By Malay Ojha | Published: 14 September 2026 at 02:32 PM
पटना के आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय (AKU) में जांच समिति को लेकर विवाद सोमवार को खुलकर सामने आ गया। कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया और समिति के समन्वयक एवं उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव पवन कुमार सिन्हा का पुतला फूंका। कर्मचारियों ने उनके खिलाफ नारेबाजी करते हुए कथित अमर्यादित व्यवहार और धमकी के आरोपों पर कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने ‘पवन कुमार सिन्हा इस्तीफा दो’ और ‘विश्वविद्यालय की गरिमा से खिलवाड़ बंद करो’ जैसे नारे लगाए। कर्मचारियों का कहना है कि जांच का विरोध नहीं है, लेकिन जांच के दौरान विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोष साबित होने पर कार्रवाई की मांग की।
15 दिन की जांच, फिर 12 सितंबर को टीम पहुंची
विवाद की एक बड़ी वजह जांच की समय-सीमा भी है। विश्वविद्यालय के अनुसार, 27 जुलाई 2026 को राज्यपाल सचिवालय की ओर से जांच समिति गठित की गई थी और उसे 15 दिनों में रिपोर्ट देने का निर्देश था। समिति के समन्वयक पवन कुमार सिन्हा बनाए गए थे। विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि जांच की अवधि बढ़ाने से जुड़ा कोई नया आधिकारिक पत्र उसे नहीं मिला, इसके बावजूद समिति 12 सितंबर को विश्वविद्यालय पहुंची।
1,344 पन्नों के दस्तावेज पहले ही दिए गए
विश्वविद्यालय का कहना है कि जांच से जुड़े करीब 1,344 पन्नों के दस्तावेज समिति को उपलब्ध कराए जा चुके थे। इसके बाद भी अतिरिक्त फाइलों और रिकॉर्ड की मांग की गई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने खास तौर पर सवाल उठाया कि क्या समिति को निर्धारित जांच विषय से बाहर जाकर अन्य दस्तावेज मांगने का अधिकार था। यही मुद्दा अब जांच समिति के अधिकार क्षेत्र को लेकर विवाद का कारण बन गया है।
‘हाथ तुड़वाने की धमकी’ का आरोप
मामले ने तब और गंभीर रूप लिया जब विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने पवन कुमार सिन्हा पर कथित तौर पर धमकीपूर्ण भाषा इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। शिकायत में ‘हाथ तुड़वाने’ जैसी धमकी दिए जाने का दावा किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा है कि जांच के दौरान अधिकारियों के साथ इस तरह का व्यवहार संस्थागत गरिमा के खिलाफ है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी का पक्ष भी सामने आना बाकी है।
कुलपति ने सरकार से भी शिकायत की
मामले को लेकर विश्वविद्यालय के कुलपति की ओर से मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भी शिकायत भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। इसमें जांच समिति के गठन, उसके अधिकार क्षेत्र, जांच की अवधि और कथित अमर्यादित व्यवहार पर आपत्ति जताई गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।
जांच के पीछे क्या है मामला?
यह जांच आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में कथित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़े मामलों को लेकर गठित की गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इसमें कार्पस फंड के इस्तेमाल, नियुक्तियों, खरीद प्रक्रिया, आउटसोर्सिंग और दूसरे प्रशासनिक मामलों से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है। समिति में पवन कुमार सिन्हा के अलावा दूसरे विभागों के अधिकारी भी शामिल हैं।
विश्वविद्यालय की गरिमा का मुद्दा उठाया
कर्मचारियों का कहना है कि जांच अपनी जगह है, लेकिन विश्वविद्यालय की संस्थागत गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता। उनका आरोप है कि यदि जांच प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों पर दबाव या कथित धमकी का इस्तेमाल किया गया तो इसकी भी जांच होनी चाहिए। कर्मचारियों ने राज्यपाल-सह-कुलाधिपति से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। फिलहाल मामला जांच समिति की कार्यप्रणाली से आगे बढ़कर विश्वविद्यालय प्रशासन, कर्मचारियों और सरकार के बीच गंभीर विवाद का रूप लेता दिख रहा है। अब निगाह इस बात पर है कि राज्यपाल सचिवालय और राज्य सरकार इस पूरे प्रकरण पर क्या कदम उठाते हैं।
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