By Malay Ojha | Published: 02 July 2026 at 10:20 AM
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामले पर पहली बार विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि इस घटना ने दुनिया भर के हिंदुओं की भावनाओं को आहत किया है और मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चंपत राय के खिलाफ किसी भी कार्रवाई से पहले जांच पूरी होने का इंतजार किया जाना चाहिए।
आलोक कुमार ने कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ा विवाद बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका कहना है कि श्रद्धालु पूरी आस्था और विश्वास के साथ मंदिर में दान करते हैं, ऐसे में अगर उस भरोसे पर सवाल उठते हैं तो यह केवल एक संस्था का नहीं, बल्कि करोड़ों राम भक्तों की भावनाओं का मामला बन जाता है।
उन्होंने कहा कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
चंपत राय पर कार्रवाई को लेकर क्या बोले?
चंपत राय के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर आलोक कुमार ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है और बिना अंतिम रिपोर्ट के किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
उन्होंने बताया कि विशेष जांच दल की जांच शुरू होने के बाद चंपत राय ने मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। फिलहाल उनके खिलाफ सीधे तौर पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है। जांच पूरी होने के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे का फैसला होना चाहिए।
‘आरोप ड्राइवर पर हैं, सीधे चंपत राय पर नहीं’
आलोक कुमार ने कहा कि अभी तक जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार आरोप सीधे चंपत राय पर नहीं बल्कि उनके ड्राइवर पर लगाए गए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि प्रशासनिक स्तर पर यदि कहीं लापरवाही हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
वीएचपी ने खुद को बताया अलग
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि राम मंदिर के निर्माण और उसके संचालन की जिम्मेदारी परिषद की नहीं है।
उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद मंदिर निर्माण और प्रबंधन की जिम्मेदारी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी गई थी। ऐसे में ट्रस्ट के प्रशासनिक फैसलों के लिए वीएचपी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि चंपत राय भले ही विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं, लेकिन उन्हें ट्रस्ट में परिषद की ओर से नियुक्त नहीं किया गया था।
जनता का भरोसा लौटाने के लिए रखीं चार बड़ी मांगें
आलोक कुमार ने पूरे मामले में पारदर्शिता लाने और श्रद्धालुओं का भरोसा दोबारा मजबूत करने के लिए चार प्रमुख मांगें भी रखीं।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले तत्काल प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए। इसके बाद जांच में किसी भी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। तीसरी मांग के रूप में उन्होंने फास्ट ट्रैक अदालत में रोजाना सुनवाई की बात कही, जबकि चौथी मांग दोषियों को जल्द और कड़ी सजा देने की रही।
उनका कहना है कि यदि समय पर सख्त कार्रवाई होगी तो लोगों का विश्वास दोबारा मजबूत होगा।
सोशल मीडिया पर भी उठाई आवाज
आलोक कुमार ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भी इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने राम मंदिर की तस्वीर के साथ एक पोस्ट साझा करते हुए साफ लिखा कि श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
पोस्ट में भी उन्होंने वही चार मांगें दोहराईं और कहा कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए।
तीन सदस्यीय विशेष जांच दल कर रही है जांच
उधर, उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया है। यह टीम चढ़ावे के हिसाब-किताब, जमीन से जुड़े लेन-देन, कथित रूप से गायब कीमती सामान और पूरी प्रक्रिया में हुई संभावित अनियमितताओं की जांच कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक विशेष जांच दल अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है। अब आगे की कार्रवाई रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर तय की जाएगी।
ट्रस्ट ने गड़बड़ी के आरोपों से किया इनकार
दूसरी ओर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट लगातार किसी भी बड़ी वित्तीय गड़बड़ी से इनकार करता रहा है। ट्रस्ट का कहना है कि सभी व्यवस्थाएं तय नियमों के अनुसार संचालित होती हैं और जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दिया जा रहा है।
अब सबकी नजर विशेष जांच दल की अंतिम रिपोर्ट पर है, क्योंकि उसी से तय होगा कि इस पूरे विवाद में किसकी जिम्मेदारी बनती है और आगे क्या कार्रवाई होगी।
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