By Malay Ojha | Published: 01 September 2026 at 06:35 PM
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में वैज्ञानिक अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI के इस्तेमाल को लेकर तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुरू हुई। उद्घाटन सत्र में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि AI शोध की रफ्तार को काफी बढ़ा सकता है। उनके मुताबिक, जिन कामों को पूरा करने में पहले एक साल तक लग जाता था, उन्हें अब एक महीने या 15 दिनों में पूरा करना संभव हो सकता है।
कला संकाय के शारीरिक शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित ‘वैज्ञानिक अनुसंधान में एआई का अनुप्रयोग’ विषय की इस कार्यशाला में अलग-अलग विषयों के शिक्षक, शोधकर्ता, विद्यार्थी और विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं। 1 से 3 सितंबर तक चलने वाली यह कार्यशाला हाइब्रिड माध्यम से आयोजित की जा रही है।
सिर्फ जानकारी नहीं, गहरी समझ भी जरूरी
कुलपति ने कहा कि प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण, कंप्यूटर विजन और वर्गीकरण जैसी तकनीकों के कारण AI अब किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। शोधकर्ताओं को इसका प्रभावी इस्तेमाल सीखना चाहिए, ताकि समय बचाने के साथ वे अपने शोध के ज्यादा महत्वपूर्ण सवालों पर ध्यान दे सकें।
शिक्षण के तरीके में भी बदलाव की जरूरत
प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि शिक्षकों की भूमिका केवल AI या सर्च इंजन से जानकारी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। विद्यार्थियों को विषय की गहरी समझ और व्यापक ज्ञान देना भी जरूरी है। तकनीक के बदलते दौर में पढ़ाने और विद्यार्थियों के मूल्यांकन के तरीकों में भी बदलाव किया जाना चाहिए।
कम खर्च में भी AI का इस्तेमाल संभव
कुलपति ने यह भी कहा कि AI के इस्तेमाल के लिए हमेशा बड़े संसाधनों या अत्याधुनिक सुविधाओं की जरूरत नहीं होती। कई ऐसे मुक्त और कम खर्च वाले उपकरण उपलब्ध हैं, जिनका इस्तेमाल शोध और पढ़ाई में किया जा सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों से कार्यशाला के सभी सत्रों में शामिल होने और विशेषज्ञों के साथ संवाद करने की अपील की।
विद्यार्थियों के लिए तैयार होंगे नए संसाधन
आईआईटी-बीएचयू के कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग के प्रो. संजय कुमार सिंह ने AI और मशीन लर्निंग को लेकर विद्यार्थियों के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र से जुड़े संसाधनों के लिए प्रयोगशाला और अधिगम मंच विकसित किए जा रहे हैं। यहां ऑनलाइन सामग्री, व्यावहारिक सत्र, सवालों के जवाब और परियोजना से जुड़ा मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।
अलग-अलग विषयों को जोड़ने पर जोर
प्रो. सिंह ने कहा कि अलग-अलग विषयों के विद्यार्थी अपने क्षेत्र के आंकड़ों के साथ AI का इस्तेमाल कर वास्तविक समस्याओं के समाधान तैयार कर सकते हैं। उन्होंने खनन, धातुकर्म और औषधि विज्ञान जैसे क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि आने वाले समय में तकनीक और विषय विशेषज्ञता का मेल महत्वपूर्ण होगा।
शारीरिक शिक्षा में भी तकनीक का बढ़ता असर
कला संकाय की संकाय प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने कार्यशाला के आयोजन के लिए विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि AI का असर अब रोजमर्रा की जिंदगी के साथ शिक्षा और खेलों पर भी दिखाई दे रहा है। ऐसे में शारीरिक शिक्षा और खेलों के क्षेत्र को भी तकनीकी बदलाव के साथ आगे बढ़ना होगा।
कई संस्थानों के विशेषज्ञ दे रहे प्रशिक्षण
शारीरिक शिक्षा विभाग के अध्यक्ष प्रो. विक्रम सिंह ने बताया कि कार्यशाला में केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा, तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय, लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और सनबीम ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस समेत कई संस्थानों के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
पुस्तक का भी हुआ विमोचन
कार्यक्रम के दौरान ‘हेल्थ एंड फिजिकल एजुकेशन’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया। आने वाले सत्रों में AI और वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े विशेषज्ञ व्याख्यान, संवाद और परिचर्चाएं होंगी। प्रो. संजय कुमार सिंह, डॉ. बृज किशोर और प्रो. श्रीराम पाण्डेय के सत्रों के साथ श्री संदीप मुखर्जी के दो व्याख्यान, एक परिचर्चा और समापन व्याख्यान भी प्रस्तावित हैं। कार्यक्रम के अंत में प्रो. बी.सी. कपरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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