By Malay Ojha | Published: 22 July 2026 at 04:19 PM
मध्य प्रदेश में बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर सामने आए सरकारी आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। विधानसभा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से दिए गए लिखित जवाब के मुताबिक, पिछले पांच साल में प्रदेश से 61,112 बालिकाओं के लापता होने के मामले सामने आए हैं। इनमें से बड़ी संख्या में बालिकाओं को पुलिस ने तलाश कर सुरक्षित बरामद कर लिया, लेकिन 31 मई 2026 तक 3,241 बालिकाएं अब भी लापता हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में औसतन हर दिन करीब 33 बालिकाओं के गायब होने की शिकायत दर्ज हुई।
यह जानकारी कांग्रेस विधायक अजय अर्जुन सिंह के सवाल के जवाब में विधानसभा में रखी गई। सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों के दौरान लापता हुई बालिकाओं के मामलों ने प्रदेश में उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। खास बात यह है कि साल 2025 में बालिकाओं के लापता होने के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए।
2025 में सबसे ज्यादा बालिकाएं हुईं लापता
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2025 में कुल 13,146 बालिकाओं के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज की गई। यह पिछले पांच वर्षों में सबसे बड़ा आंकड़ा है। वहीं, साल 2026 में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जनवरी से 31 मई तक यानी सिर्फ पांच महीनों के भीतर ही 6,309 बालिकाओं के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
पांच साल में 61 हजार से ज्यादा बालिकाएं गायब
विधानसभा में दिए गए जवाब के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में प्रदेश से कुल 61,112 बालिकाओं के लापता होने की शिकायतें सामने आईं। पुलिस की ओर से पुराने लंबित मामलों को भी शामिल करते हुए कुल 61,498 बालिकाओं को तलाश कर सुरक्षित दस्तयाब किए जाने की जानकारी दी गई है। हालांकि, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 3,241 बालिकाओं का अभी तक पता नहीं चल सका है।
रोजाना औसतन 33 बालिकाओं के लापता होने का दावा
इन आंकड़ों का विश्लेषण करें तो मध्य प्रदेश में बालिकाओं के लापता होने की औसत संख्या बेहद गंभीर तस्वीर सामने रखती है। पिछले पांच वर्षों के दौरान हर दिन औसतन करीब 33 बालिकाओं के लापता होने के मामले सामने आए। इस आंकड़े ने प्रदेश में बच्चियों की सुरक्षा, मानव तस्करी और उन्हें सुरक्षित रखने की व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
सरकार बोली- लापता बालिकाओं की तलाश जारी
सरकार ने विधानसभा में बताया कि 31 मई 2026 तक जिन 3,241 बालिकाओं का पता नहीं चल सका है, उनकी तलाश के लिए पुलिस लगातार काम कर रही है। प्रशासन का कहना है कि लापता बच्चों से जुड़ी हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाता है और उनकी खोज के लिए पुलिस स्तर पर जरूरी कार्रवाई की जा रही है।
बच्चों के गायब होने पर सीधे दर्ज होती है प्राथमिकी
सरकारी जवाब में बताया गया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के तहत बच्चों के गायब होने की शिकायत मिलने पर संबंधित थाने में अपहरण की धाराओं के तहत सीधे प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की जाती है। इसके बाद पुलिस लापता बच्चे की तलाश और उसे सुरक्षित वापस लाने के लिए जांच आगे बढ़ाती है।
मानव तस्करी रोकने के लिए अभियान भी चल रहा
सरकार ने बालिकाओं और बच्चों को सुरक्षित वापस लाने के लिए चलाए जा रहे अभियानों का भी उल्लेख किया। मानव तस्करी की रोकथाम और लापता बच्चों की बरामदगी के लिए ‘ऑपरेशन मुस्कान’ चलाया जा रहा है। इसके अलावा किशोरियों के लिए ‘सृजन’ और बालकों के लिए ‘अभिमन्यु’ अभियान भी संचालित किए जा रहे हैं।
52 महिला थानों में विशेष इकाइयां गठित
मानव तस्करी के मामलों पर कार्रवाई के लिए प्रदेश स्तर पर मानव तस्करी निरोधी ब्यूरो काम कर रहा है। इसके साथ ही जिला स्तर पर संचालित 52 महिला थानों में मानव तस्करी विरोधी इकाइयां गठित की गई हैं। इन इकाइयों का उद्देश्य लापता बच्चों की तलाश के साथ-साथ मानव तस्करी से जुड़े मामलों की पहचान करना और उनके खिलाफ कार्रवाई करना है।
हर महीने होती है लापता बालिकाओं के मामलों की समीक्षा
सरकार के अनुसार, लापता बालिकाओं की बरामदगी को लेकर जिला और राज्य स्तर पर हर महीने समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती हैं। इन बैठकों में लंबित मामलों की स्थिति की समीक्षा की जाती है और बच्चों की तलाश में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली जाती है।
बरामदगी के आंकड़े राहत देते हैं, लेकिन सवाल भी कायम
सरकारी आंकड़ों में बड़ी संख्या में बालिकाओं की बरामदगी का दावा किया गया है, लेकिन हजारों बच्चियों का अब भी पता नहीं चलना चिंता का विषय है। एक ओर पुलिस प्रशासन लापता बच्चों को तलाशने के लिए अभियान और विशेष इकाइयां चलाने की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर लगातार सामने आ रहे गुमशुदगी के आंकड़े यह सवाल भी खड़ा करते हैं कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में बालिकाएं किन परिस्थितियों में लापता हो रही हैं।
बालिकाओं की सुरक्षा पर जवाबदेही का सवाल
विधानसभा में सामने आए ये आंकड़े केवल गुमशुदगी के मामलों की संख्या नहीं हैं, बल्कि प्रदेश में बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी चुनौती की ओर भी इशारा करते हैं। खासकर 2025 में सामने आया रिकॉर्ड आंकड़ा और 2026 के शुरुआती पांच महीनों में ही छह हजार से ज्यादा मामलों का दर्ज होना चिंता बढ़ाने वाला है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि लापता होने वाली बालिकाओं की संख्या को कम करने के लिए सरकार और पुलिस व्यवस्था किस स्तर पर ठोस कदम उठाती है और जो 3,241 बालिकाएं अभी तक नहीं मिली हैं, उन्हें सुरक्षित घर तक कब पहुंचाया जा सकेगा।
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