By Malay Ojha | Published: 09 June 2026 at 07:12 PM
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को लखनऊ में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव के समापन समारोह में लव जिहाद, धर्मांतरण और लैंड जिहाद जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के मन में देश, उसकी संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान नहीं है, उनके लिए भारत की धरती धर्मशाला नहीं बन सकती। मुख्यमंत्री का यह बयान राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को उन गतिविधियों के प्रति सजग रहना होगा, जो सामाजिक संतुलन और सांस्कृतिक पहचान को प्रभावित करने की कोशिश करती हैं। उन्होंने धर्मांतरण और लव जिहाद के मुद्दे पर जनजागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज की भागीदारी भी जरूरी है।
लैंड जिहाद का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में लैंड जिहाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक या खाली पड़ी जमीनों पर अवैध कब्जे की प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए। उनके अनुसार समाज को ऐसे मामलों में सतर्क रहकर कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई का समर्थन करना चाहिए।
राम कथा के मंच से दिया सामाजिक एकता का संदेश
श्रीराम कथा महोत्सव के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान राम केवल आस्था के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे पूरे देश को जोड़ने वाले आदर्श भी हैं। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक राम का नाम भारतीय समाज को एक सूत्र में बांधने का सामर्थ्य रखता है। उन्होंने कहा कि समाज को विभाजित करने वाली ताकतें समय-समय पर सक्रिय होती रही हैं, लेकिन संत समाज हमेशा लोगों को जोड़ने का काम करता है।
कथा सुनने नहीं, जीवन में उतारने की जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक कथाएं केवल सुनने के लिए नहीं होतीं, बल्कि उनके संदेशों को जीवन में उतारना अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे भगवान राम के आदर्शों को अपने व्यवहार और जीवन का हिस्सा बनाएं। उनके अनुसार राम के जीवन से मर्यादा, त्याग, सेवा और समाज के प्रति जिम्मेदारी का संदेश मिलता है।
राम जन्मभूमि आंदोलन का भी किया जिक्र
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने राम जन्मभूमि आंदोलन को भी याद किया। उन्होंने कहा कि संत समाज ने इस आंदोलन को केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता के प्रश्न के रूप में देखा था। उनका कहना था कि संतों ने कभी व्यक्तिगत श्रेय की चिंता नहीं की, बल्कि भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा को प्राथमिकता दी।
संतों की भूमिका की सराहना
मुख्यमंत्री ने कथा वाचक जगद्गुरु रामभद्राचार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे अपनी आयु और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद समाज को आध्यात्मिक दिशा देने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संत समाज देश और समाज को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।
रामायण के प्रसंगों से समझाया संदेश
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब भी समाज में नकारात्मक शक्तियां प्रभावी होती हैं, तब वे व्यवस्था, शिक्षा और सामाजिक संतुलन को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करती हैं। उन्होंने भगवान राम के संघर्ष को समाज में न्याय, सुरक्षा और मर्यादा की स्थापना का उदाहरण बताया।
महिलाओं की सुरक्षा पर भी बोले मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने माता सीता के अपहरण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की रक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भगवान राम का जीवन महिलाओं की गरिमा की रक्षा के लिए संघर्ष और समर्पण का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
कानून के साथ जागरूकता भी जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2020 में धर्मांतरण से जुड़े मामलों पर कानून बनाया था, लेकिन केवल कानूनी व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। समाज में जागरूकता और सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने लोगों से सामाजिक समरसता बनाए रखने और भारतीय मूल्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
भारतीय आदर्शों को अपनाने की अपील
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को भगवान राम और भगवान शिव जैसे आदर्शों को जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने राम के आदर्शों को अपनाया, उन्हें समाज में सम्मान और सफलता मिली। इसलिए परिवार और समाज दोनों स्तर पर नैतिक मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता है।

