By Malay Ojha | Published: 22 July 2026 at 08:52 PM
नीट पेपर लीक, बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रिया में देरी को लेकर छात्रों के आंदोलन के बीच वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज के विरोध में अन्ना हजारे गुरुवार सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक अहिल्यानगर के वाडिया पार्क स्थित गांधी स्मारक पर मौन आंदोलन करेंगे। इस दौरान आंदोलन स्थल को प्रतीकात्मक तौर पर ‘नगर का जंतर-मंतर’ नाम दिया जाएगा। अन्ना हजारे ने कहा है कि सरकार को छात्रों की आवाज दबाने के बजाय उनसे बातचीत कर उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
अन्ना हजारे का यह ऐलान ऐसे समय हुआ है, जब नीट पेपर लीक, बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रिया में देरी को लेकर छात्रों और विपक्ष की ओर से सरकार पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। दिल्ली में 20 जुलाई को हुए संसद चलो मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित लाठीचार्ज को लेकर भी राजनीतिक माहौल गर्म है। अन्ना हजारे ने इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है।
पीएम मोदी को पत्र लिखकर जताई चिंता
अन्ना हजारे ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों की समस्याओं का समाधान बातचीत और संवाद से होना चाहिए। अगर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे छात्रों और युवाओं को बल प्रयोग का सामना करना पड़े, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता की बात है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह छात्रों और आंदोलनकारियों की बात सुने और उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेकर समाधान की दिशा में कदम उठाए।
‘नगर का जंतर-मंतर’ बनेगा आंदोलन स्थल
अहिल्यानगर में होने वाले इस मौन आंदोलन को लेकर भी खास तैयारी की गई है। गांधी स्मारक के आसपास के क्षेत्र को प्रतीकात्मक रूप से ‘नगर का जंतर-मंतर’ नाम दिया जाएगा। अन्ना हजारे का यह आंदोलन दो घंटे तक चलेगा। उनके इस कदम को छात्रों के मुद्दों और उनके साथ हुई कार्रवाई के विरोध में एक शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक हस्तक्षेप के तौर पर देखा जा रहा है।
अन्ना बोले- पेपर लीक और बेरोजगारी गंभीर चिंता का विषय
अन्ना हजारे ने कहा कि पेपर लीक, बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रिया में होने वाली देरी युवाओं के भविष्य से जुड़े गंभीर सवाल हैं। छात्रों के आंदोलन को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या मानना सही नहीं है। सरकार को यह समझना चाहिए कि युवा अपने भविष्य और अधिकारों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में उनकी बात सुनना और उनके साथ सकारात्मक बातचीत करना जरूरी है।
‘दमन नहीं, संवाद से निकले समाधान’
वरिष्ठ समाजसेवी ने लोकतंत्र में संवाद की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी समस्या का स्थायी समाधान दमन के रास्ते से नहीं निकाला जा सकता। उन्होंने सरकार से छात्रों और आंदोलनकारियों के साथ बातचीत करने की अपील की। अन्ना हजारे ने महात्मा गांधी के सत्याग्रह का हवाला देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और संवाद के जरिए समाधान तलाशने से ही संभव है।
दिल्ली में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी
उधर, दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन बुधवार को भी जारी रहा। नीट पेपर लीक और छात्रों से जुड़े दूसरे मुद्दों को लेकर आंदोलनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं। इसी बीच प्रदर्शन से जुड़े संगठन के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ प्रस्तावित बातचीत को लेकर अपनी स्थिति साफ कर दी।
‘मांगें मानेंगे तभी बातचीत के लिए जाएंगे’
सौरव दास ने कहा कि आंदोलनकारियों का समय महत्वपूर्ण है और वे केंद्रीय मंत्री से तभी मुलाकात करेंगे, जब सरकार उनकी मांगों पर ठोस कदम उठाने के लिए तैयार हो। उनके मुताबिक, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की ओर से दूसरी बार बातचीत के लिए बुलाया गया है, लेकिन आंदोलनकारियों ने अपनी शर्त स्पष्ट कर दी है।
पहली मुलाकात को लेकर भी जताई नाराजगी
सौरव दास ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि वे केंद्रीय मंत्री के घर या कार्यालय में बातचीत के लिए नहीं जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पहली मुलाकात के दौरान उन्हें करीब चार घंटे तक इंतजार करना पड़ा था। उनका कहना है कि अब आंदोलनकारी तभी बातचीत के लिए तैयार होंगे, जब सरकार उनकी मांगों को पूरा करने की दिशा में ठोस आश्वासन देगी।
सरकार और छात्रों के बीच बातचीत पर टिकी नजर
छात्र आंदोलन को लेकर अब सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत की स्थिति पर सबकी नजर है। एक तरफ आंदोलनकारी अपनी मांगों पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, तो दूसरी तरफ अन्ना हजारे ने भी छात्रों के मुद्दे पर शांतिपूर्ण आंदोलन का ऐलान कर दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है।
अन्ना के आंदोलन से बढ़ सकता है दबाव
अन्ना हजारे का मौन आंदोलन ऐसे समय हो रहा है, जब छात्रों के प्रदर्शन और कथित लाठीचार्ज को लेकर देशभर में चर्चा तेज है। अन्ना हजारे लंबे समय से भ्रष्टाचार और जनहित के मुद्दों पर आंदोलन करते रहे हैं। अब उन्होंने छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार से संवाद की अपील की है। उनके इस कदम से छात्रों की मांगों को लेकर सरकार पर राजनीतिक और सामाजिक दबाव बढ़ने की संभावना है।
छात्रों के मुद्दे पर आगे क्या होगा?
नीट पेपर लीक, बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रिया में देरी जैसे मुद्दे सीधे तौर पर देश के लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़े हैं। ऐसे में अन्ना हजारे का मौन आंदोलन और दिल्ली में जारी छात्रों का विरोध प्रदर्शन आने वाले दिनों में सरकार के लिए एक नई चुनौती बन सकता है। अब देखना होगा कि सरकार आंदोलनकारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकलता है।
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