Saturday, June 6, 2026

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बिहार के अस्पतालों और विश्वविद्यालयों पर पप्पू यादव का बड़ा हमला, राज्यपाल से की जांच और सख्त कार्रवाई की मांग

By Malay Ojha | Published: 06 June 2026 at 04:34 PM

मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल में हुई दर्दनाक घटना के बाद पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने बिहार के स्वास्थ्य और शिक्षा तंत्र को लेकर बड़ा मुद्दा उठाया है। उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात कर प्रदेश के सरकारी और निजी अस्पतालों में कथित अनियमितताओं की जांच कराने तथा विश्वविद्यालयों में अधिकारियों की कार्यशैली की समीक्षा कराने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने राज्यपाल को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं।

सांसद पप्पू यादव ने कहा कि मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल में हुई घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की कई खामियों को उजागर कर दिया है। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि केवल एक अस्पताल तक जांच सीमित न रखी जाए, बल्कि पूरे प्रदेश के सरकारी और निजी अस्पतालों में सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था, मरीजों की देखभाल और प्रशासनिक व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कराई जाए।

निजी और सरकारी अस्पताल दोनों जांच के दायरे में हों
पप्पू यादव का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में केवल निजी अस्पताल ही नहीं बल्कि सरकारी अस्पतालों में भी व्यवस्थागत कमियों की जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मरीजों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।

विश्वविद्यालयों में भी कार्रवाई की मांग
राज्यपाल को दिए ज्ञापन में सांसद ने भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय और पूर्णिया विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक स्तर पर कई फैसले मनमाने ढंग से लिए जा रहे हैं, जिससे शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के बीच असंतोष का माहौल बन रहा है।

कुलपति पर लगे आरोपों की जांच की मांग
ज्ञापन में सांसद ने भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा से जुड़े एक गंभीर मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के कुलसचिव, वित्त पदाधिकारी और परीक्षा नियंत्रक ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देते हुए कुलपति के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों में वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया है।

पहले भी भेजी जा चुकी है जानकारी
सांसद ने दावा किया कि इस मामले की जानकारी पूर्व में भी राज्यपाल कार्यालय को उपलब्ध कराई जा चुकी है। उनका कहना है कि इतने वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा एक साथ इस्तीफा देना अपने आप में गंभीर विषय है, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।

सीनेट सदस्यों के नामों की अनुशंसा
राज्यपाल से मुलाकात के दौरान पप्पू यादव ने पटना विश्वविद्यालय और जयप्रकाश विश्वविद्यालय से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य के रूप में अपने नाम तथा जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के लिए प्रेमचंद सिंह के नाम की अनुशंसा की।

सरकार और प्रशासन पर बढ़ सकता है दबाव
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अस्पतालों और विश्वविद्यालयों से जुड़े मुद्दों को एक साथ उठाकर पप्पू यादव ने प्रशासन पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की है। यदि राज्यपाल कार्यालय इस ज्ञापन पर संज्ञान लेता है तो स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े कई मामलों की जांच शुरू हो सकती है।

क्या होगी अगली कार्रवाई?
अब निगाहें राज्यपाल सचिवालय पर टिकी हैं। देखना होगा कि अस्पतालों में कथित लापरवाही और विश्वविद्यालयों में लगाए गए आरोपों को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल पप्पू यादव की इस पहल ने बिहार की स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है।

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बिहार के अस्पतालों और विश्वविद्यालयों पर पप्पू यादव का बड़ा हमला, राज्यपाल से की जांच और सख्त कार्रवाई की मांग

By Malay Ojha | Published: 06 June 2026 at 04:34 PM

मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल में हुई दर्दनाक घटना के बाद पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने बिहार के स्वास्थ्य और शिक्षा तंत्र को लेकर बड़ा मुद्दा उठाया है। उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात कर प्रदेश के सरकारी और निजी अस्पतालों में कथित अनियमितताओं की जांच कराने तथा विश्वविद्यालयों में अधिकारियों की कार्यशैली की समीक्षा कराने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने राज्यपाल को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं।

सांसद पप्पू यादव ने कहा कि मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल में हुई घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की कई खामियों को उजागर कर दिया है। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि केवल एक अस्पताल तक जांच सीमित न रखी जाए, बल्कि पूरे प्रदेश के सरकारी और निजी अस्पतालों में सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था, मरीजों की देखभाल और प्रशासनिक व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कराई जाए।

निजी और सरकारी अस्पताल दोनों जांच के दायरे में हों
पप्पू यादव का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में केवल निजी अस्पताल ही नहीं बल्कि सरकारी अस्पतालों में भी व्यवस्थागत कमियों की जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मरीजों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।

विश्वविद्यालयों में भी कार्रवाई की मांग
राज्यपाल को दिए ज्ञापन में सांसद ने भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय और पूर्णिया विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक स्तर पर कई फैसले मनमाने ढंग से लिए जा रहे हैं, जिससे शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के बीच असंतोष का माहौल बन रहा है।

कुलपति पर लगे आरोपों की जांच की मांग
ज्ञापन में सांसद ने भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा से जुड़े एक गंभीर मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के कुलसचिव, वित्त पदाधिकारी और परीक्षा नियंत्रक ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देते हुए कुलपति के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों में वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया है।

पहले भी भेजी जा चुकी है जानकारी
सांसद ने दावा किया कि इस मामले की जानकारी पूर्व में भी राज्यपाल कार्यालय को उपलब्ध कराई जा चुकी है। उनका कहना है कि इतने वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा एक साथ इस्तीफा देना अपने आप में गंभीर विषय है, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।

सीनेट सदस्यों के नामों की अनुशंसा
राज्यपाल से मुलाकात के दौरान पप्पू यादव ने पटना विश्वविद्यालय और जयप्रकाश विश्वविद्यालय से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य के रूप में अपने नाम तथा जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के लिए प्रेमचंद सिंह के नाम की अनुशंसा की।

सरकार और प्रशासन पर बढ़ सकता है दबाव
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अस्पतालों और विश्वविद्यालयों से जुड़े मुद्दों को एक साथ उठाकर पप्पू यादव ने प्रशासन पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की है। यदि राज्यपाल कार्यालय इस ज्ञापन पर संज्ञान लेता है तो स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े कई मामलों की जांच शुरू हो सकती है।

क्या होगी अगली कार्रवाई?
अब निगाहें राज्यपाल सचिवालय पर टिकी हैं। देखना होगा कि अस्पतालों में कथित लापरवाही और विश्वविद्यालयों में लगाए गए आरोपों को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल पप्पू यादव की इस पहल ने बिहार की स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है।

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