMC के भीतर विवाद के बीच बड़ा फैसला
TMC के भीतर संगठन और पार्टी पर नियंत्रण को लेकर विवाद के बाद चुनाव आयोग के सामने दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे रखे थे। आयोग के मुताबिक, दोनों गुट खुद को असली पार्टी बता रहे हैं। ऐसे में आगामी उपचुनावों को देखते हुए मूल नाम और चिन्ह को अस्थायी रूप से फ्रीज कर अलग-अलग पहचान देना जरूरी माना गया। अब नजर आयोग की पैरा 15 की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर है।

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TMC का नाम-चिह्न फ्रीज, ममता गुट को मिला फुटबॉल खिलाड़ी; जानें अब क्या होगा

By Malay Ojha | Published: 19 September 2026 at 10:48 AM

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहा विवाद अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। आयोग ने पार्टी के मूल नाम ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और उसके पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह को अंतरिम तौर पर फ्रीज कर दिया है। इसके साथ ही ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चिन्ह दिया गया है। दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है।

चुनाव आयोग का यह फैसला आगामी 6 अक्टूबर के उपचुनावों को देखते हुए आया है। आयोग ने कहा है कि फिलहाल दोनों गुट मूल TMC नाम और ‘फूल-घास’ चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। दोनों नए नाम और चिन्ह अंतरिम व्यवस्था के तहत दिए गए हैं, जब तक पार्टी पर नियंत्रण को लेकर अंतिम फैसला नहीं हो जाता। यह व्यवस्था पश्चिम बंगाल के साथ मेघालय और त्रिपुरा में भी लागू होगी।

ममता गुट को मिला फुटबॉल खिलाड़ी का चिन्ह
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के लिए आयोग ने ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम मंजूर किया है। इसके साथ फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। ममता गुट ने आयोग के सामने नाम और चिन्ह के कई विकल्प दिए थे, जिनमें फुटबॉल भी शामिल था। ममता बनर्जी का फुटबॉल से जुड़ाव भी सार्वजनिक रूप से सामने आता रहा है। मार्च 2025 में लियोनेल मेस्सी की हस्ताक्षर वाली जर्सी मिलने के बाद उन्होंने फुटबॉल को अपने लिए जुनून बताया था।

दूसरे गुट को मिला लिफाफा चिन्ह
आयोग ने अरूप रॉय के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह दिया है। ऋतब्रता बनर्जी भी इस गुट से जुड़े नेताओं में हैं। दोनों पक्षों ने आयोग को तीन-तीन नाम और चुनाव चिन्ह के विकल्प भेजे थे। आयोग ने उपचुनावों में उम्मीदवारों के सामने चुनाव चिन्ह और नाम को लेकर किसी तरह की स्थिति साफ नहीं रहने देने के लिए यह अंतरिम व्यवस्था की है। ([The Times of India][1])

मूल TMC नाम और चिन्ह पर फैसला अभी बाकी
चुनाव आयोग ने कहा है कि पार्टी के वास्तविक संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर मामला पैरा 15 के तहत देखा जाएगा। इसी प्रक्रिया में उपलब्ध दस्तावेजों और दोनों पक्षों के दावों पर विचार के बाद मूल पार्टी नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह को लेकर अंतिम फैसला किया जाएगा। फिलहाल ‘फूल और घास’ चिन्ह किसी भी गुट के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध नहीं है।

फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ममता
चुनाव आयोग के फैसले के बाद ममता बनर्जी ने इसका विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उनकी याचिका में मूल TMC नाम और ‘फूल-घास’ चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगाने वाले आयोग के फैसले को चुनौती दी गई है। इस मामले पर 21 सितंबर को सुनवाई के लिए उल्लेख किए जाने की संभावना बताई गई है।

TMC के भीतर विवाद के बीच बड़ा फैसला
TMC के भीतर संगठन और पार्टी पर नियंत्रण को लेकर विवाद के बाद चुनाव आयोग के सामने दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे रखे थे। आयोग के मुताबिक, दोनों गुट खुद को असली पार्टी बता रहे हैं। ऐसे में आगामी उपचुनावों को देखते हुए मूल नाम और चिन्ह को अस्थायी रूप से फ्रीज कर अलग-अलग पहचान देना जरूरी माना गया। अब नजर आयोग की पैरा 15 की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर है।

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