By Malay Ojha | Published: 11 June 2026 at 06:36 PM
बिहार सरकार द्वारा सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान के लिए आकस्मिक निधि से 3,662 करोड़ रुपये निकालने के फैसले ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस कदम को सरकार की आर्थिक स्थिति से जोड़ते हुए कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब पेंशन योजनाओं के लिए हर साल बजट में पहले से प्रावधान होता है, तो फिर अतिरिक्त फंड की जरूरत क्यों पड़ी?
बिहार सरकार ने बुजुर्गों, विधवाओं, दिव्यांगों और अन्य लाभार्थियों को समय पर सामाजिक सुरक्षा पेंशन देने के लिए आकस्मिक निधि से 3,662 करोड़ रुपये जारी करने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि यह कदम सिर्फ भुगतान में किसी तरह की देरी रोकने के लिए उठाया गया है। लेकिन विपक्ष ने इसे राज्य की वित्तीय स्थिति से जोड़कर बड़ा मुद्दा बना दिया है।
तेजस्वी यादव ने सरकार से मांगा जवाब
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया है कि पेंशन जैसी नियमित योजनाओं के लिए हर साल बजट में राशि तय रहती है। ऐसे में सरकार को अलग से आकस्मिक निधि का सहारा लेने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि राज्य की वित्तीय स्थिति आखिर कैसी है और इस अतिरिक्त व्यवस्था की आवश्यकता क्यों महसूस हुई।
चुनावी घोषणाओं पर भी उठाए सवाल
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से पहले सरकार लगातार नई योजनाओं की घोषणा कर रही है और बड़े स्तर पर खर्च कर रही है। उनका कहना है कि इसका असर अब सरकारी खजाने पर दिखाई देने लगा है। उन्होंने दावा किया कि नियमित योजनाओं के लिए भी विशेष फंड की जरूरत पड़ना वित्तीय दबाव का संकेत माना जा सकता है।
महिला सहायता योजना को लेकर विपक्ष का निशाना
विपक्ष विशेष रूप से महिलाओं के लिए चलाई जा रही आर्थिक सहायता योजना का हवाला दे रहा है। हाल ही में सरकार ने लाखों महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये की सहायता राशि भेजी थी। इस योजना पर हजारों करोड़ रुपये खर्च हुए हैं और सरकार आगे भी इसका दायरा बढ़ाने की बात कह रही है।
सरकार ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
सरकार ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सरकार का कहना है कि आकस्मिक निधि का उपयोग कोई असामान्य प्रक्रिया नहीं है। जरूरत पड़ने पर पहले भी इस फंड से राशि ली जाती रही है और बाद में इसे नियमित बजट से समायोजित किया जाता है। इसलिए इसे आर्थिक संकट से जोड़ना गलत होगा।
लाभार्थियों को समय पर पैसा पहुंचाने का दावा
सरकार का कहना है कि उसकी पहली प्राथमिकता लाभार्थियों को समय पर सहायता राशि उपलब्ध कराना है। अधिकारियों के अनुसार पेंशन भुगतान में किसी तरह की देरी न हो, इसलिए यह निर्णय लिया गया है। सरकार का दावा है कि राज्य में सभी कल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध है और किसी भी योजना पर रोक लगाने जैसी स्थिति नहीं है।
विपक्ष सरकार के जवाब से नहीं हुआ संतुष्ट
विपक्ष का कहना है कि यदि वित्तीय स्थिति पूरी तरह मजबूत है तो बार-बार ऐसी व्यवस्थाओं की जरूरत क्यों पड़ रही है। विपक्ष इसे वित्तीय प्रबंधन की कमजोरी और संसाधनों के गलत उपयोग का परिणाम बता रहा है। इसी मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में सरकार को और घेरने की तैयारी भी की जा रही है।
चुनाव से पहले बढ़ सकती है राजनीतिक गर्मी
बिहार में चुनावी माहौल बनना शुरू हो चुका है और ऐसे समय में आर्थिक मामलों से जुड़ा यह विवाद राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। विपक्ष इसे जनता के बीच बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार अपनी योजनाओं को जनहित में उठाया गया कदम बता रही है। आने वाले दिनों में राज्य की आर्थिक स्थिति, सरकारी खर्च और कल्याणकारी योजनाओं को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।
क्या है पूरा विवाद?
फिलहाल विवाद का केंद्र सरकार द्वारा आकस्मिक निधि से 3,662 करोड़ रुपये निकालने का फैसला है। विपक्ष इसे आर्थिक दबाव का संकेत बता रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका राज्य की वित्तीय मजबूती से कोई संबंध नहीं है। अब यह मुद्दा पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है और चुनावी चर्चा का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।

