Monday, June 15, 2026

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बाइक हादसे में टूट गया था घुटने का लिगामेंट, पटना में दूरबीन तकनीक से हुई सफल सर्जरी

By Malay Ojha | Published: 15 June 2026 at 04:55 PM

सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल एक 55 वर्षीय व्यक्ति के घुटने का जटिल ऑपरेशन पटना स्थित फोर्ड हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में सफलतापूर्वक किया गया। मरीज के दाहिने घुटने का पोस्टेरियर क्रूसिएट लिगामेंट (पीसीएल) पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे उन्हें चलने, खड़े होने और संतुलन बनाए रखने में काफी परेशानी हो रही थी। डॉक्टरों की टीम ने दूरबीन तकनीक यानी आर्थ्रोस्कोपी के जरिए पीसीएल रिकंस्ट्रक्शन कर घुटने को फिर से स्थिर बनाया। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत सामान्य है और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

भागलपुर जिले के रहने वाले सत्येंद्र कुमार (नाम बदला हुआ) कुछ दिन पहले बाइक दुर्घटना का शिकार हो गए थे। हादसे के दौरान उनके दाहिने पैर के घुटने में गंभीर चोट लगी थी। शुरुआत में सामान्य चोट समझी जा रही समस्या बाद में ज्यादा गंभीर निकली। घुटने में लगातार दर्द, सूजन और अस्थिरता की वजह से उनका रोजमर्रा का कामकाज भी प्रभावित होने लगा था।

एमआरआई रिपोर्ट के बाद लिया गया फैसला
अस्पताल पहुंचने पर विशेषज्ञ डॉक्टरों ने मरीज की विस्तृत जांच की। इसके बाद एमआरआई समेत अन्य जांच रिपोर्टों का अध्ययन किया गया। रिपोर्ट में पता चला कि घुटने का पीसीएल लिगामेंट बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने सर्जरी की सलाह दी और पीसीएल रिकंस्ट्रक्शन करने का निर्णय लिया।

करीब दो घंटे चला ऑपरेशन
डॉक्टर विनीत विवेक, डॉक्टर राजा अनुराग और डॉक्टर राजीव कुमार की टीम ने संयुक्त रूप से ऑपरेशन को अंजाम दिया। करीब दो घंटे तक चली इस सर्जरी में आधुनिक आर्थ्रोस्कोपी तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इस विधि में बड़े चीरे की जरूरत नहीं पड़ती और छोटे उपकरणों की मदद से घुटने के अंदर की सर्जरी की जाती है। ऑपरेशन सफल रहने के बाद मरीज को निगरानी में रखा गया और उनकी रिकवरी संतोषजनक रही।

क्या होता है पीसीएल लिगामेंट
फोर्ड हॉस्पिटल के निदेशक एवं हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉक्टर अरुण कुमार ने बताया कि पीसीएल घुटने के सबसे महत्वपूर्ण लिगामेंट्स में से एक होता है। यह घुटने को स्थिर रखने और शरीर का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। सड़क दुर्घटनाओं, खेल के दौरान लगी चोट या ऊंचाई से गिरने जैसी घटनाओं में इसके क्षतिग्रस्त होने की आशंका अधिक रहती है।

आधुनिक तकनीक से तेजी से होती है रिकवरी
डॉक्टरों के अनुसार आर्थ्रोस्कोपी तकनीक के जरिए की जाने वाली सर्जरी में मरीज को कई फायदे मिलते हैं। इसमें चीरा छोटा लगता है, खून कम बहता है और ऑपरेशन के बाद दर्द भी अपेक्षाकृत कम होता है। यही वजह है कि मरीज जल्दी स्वस्थ होकर सामान्य जीवन की ओर लौट सकता है। इस तकनीक के कारण अस्पताल में लंबे समय तक भर्ती रहने की जरूरत भी नहीं पड़ती।

फिजियोथेरेपी से और बेहतर होगी स्थिति
डॉक्टरों ने बताया कि सफल ऑपरेशन के बाद मरीज की फिजियोथेरेपी शुरू कर दी गई है। यह प्रक्रिया घुटने की ताकत और लचीलापन वापस लाने में मदद करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने पर मरीज जल्द ही सामान्य रूप से चल-फिर सकेगा।

सड़क हादसों में घुटने की चोट को नजरअंदाज न करें
विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि सड़क दुर्घटना के बाद यदि घुटने में लगातार दर्द, सूजन या अस्थिरता महसूस हो तो तुरंत जांच करानी चाहिए। कई बार लिगामेंट की चोट बाहर से दिखाई नहीं देती, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर यह बड़ी समस्या बन सकती है। आधुनिक तकनीक की मदद से अब ऐसी जटिल चोटों का भी सफल इलाज संभव है।

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बाइक हादसे में टूट गया था घुटने का लिगामेंट, पटना में दूरबीन तकनीक से हुई सफल सर्जरी

By Malay Ojha | Published: 15 June 2026 at 04:55 PM

सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल एक 55 वर्षीय व्यक्ति के घुटने का जटिल ऑपरेशन पटना स्थित फोर्ड हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में सफलतापूर्वक किया गया। मरीज के दाहिने घुटने का पोस्टेरियर क्रूसिएट लिगामेंट (पीसीएल) पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, जिससे उन्हें चलने, खड़े होने और संतुलन बनाए रखने में काफी परेशानी हो रही थी। डॉक्टरों की टीम ने दूरबीन तकनीक यानी आर्थ्रोस्कोपी के जरिए पीसीएल रिकंस्ट्रक्शन कर घुटने को फिर से स्थिर बनाया। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत सामान्य है और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

भागलपुर जिले के रहने वाले सत्येंद्र कुमार (नाम बदला हुआ) कुछ दिन पहले बाइक दुर्घटना का शिकार हो गए थे। हादसे के दौरान उनके दाहिने पैर के घुटने में गंभीर चोट लगी थी। शुरुआत में सामान्य चोट समझी जा रही समस्या बाद में ज्यादा गंभीर निकली। घुटने में लगातार दर्द, सूजन और अस्थिरता की वजह से उनका रोजमर्रा का कामकाज भी प्रभावित होने लगा था।

एमआरआई रिपोर्ट के बाद लिया गया फैसला
अस्पताल पहुंचने पर विशेषज्ञ डॉक्टरों ने मरीज की विस्तृत जांच की। इसके बाद एमआरआई समेत अन्य जांच रिपोर्टों का अध्ययन किया गया। रिपोर्ट में पता चला कि घुटने का पीसीएल लिगामेंट बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने सर्जरी की सलाह दी और पीसीएल रिकंस्ट्रक्शन करने का निर्णय लिया।

करीब दो घंटे चला ऑपरेशन
डॉक्टर विनीत विवेक, डॉक्टर राजा अनुराग और डॉक्टर राजीव कुमार की टीम ने संयुक्त रूप से ऑपरेशन को अंजाम दिया। करीब दो घंटे तक चली इस सर्जरी में आधुनिक आर्थ्रोस्कोपी तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इस विधि में बड़े चीरे की जरूरत नहीं पड़ती और छोटे उपकरणों की मदद से घुटने के अंदर की सर्जरी की जाती है। ऑपरेशन सफल रहने के बाद मरीज को निगरानी में रखा गया और उनकी रिकवरी संतोषजनक रही।

क्या होता है पीसीएल लिगामेंट
फोर्ड हॉस्पिटल के निदेशक एवं हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉक्टर अरुण कुमार ने बताया कि पीसीएल घुटने के सबसे महत्वपूर्ण लिगामेंट्स में से एक होता है। यह घुटने को स्थिर रखने और शरीर का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। सड़क दुर्घटनाओं, खेल के दौरान लगी चोट या ऊंचाई से गिरने जैसी घटनाओं में इसके क्षतिग्रस्त होने की आशंका अधिक रहती है।

आधुनिक तकनीक से तेजी से होती है रिकवरी
डॉक्टरों के अनुसार आर्थ्रोस्कोपी तकनीक के जरिए की जाने वाली सर्जरी में मरीज को कई फायदे मिलते हैं। इसमें चीरा छोटा लगता है, खून कम बहता है और ऑपरेशन के बाद दर्द भी अपेक्षाकृत कम होता है। यही वजह है कि मरीज जल्दी स्वस्थ होकर सामान्य जीवन की ओर लौट सकता है। इस तकनीक के कारण अस्पताल में लंबे समय तक भर्ती रहने की जरूरत भी नहीं पड़ती।

फिजियोथेरेपी से और बेहतर होगी स्थिति
डॉक्टरों ने बताया कि सफल ऑपरेशन के बाद मरीज की फिजियोथेरेपी शुरू कर दी गई है। यह प्रक्रिया घुटने की ताकत और लचीलापन वापस लाने में मदद करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने पर मरीज जल्द ही सामान्य रूप से चल-फिर सकेगा।

सड़क हादसों में घुटने की चोट को नजरअंदाज न करें
विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि सड़क दुर्घटना के बाद यदि घुटने में लगातार दर्द, सूजन या अस्थिरता महसूस हो तो तुरंत जांच करानी चाहिए। कई बार लिगामेंट की चोट बाहर से दिखाई नहीं देती, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर यह बड़ी समस्या बन सकती है। आधुनिक तकनीक की मदद से अब ऐसी जटिल चोटों का भी सफल इलाज संभव है।

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