By Malay Ojha | Published: 14 September 2026 at 02:25 PM
काशी के श्रीविद्यामठ में ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का 102वां प्राकट्योत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ब्रह्मलीन शंकराचार्य की चरण पादुका के पूजन से हुई। इसके बाद वैदिक आचार्यों ने रुद्राभिषेक किया और 108 वेद विद्यार्थियों ने वेद पाठ किया।
श्रीविद्यामठ के प्रभारी ब्रह्मचारी परमात्मानंद के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में काशी के वरिष्ठ वैदिक आचार्य शामिल हुए। आचार्य मणि झा, ओमप्रकाश पांडेय, विनय भूषण तिवारी, शिवाकांत मिश्रा और अनिरुद्ध मिश्रा ने रुद्राभिषेक कराया। इसके बाद ब्रह्मलीन शंकराचार्य का मोदक से अर्चन किया गया।
दिनभर चलेगा भजन-कीर्तन और भंडारा
प्राकट्योत्सव के मौके पर श्रीविद्यामठ में दिनभर भजन-कीर्तन का कार्यक्रम रखा गया है। भक्तों के लिए भंडारे की भी व्यवस्था की गई है। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पांडेय ने बताया कि देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों में भी उनके अनुयायी इस अवसर को श्रद्धा के साथ मना रहे हैं।
स्वतंत्रता आंदोलन में भी निभाई भूमिका
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का जन्म 2 सितंबर 1924 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के दिघोरी गांव में हुआ था। वे कम उम्र में ही स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए थे और अंग्रेजी शासन के खिलाफ गतिविधियों के कारण जेल भी गए। बाद में वे दंडी संन्यासी बने और देश के प्रमुख धार्मिक नेताओं में उनकी पहचान बनी। 1982 में उन्होंने द्वारका शारदा पीठ और ज्योतिष मठ, दोनों के शंकराचार्य के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
राम जन्मभूमि आंदोलन से भी जुड़े रहे
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती राम जन्मभूमि आंदोलन से भी जुड़े रहे थे। उपलब्ध विवरणों के मुताबिक 1990 में अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास के प्रयास के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। वे गोहत्या पर रोक और दूसरे धार्मिक-सामाजिक मुद्दों को लेकर आंदोलनों में भी सक्रिय रहे।
शिष्य और धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का निधन 11 सितंबर 2022 को मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में हुआ था। उनके प्रमुख शिष्यों में वर्तमान ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का नाम शामिल है। उनके अनुयायियों के बीच आज भी उनके धार्मिक और सामाजिक कार्यों की चर्चा होती है।
देश-विदेश में श्रद्धालुओं ने किया स्मरण
प्राकट्योत्सव का मुख्य आयोजन काशी के श्रीविद्यामठ के अलावा छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के सलधा स्थित सपाद लक्षेश्वर धाम और ज्योतिर्मठ सहित कई स्थानों पर किए जाने की जानकारी दी गई है। काशी के कार्यक्रम में सर्वभूतात्मानंद ब्रह्मचारी, रमेश उपाध्याय, डॉ. लता पांडेय, सावित्री पांडेय, अभय शंकर तिवारी, विजया तिवारी समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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